नॉर्थ कोरिया के पास हैं 60 परमाणु बम, एंथ्रेक्स और चेचक से भी बनाया हथियार

नॉर्थ कोरिया के पास हैं 60 परमाणु बम, एंथ्रेक्स और चेचक से भी बनाया हथियार
उ. कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन (फाइल फोटो)

North Korea: अमेरिकी सेना की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नॉर्थ कोरिया के पास 60 परमाणु बम और 5000 टन रासायनिक हथियार मौजूद हैं. इसके आलावा किम जोंग उन ने जैविक हथियार भी बना लिए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 10:30 AM IST
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प्योंग्योंग. उत्तर कोरिया (North Korea) हर साल अपने परमाणु बमों (Nuclear bombs) के जखीरे को बढाता जा रहा है और इसी के साथ दुनिया में परमाणु युद्ध का ख़तरा भी बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी सेना (US Army) की एक आंतरिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि किम जोंग उन (Kim JOng Un) की सेना के पास 60 से अधिक परमाणु बम मौजूद हैं. इन बमों के निशाने पर अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया है. इसके अलावा उत्तर कोरिया के पास दुनिया में तीसरा सबसे ज्यादा रसायनिक हथियारों का जखीरा है, जिसका कुल वजन 5,000 टन से भी ज्यादा बताया जाता है.

सियोल की योनहैप न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी सेना के मुख्यालय ने "नॉर्थ कोरियन टैक्टिक्स" के नाम से एक रिपोर्ट जारी की है. कहा गया कि नार्थ कोरिया की ओर से इन हथियारों को छोड़ने की कोई संभावना नहीं है. आर्मी हेडक्वॉर्टर ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 20 से लेकर 60 परमाणु बम है. इसके अलावा उसके पास हर साल 6 नए बम बनाने की क्षमता भी मौजूद है. उसके पास 20 अलग-अलग प्रकार के 2500 से 5000 टन रासायनिक हथियार हैं. इस बात की भी बहुत संभावना है कि नार्थ कोरिया की सेना तोपों में रासायनिक गोलों का इस्तेमाल कर सकती है.






बीमारियों को भी बनाया जैविक हथियार
इस रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्थ कोरिया ने जैविक हथियारों पर शोध किया है. आशंका है कि उसने एंथ्रेक्स और चेचक को हथियार बनाया है, जिसका इस्तेमाल वह साउथ कोरिया, अमेरिका और जापान के खिलाफ कर सकता है. केवल एक किलोग्राम एंथ्रेक्स सियोल में करीब 50 हजार लोगों की जान ले सकता है. नॉर्थ कोरिया ने साइबर वॉर की भी क्षमता हासिल कर ली है. नॉर्थ कोरिया के पास करीब 6000 हैकर्स हैं, जिनमें से कई चीन, बेलारूस, मलेशिया, रूस और भारत से भी काम करते हैं. किम की सेना ने बॉयोलॉजिकल वेपन को भी विकसित किया है, जिसे किसी भी मिसाइल में फिट किया जा सकता है.

ट्रंप से मुलाक़ात विफल रहीं
उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को इसलिए विकसित कर रहा है क्योंकि उसे लगता है कि परमाणु हमला करने का खतरा उसके दुश्मन देशों को उत्तर कोरिया में तख्तापलट करने की संभावनाओं से रोकेगा. यह भी कहा गया कि किम जोंग उन लीबिया में मुअम्मर गद्दाफी की मौत के गवाह रहे हैं और वह नहीं चाहते कि उत्तर कोरिया में ऐसा हो. कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण करने को लेकर ट्रंप और किम के बीच पिछले साल 12 जून को सिंगापुर में पहली बैठक हुई. दूसरी मुलाकात 28 फरवरी को वियतनाम में हुई थी, किम जोंग उन ट्रेन से 4 हजार किमी की यात्रा कर यहां पहुंचे थे. तीसरी बार ट्रंप ने कोरियाई प्रायद्वीप के असैन्य क्षेत्र (डीमिलिट्राइज्ड जोन, डीएमजेड) में 30 जून को किम जोंग-उन से मुलाकात की थी. हालांकि, इन मुलाकातों का कोई पॉजिटिव रिजल्ट नहीं देखने को मिला.
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