अब इस तकनीक से मात्र 20 मिनट में लगेगा कोरोना का पता, परिणाम भी शत प्रतिशत सही

अब इस तकनीक से मात्र 20 मिनट में लगेगा कोरोना का पता, परिणाम भी शत प्रतिशत सही
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कोरोना (Coronavirus) के लिए 'एन1-स्टॉप-एलएएमपी' नामक जांच बिल्कुल सही जानकारी देती है. साथ ही सिर्फ 20 मिनट में परिणाम सामने आ जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 4:40 PM IST
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मेलबर्न. वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण संबंधी जांच का एक ऐसा नया एवं किफायती तरीका विकसित किया है, जो कोविड-19 (Covid-19) के लिए जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 वायरस की मौजूदगी के बारे में मात्र 20 मिनट में सटीक जानकारी दे सकता है. 'जर्नल ऑफ मेडिकल माइक्रोबॉयोलाजी' में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि 'एन1-स्टॉप-एलएएमपी' नामक जांच कोविड-19 संक्रमण की शत-प्रतिशत सटीक जानकारी देती है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि यह जांच प्रणाली अत्यंत सटीक और आसान है.

'यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न' में प्रोफेसर टिम स्टिनियर ने कहा, 'कोविड-19 वैश्विक महामारी को काबू करने की दौड़ में तेज एवं सटीक जांच परिणाम मिलना अहम है.' उन्होंने कहा, 'हमने कोविड-19 का पता लगाने के लिए एक वैकल्पिक आणविक जांच प्रणाली विकसित की है, जिसे ऐसे स्थानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां मानक प्रयोगशाला जांच संभव नहीं है और तेज जांच परिणाम की आवश्यकता है.' उन्होंने कहा कि इस जांच प्रक्रिया के लिए केवल एक नली की आवश्यकता है और यह जांच मात्र एक चरण में हो जाती है, जिसके कारण यह मौजूदा जांच प्रणालियों से अधिक सटीक एवं किफायती है. बता दें, दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 2 करोड़ 10 लाख 77 हजार 917 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 1 करोड़ 39 लाख 10 हजार 488 मरीज ठीक हो चुके हैं. 7 लाख 57 हजार 674 की मौत हो चुकी है.

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रूस की वैक्सीन स्पुतनिक वी की एक खुराक दो साल तक काम करेगी
रूस ने कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक वी लॉन्च करने के दो दिन बाद इसे लेकर नया दावा किया है. गैमालेया नेशनल रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर एलेक्जेंडर ने कहा है कि वैक्सीन की एक खुराक दो साल तक वायरस से बचाने में कारगर होगी. गिंट्सबर्ग ने रूस के सरकारी टीवी चैनल पर दिए इंटरव्यू में यह बात कही. उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन को तैयार करने में रिसर्च सेंटर को पांच महीने का वक्त लगा. रूस सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल यह वैक्सीन सिर्फ फ्रंटलाइन कर्मचारियों और दूसरे जरूरतमंद लोगों को ही लगाया जाएगा.
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