किसी को भी दक्षिण चीन सागर में सैन्यीकरण के लिए बहाने का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए : चीन

दक्षिण चीन सागर में वियतनाम, फिलीपिन, मलेशिया, ब्रूनेई और ताईवान भी दावा करता है. इस सागर में सितंबर में एक चीनी विध्वसंक और अमेरिकी युद्धक जहाज के बीच भिडंत होते होते बची थी.

भाषा
Updated: November 10, 2018, 6:38 PM IST
किसी को भी दक्षिण चीन सागर में सैन्यीकरण के लिए बहाने का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए : चीन
(सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: November 10, 2018, 6:38 PM IST
चीन ने कहा है कि दक्षिण चीन सागर में वॉटर ट्रांसपोर्ट की आजादी की कोई समस्या नहीं है तथा किसी भी देश को इस क्षेत्र में सैन्यीकरण करने के लिए किसी बहाने का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. करीब करीब पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करने वाला चीन इस क्षेत्र में अमेरिका के वॉटर ट्रांसपोर्ट और गश्त वाली उड़ान से नाखुश है.

दक्षिण चीन सागर में वियतनाम, फिलीपिन, मलेशिया, ब्रूनेई और ताईवान भी दावा करता है. इस सागर में सितंबर में एक चीनी विध्वसंक और अमेरिकी युद्धक जहाज के बीच भिडंत होते होते बची थी.

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चीन के स्टेट काउंसलर यांग जीची ने यहां शुक्रवार को एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘नौवहन और उड़ान में बाधा पहुंचाये जाने की कोई समस्या नहीं है. इसलिए सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए नौवहन और उड़ान की आजादी को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करना अनुचित है. ’’

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ, रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस और चीन के रक्षा मंत्री वी फेंगे भी इस संवाददाता सम्मेलन में मौजूद थे.

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दोनों चीनी नेता इस माह बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के बीच भेंटवार्ता का मंच तैयार करने के लिए वाशिंगटन आये हैं.
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विवादास्पद क्षेत्र में चीन की ओर से रक्षा सुविधाएं निर्माण करने के बारे में बढ़ती वैश्विक चिंता को दूर करने का परोक्ष प्रयास करते हुए यांग ने कहा कि बीजिंग बाहर के संभावित खतरों के जवाब में बस कुछ सुरक्षा सुविधाएं तैयार कर रहा है.

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उन्होंने कहा कि चीन ने इस क्षेत्र में द्वीपों और समुद्री चट्टानों पर कुछ निर्माण किये हैं लेकिन ‘उनमें से ज्यादार असैन्य सुविधाएं’ हैं जिनका उद्देश्य चीनी जनता के हितों की पूर्ति करना और अन्य को सार्वजनिक वस्तुएं प्रदान करना भी है.

मैटिस ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून और मार्ग संबंधी अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का कड़ाई से पालन करता है और ‘‘जहां कहीं भी अंतरराष्ट्रीय कानून इजाजत देगा, अमेरिका उड़ान भरेगा, नौवहन करेगा और परिचालन करेगा. ’’

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