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नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने PM ओली का फैसला पलटा, 13 दिन में सदन की बैठक बुलाने को कहा

नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली.
नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली.

चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर (Cholendra Shumsher JB Rana) की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने पीएम केपी शर्मा ओली के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए अगले 13 दिन के भीतर संसद सत्र बुलाने को कहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 23, 2021, 7:09 PM IST
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काठमांडू. नेपाल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) को वहां के सुप्रीम कोर्ट (Nepal Supreme Court) ने बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में देश की भंग संसद (Parliament) की बहाली के आदेश दिए हैं. चीफ जस्टिस चोलेंद्र शमशेर (Cholendra Shumsher JB Rana) की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने पीएम ओली के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए अगले 13 दिन के भीतर संसद सत्र बुलाने को कहा है.

दरअसल पीएम ओली के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 13 याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक देव गुरुंग की भी याचिका शामिल है. कोर्ट ने मंगलवार को एक साथ सभी याचिकाओं पर सुनवाई की. जिस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने संसद भंग को असंवैधानिक बताया है.

ओली ने 20 दिसंबर को संसद भंग करने की सिफारिश कर दी थी. उनके इस कदम के बाद राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नए जनादेश के लिए 30 अप्रैल और 10 मई को दो चरणों मे चुनाव कराए जाने का ऐलान कर दिया था.



नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिए गए थे ओली
ओली के संसद भंग करने के फैसले के बाद सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने ओली को ही पार्टी से निकाल दिया था. हालांकि, बाद में नेपाल के चुनाव आयोग ने ओली को पद से हटाए जाने और पार्टी से निकाले जाने के नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के फैसले को भी खारिज कर दिया था.

ओली पर लगाया था संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन का आरोप
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अपने धड़े के समर्थकों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा था कि ओली ने न सिर्फ पार्टी के संविधान और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया, बल्कि नेपाल के संविधान की मर्यादा का भी उल्लंघन किया और लोकतांत्रिक रिपब्लिक प्रणाली के खिलाफ काम किया. उन्होंने कहा था कि ओली के कदमों के चलते लोग प्रदर्शन करने को विवश हुए हैं और आज, पूरा देश प्रतिनिधि सभा को भंग किए जाने के खिलाफ है.
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