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नए नियम की वजह से दोनों पैर गंवा चुके सैनिक का टूटा एवरेस्ट चढ़ाई का सपना

भाषा
Updated: January 24, 2018, 1:07 AM IST
नए नियम की वजह से दोनों पैर गंवा चुके सैनिक का टूटा एवरेस्ट चढ़ाई का सपना
File Photo: AP

अफगानिस्तान में अपने दोनों पैर गंवा देने वाले एक पूर्व गोरखा सैनिक ने नेपाल सरकार के नए नियम की आलोचना की. यह नियम दोनों पैर से विकलांग व्यक्ति के एवरेस्ट की चढ़ाई करने पर प्रतिबंध लगाता है.

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अफगानिस्तान में अपने दोनों पैर गंवा देने वाले एक पूर्व गोरखा सैनिक ने नेपाल सरकार के नए नियम की आलोचना की. यह नियम दोनों पैर से विकलांग व्यक्ति के एवरेस्ट की चढ़ाई करने पर प्रतिबंध लगाता है. दिसंबर में लाए गए इस नए नियम की वजह से एवरेस्ट की चढ़ाई करने का गोरखा सैनिक का सपना अधूरा रह गया.

हरि बुद्ध मगर (38) अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ा प्रशिक्षण ले रहे थे. वह एवरेस्ट फतह करने वाले ऐसे पहले व्यक्ति बनना चाहते थे जो अपने दोनों पैर गंवा चुका हो.

यह नियम दोनों पैर से विकलांग व्यक्ति और आंखों की रौशनी गंवा चुके व्यक्तियों को एवरेस्ट की चढ़ाई करने से रोकता है. इस नियम की अक्षम लोगों के लिए काम करने वाले दुनियाभर के अधिकार समूहों ने आलोचना की.


मगर ने नए नियमों को ‘अन्यायपूर्ण’ और ‘भेदभावपूर्ण’ बताया. उन्होंने बताया, ‘ मैं मानता हूं कि सरकार को जोखिम कम करने के लिए नियम बनाने होते हैं लेकिन इसका जवाब इस तरह के प्रतिबंध नहीं हैं.’

बता दें, मगर ने अफगानिस्तान में वर्ष 2010 आईईडी विस्फोट में घुटने से ऊपर के अपने दोनों पैर गंवा दिए थे. तब वह ब्रिटिश सेना में नेपाली इकाई ब्रिगेड ऑफ गोरखाज में सेवारत थे.

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First published: January 24, 2018, 1:03 AM IST
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