EXCLUSIVE: केपी ओली बोले- चीन के साथ रिश्तों का भारत-नेपाल संबंधों पर कोई असर नहीं

भारत और नेपाल संबंधों पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सीएनएन न्यूज18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. फाइल फोटो

भारत और नेपाल संबंधों पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सीएनएन न्यूज18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. फाइल फोटो

India-Nepal Relations: नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति बिल्कुल अलग है और मुश्किल भी. लेकिन हम लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत काम करते हैं और संविधान के तहत हम निर्णय लेंगे कि हमें किस तरह आगे बढ़ना है.

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  • Last Updated: March 15, 2021, 10:47 PM IST
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नई दिल्ली. नेपाल में राजनीतिक संकट बरकरार है. प्रचंड की पार्टी सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) ने रविवार को अपने मंत्रियों को दूसरी बार निर्देश जारी करते हुए सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को कहा, हालांकि प्रचंड के मंत्री उनके फैसले का पालन करने में अनिच्छुक दिख रहे हैं. उधर, नेपाल के चुनाव आयोग ने केपी ओली की पार्टी सीपीएम (यूएमएल) और सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) कहा है कि अगर वे दोनों अपनी पार्टियों का फिर से विलय करना चाहते हैं तो नया नाम और प्रतीक चिन्ह बताएं. दरअसल नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दोनों पार्टियों के विलय को फरवरी में खारिज कर दिया था. 2017 के आम चुनाव परिणामों के बाद दोनों पार्टियों का विलय हुआ था. नेपाल के ताजा हालात पर, राजनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय राजनयिकता के साथ भारत और नेपाल संबंधों पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सीएनएन न्यूज18 के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. पढ़िए इस बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

सवालः नेपाल के मौजूदा राजनीतिक हालात को आप किस तरह देखते हैं, जब सरकार में शामिल दो पार्टियां एक दूसरे से आंख भी नहीं मिलाना चाहतीं?
ओली: मौजूदा राजनीतिक हालात और इसकी दिशा देखते हुए मैंने संसद भंग करने की सिफारिश करते हुए और नए चुनावों की घोषणा की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अलग फैसला दे दिया और सदन को फिर से स्थापित कर दिया. स्थिति पुर्नबहाल हो गई और एक बड़ी राजनीतिक पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. स्थिति बिल्कुल अलग है और मुश्किल भी. पार्टी के अंदर कुछ समस्याएं हैं, लेकिन हम लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत काम करते हैं और संविधान के तहत हम निर्णय लेंगे कि हमें किस तरह आगे बढ़ना है.

सवालः संसद भंग करने की आपकी सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया और सदन को बहाल कर दिया. इस फैसले पर आप क्या महसूस करते हैं. क्या आपको लगता है कि आपकी लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट को आपके फैसले के बारे में समझा नहीं सकी.
ओलीः अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है, और संसद भंग करने की मेरी सिफारिश को नहीं माना है, तो मैं मानता हूं कि कहीं ना कहीं मेरी लीगल टीम के प्रयासों में कमी रही होगी, जिसके चलते शीर्ष कोर्ट को फैसले के निहितार्थों के बारे में संतुष्ट नहीं किया जा सका. सब कुछ एक न्यायिक प्रक्रिया और संविधान के तहत हुआ, लिहाजा मैं ज्यादा कुछ कह नहीं सकता. संसद के चुने हुए प्रतिनिधि अब अपनी पार्टियों के मुताबिक फैसला करेंगे.



सवालः भारत में धारणा है कि आपकी सरकार चीन के करीब है. खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में चीन काफी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. क्या आप आश्वस्त कर सकते हैं आपके नेतृत्व वाली सरकार में भारत के साथ नेपाल के संबंध पहले की तरह ही मजबूत हैं?
ओलीः भारत-नेपाल के दोस्ताना संबंधों के बारे में किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं होना चाहिए. चीन की बात करें तो दोनों पड़ोसियों के साथ हमारे बेहतरीन संबंध हैं. दोनों हमारे करीबी हैं. चीन के निवेश पर यही कहूंगा कि भारत और चीन दोनों देशों ने नेपाल में निवेश किया है. हम दूसरे देशों से आने वाले निवेश का भी स्वागत करते हैं और उनका भी जो निकट पड़ोसी हैं.

सवालः नई दिल्ली और काठमांडू के रिश्तों को विशेषकर कोरोना संकट, लॉकडाउन और अब वैक्सीन डिप्लोमेसी के समय कैसे परिभाषित करेंगे. भारत ने नेपाल को भी वैक्सीन की खुराक भेजी है. भारत और नेपाल के द्विपक्षीय रिश्तों पर आप क्या कहेंगे?
ओलीः मैं नहीं मानता कि भारत द्वारा भेजी गई वैक्सीन डिप्लोमेसी का मामला है. भारत ने एक पड़ोसी दोस्त की तरह वैक्सीन की 10 लाख खुराक हमें उपलब्ध कराई है. हमें दूसरे चरण के लिए भी भारत से वैक्सीन की खुराक मिली है. ये दोस्ती का मामला है, जो कि हमारे लिए बड़ी मदद है. भारत सरकार और यहां के लोगों का हम शुक्रिया अदा करते हैं. वायरस संकट के समय दोनों देशों के दोस्ताना रिश्ते उत्साह से लबरेज और अनुकरणीय रहे हैं, जो बताता हैं कि महामारी के खिलाफ लड़ाई में दो पड़ोसी देशों का रिश्ता कैसा होना चाहिए.

सवालः नेपाल में चीनी निवेश पर लौटते हैं, कई सारे देश इसके लाभान्वितों में रहे हैं. दक्षिण एशिया में बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान और कई अन्य देशों ने अब महसूस किया है कि चीन के कर्ज का बोझ सह पाना मुश्किल है. लंबे दौर में देखें तो श्रीलंका को इसका आभास होने लगा है. आप नेपाल में चीन के उधार रूपी भारी भरकम निवेश को चिंतित हैं?
ओलीः मैं ऐसा नहीं सोचता. हम बाहरी देशों से अलग-अलग स्वरूप में निवेश चाहते हैं, ये दान के रूप में भी हो सकता है और कर्ज के रूप में भी. हमारे संसाधन पर्याप्त नहीं है और हमें विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है. चीन से आ रहा निवेश चिंतित करने वाला नहीं है. हम रोजगार सृजन और उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरे देशों से निवेश और दान को आमंत्रित करना चाहते हैं. नेपाल में 'कर्ज के जाल' जैसी कोई स्थिति नहीं है.

सवालः आपका देश पहले सार्क का चेयरमैन था. पिछले कुछ सालों में सार्क की कोई बैठक नहीं हुई है. क्या आपको लगता है कि 2021 में सार्क की बैठक हो सकती है. क्या पाकिस्तान समिट की मेजबानी कर पाएगा और इन सभी देशों के लिए दक्षिण एशिया के विकास को आप कैसे देखते हैं?
ओलीः सार्क की स्थापना तब हुई थी, जब हमें लगा कि एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में यह विचारों के आदान-प्रदान का मंच हो सकता है और साझे चुनौतियों से निपटने के लिए भी प्रभावी हो सकता है. हम अभी तक के परिणामों से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन सार्क का निष्कर्ष अभी तक सकारात्मक रहा है. सार्क के कुछ देशों को भ्रम है कि संगठन प्रभावी नहीं है. पिछले तीन से चार सालों में हम सार्क की बैठक आयोजित नहीं कर पाए हैं. लेकिन उम्मीद है कि सार्क संगठन की बैठक आयोजित होगी और दूसरे देशों को भी अपनी जिम्मेदारियां निभाने का मौका मिलेगा.

सवालः नई दिल्ली और काठमांडू के रिश्तों में बीते साल नक्शे के तीन बिंदुओं को लेकर काफी गहमागहमी देखने को मिली. क्या ये चैप्टर समाप्त हो गया है? मतभेद सुलझा लिए गए हैं?
ओलीः बातचीत जारी है और हमें विश्वास है कि सच्चाई के आधार पर बातचीत के जरिए हम इन्हें सुलझा लेंगे.

सवालः भारत और नेपाल के रिश्तों का साझा इतिहास रहा है. दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं, जिनकी सीमाएं खुली और छिद्रित हों. कोरोना संकट से बाहर आती दुनिया में आप दोनों देशों के रिश्तों को किस तरह आगे बढ़ते हुए देखते हैं?
जवाबः हमारे रिश्ते कई तरह के रहे हैं. ये सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रहे हैं. इसके कई आयाम और दर्शन रहे हैं. महामारी के समय हमारे रिश्ते और मजबूत हुए हैं. सच्चाई, परस्पर लाभ और सम्मान के आधार पर हमारे दोस्ताना संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं.
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