ऑनलाइन नफरत फैलाने वालों पर न्यूजीलैंड की पीएम सख्त, कहा- सोशल मीडिया एल्गोरिद्म को समझना होगा

क्राइस्टचर्च कॉल की शनिवार को दूसरी सालगिरह मनाई गई. (फोटो: AP)

क्राइस्टचर्च कॉल की शनिवार को दूसरी सालगिरह मनाई गई. (फोटो: AP)

Christchurch Call Initiative: ऑनलाइन नफरत को खत्म करने के मकसद से शुरू हुई पहल क्राइस्टचर्च कॉल की शनिवार को दूसरी सालगिरह मनाई गई. इस कार्यक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुएल मैक्रॉ और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन समेत कई बड़े लीडर्स मौजूद थे.

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वेलिंगटन. न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न (Jacinda Ardern) ने शनिवार को ऑनलाइन माध्यमों से फैल रही हिंसा को लेकर चर्चा की. उन्होंने विश्व के नेताओं और टेक कंपनियों से कहा है कि ऑनलाइन हिंसक चरमपंथ को खत्म करने के लिए सोशल मीडिया (Social Media) की एल्गोरिद्म को समझने के क्षेत्र में प्रयास करना जरूरी है. इस कार्यक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुएल मैक्रॉ (Emmanuel Macron) और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) समेत कई बड़े वैश्विक नेता मौजूद थे.

ऑनलाइन नफरत को खत्म करने के मकसद से शुरू हुई पहल क्राइस्टचर्च कॉल की शनिवार को दूसरी सालगिरह मनाई गई. वर्चुअल तौर पर आयोजित हुए इस कार्यक्रम में आर्डर्न ने कहा, 'एल्गोरिद्म का अस्तित्व अपने आप में समस्या नहीं है. समस्या यह है कि इसका इस्तेमाल नैतिक रूप से किया जा रहा है या नहीं.' उन्होंने कहा, 'अगले वर्ष नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ यह मुद्दा समुदाय के लिए विशेष तौर पर ध्यान में होगा.'

फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट भी हैं पहल में शामिल

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, आर्डर्न ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियों ने सकारात्मक हस्तक्षेप के लिए एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करने की इच्छा जाहिर की है. हालांकि, इस दौरान उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कंपनियां हानिकारक कंटेट को चलाने वाले एल्गोरिद्म के इस्तेमाल को कैसे बदलेंगी. खास बात है कि इस पहल को 50 से ज्यादा देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और फेसबुक, गूगल, ट्विटर और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों का समर्थन हासिल है.


फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ट्विटर और यूट्यूब की तरफ से स्थापित किए गए एनजीओ ग्लोबल इंटरनेट फोरम टू काउंटर टेरेरिज्म (GIFCT) ने कहा है कि साल 2019 से अब तक प्रगति हुई है. क्राइस्टचर्च कॉल पहल की शुरुआत न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में हुए एक मस्जिद में हुए हमले के बाद आर्डर्न और मैक्रॉ ने साल 2019 में की थी. इस हमले में एक व्यक्ति ने मस्जिद में जाकर 51 लोगों को मार दिया था. साथ ही इस घटना की फेसबुक पर लाइव स्ट्रीमींग भी की गई थी.

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