नॉर्वे में 41 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 21.7 डिग्री हुआ तापमान

नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीपसमूह का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है.

नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीपसमूह (Norway’s Svalbard archipelago) का तापमान (Rise Record temperature) रिकॉर्डतोड़ 21.7 डिग्री हो गया.

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    ओस्लो. नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीपसमूह (Norway’s Svalbard archipelago) का तापमान (Rise Record temperature) रिकॉर्डतोड़ 21.7 डिग्री हो गया. नॉर्वे के मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार को मैनलैंड और नॉर्थ पोल के बीच का तापमान बढ़कर 21.7 डिग्री दर्ज की गई. नॉर्वे की मीडिया समूह में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के दूसरे इलाकों की तुलना में आर्कटिक द्वीपसमूह कहीं ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है. इन रिपोर्टों में आर्कटिक और अलास्का से लेकर साइबेरिया (Arctic, Alaska to Sieberia) के दूसरे भागों में तापमान में बढ़ोतरी के कारण पैदा होने वाले जोखिमों को रेखांकित किया गया है.

    41 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

    नार्वे के मौसम विभाग ने ट्वीव कर कहा कि यहां तापमान में बढ़ोतरी ने 41 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि वर्ष 1979 में लॉन्गेयर शहर का तापमान बढ़कर 21.03 डिग्री हो गया था. अब इस साल शहर का तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़कर 21.07 डिग्री तक पहुंच गया है.

    नॉर्थ पोल से 1300 किलोमीटर की दूरी पर है लॉन्गेयर

    लॉन्गेयर शहर नार्वे में है और यह अपनी कई खासियतों के चलते दुनियाभर में मशहूर है. दुनिया के सबसे उत्तरी छोर पर बसे इस शहर की आबादी 2000 के आस-पास है. स्वाबलार्ड आइलैंड का ये अकेला ऐसा शहर है जहां पर जमने वाली ठंड के बावजूद लोग रह रहे हैं. यह शहर नॉर्थ पोल से 1,300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

    कोल कंपनी के लिए इस शहर को बसाया गया

    लॉन्गेयर के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस आर्कटिक टाउन की तलाश अमेरिकी जॉन लॉन्गेयर ने की थी. 1906 में यहां उन्होंने आर्कटिक कोल कंपनी शुरू की और माइनिंग ऑपरेशन के लिए 500 लोग लाए गए. लॉन्गेयर एक कोल कंपनी का बसाया शहर था, लेकिन 1990 तक यहां से ज्यादातर माइनिंग ऑपरेशन स्वियाग्रूवा (Sveagruva) शिफ्ट हो गए. अब ये टाउन एक बड़ा टूरिस्ट्स प्वाइंट बन गया है और बड़ी संख्या में यहां रिसर्च का काम भी किया जा रहा है.

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    यहां साल में चार महीने सूरज नहीं निकलता और 24 घंटे रात रहती है. यहां सड़कों के कोई नाम नहीं हैं और इन्हें नंबर्स से जाना जाता है। ट्रांसपोर्टेशन के लिए यहां सिर्फ स्नो स्कूटर का इस्तेमाल होता है.

    यहां इसलिए नहीं दी जाती है मरने की इजाजत

    यहां कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए या मौत के करीब हो, तो उसे आखिरी दिनों के लिए प्लेन या शिप की मदद से नॉर्वे के दूसरे हिस्सों में भेज दिया जाता है. वजह यह है कि शहर में एक बहुत ही छोटा कब्रिस्तान है. पिछले 70 साल में यहां तब से कोई भी दफनाया नहीं गया, जब से पता चला कि पहले दफनाई गईं लाशें अब तक जमीन में घुल भी नहीं पाई हैं. यहां पोलर बियर का खतरा बहुत ज्यादा है इसलिए उनसे बचने के लिए हर व्यक्ति को राइफल रखना पड़ता है.

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