अयोध्या और राम पर ओली के विवादित बयान पर नेपाल ने दी सफाई- वो मतलब नहीं था...

ओली के बयान पर नेपाल सरकार की सफाई
ओली के बयान पर नेपाल सरकार की सफाई

दुनिया भर से ओली (KP Sharma Oli) के बयान के लिए कड़ी निंदा झेलने के बाद नेपाल (Nepal) के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर पीएम ओली का बचाव किया. जारी बयान में नेपाल ने कहा कि ओली के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है, इस बयान का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है.

  • Share this:
काठमांडू. भगवान राम (Lord Rama) और अयोध्या (Ayodhya) को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) की टिप्पणी पर अब नेपाल सरकार बैकफुट पर नज़र आ रही है. मंगलवार को नेपाल और दुनिया भर से इस बयान के लिए कड़ी निंदा झेलने के बाद विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर पीएम ओली का बचाव किया. जारी बयान में नेपाल ने कहा कि ओली के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है, इस बयान का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. इस बयान में आगे ये भी कहा गया कि पीएम का इरादा किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करना नहीं था.

ओली ने अपनी विवादास्पद टिप्पणी में कहा था कि भगवान राम बीरगंज के पास ठोरी में पैदा हुए थे और असली अयोध्या नेपाल में है. नेपाल के विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने ओली की इस टिप्पणी की कड़ी निन्दा की और इसे 'निरर्थक तथा अनुचित' करार दिया. उन्होंने ओली से अपना विवादित बयान वापस लेने की मांग की. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का इरादा किसी की भावनाएं आहत करने का नहीं था. बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि उनकी टिप्पणी 'अयोध्या के महत्व और इसके सांस्कृतिक मूल्यों पर बहस करने के लिए नहीं थी.' इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टरई ने ट्वीट किया, 'ओली के बयान ने सारी हदें पार कर दी हैं. अतिवाद से केवल परेशानी उत्पन्न होती है.'

'रामायण सुनें पीएम ओली'
भट्टरई ने ओली पर व्यंग्य करते हुए कहा, 'अब प्रधानमंत्री ओली से कलियुग की नयी रामायण सुनने की उम्मीद करें.' नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री एवं हिन्दू समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा, 'प्रधानमंत्री से इस तरह की मूर्खतापूर्ण, अपुष्ट और अप्रमाणित टिप्पणी वांछनीय नहीं थी. प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री ओली का ध्यान भारत के साथ संबंधों को सुधारने की जगह नष्ट करने पर केंद्रित है, जो उचित नहीं है.' सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता बामदेव गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री ओली को अयोध्या पर की गई अपनी टिप्पणी वापस लेनी चाहिए.
ये भी पढ़ें :-



मंगल पर मिशन भेजने वाला पहला मुस्लिम देश होगा UAE, जानें डिटेल

इज़राइल में कैसे होती है ओस से सिंचाई और रेगिस्तान में मछली पालन?

गौतम ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, 'प्रधानमंत्री ओली ने बिना किसी साक्ष्य के बयान दिया और इससे देश के भीतर और बाहर केवल विवाद खड़ा हुआ है. इसलिए उन्हें बयान वापस लेना चाहिए और इसके लिए माफी मांगनी चाहिए.' उन्होंने कहा, 'नेपाल और भारत दोनों देशों में ही बड़ी संख्या में भगवान राम के भक्त हैं और किसी को भी लोगों की धार्मिक भावना को आहत नहीं करन चाहिए. किसी वास्तविक कम्युनिस्ट के लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि भगवान राम यहां पैदा हुए या वहां पैदा हुए.' सत्तारूढ़ पार्टी की पब्लिसिटी कमेटी के उप-प्रमुख बिष्णु रिजाल ने कहा, 'उच्च पद पर आसीन व्यक्ति की इस तरह की निरर्थक और अनुचित टिप्पणी से देश की प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचेगी.'

ओली और प्रचंड की बातचीत शुरू
उधर नेपाल नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच ओली और सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पार्टी को टूटने से बचाने के लिए मंगलवार को छह दिन के बाद फिर से बातचीत शुरू की. पार्टी में दोनों नेताओं के गुटों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं. 'द काठमांडो पोस्ट' की खबर के मुताबिक, प्रचंड के प्रेस सलाहकार ने कहा कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष ओली और कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड ने चर्चा फिर से शुरू की है. दोनों नेताओं ने आखिरी बार आमने-सामने की वार्ता पिछले बुधवार को की थी.

ये भी पढ़ें :- जानिए ऑस्ट्रेलिया के पानी पर कैसे चीन ने जमा लिया कब्जा?

यह बातचीत शुक्रवार को स्थायी समिति की होने वाली अहम बैठक से पहले हो रही है. ऐसी उम्मीद है कि इस बैठक में 68 साल के प्रधानमंत्री का राजनीतिक भविष्य तय हो सकता है. ओली पहले आरोप लगा चुके हैं कि उनके विरोधी भारत की मदद से उन्हें पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं. एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रचंड ने कहा था कि वह पार्टी को टूटने नहीं देंगे और कहीं से भी पार्टी की एकता को कमजोर करने वाली कोशिश से कोरोना वायरस महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से लड़ाई में अघात पहुंचेगा. उनकी इस टिप्पणी के बाद स्थायी समिति की अहम बैठक होने जा रही है.

प्रचंड के सुर नरम दिखे
अपने गृहनगर चितवान में रविवार को एनसीपी के सदस्यों को संबोधित करते हुए प्रचंड ने कहा कि वह पार्टी की एकता को बरकरार रखने के लिए दृढ़ हैं और 'एक बड़ी पार्टी में मतभेद, विवाद और बहस स्वाभाविक हैं.' प्रचंड समेत पार्टी के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा मांग रहे हैं. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री की भारत विरोधी टिप्पणी 'न राजनीतिक रूप से सही हैं और न ही कूटनीतिक रूप से उचित.' मतभेद तब और बढ़ गए जब ओली ने कहा कि उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए सत्तारूढ़ दल के नेता दक्षिणी पड़ोसी के साथ मिल गए हैं, क्योंकि उनकी सरकार ने नया राजनीति नक्शा जारी किया है जिसमें भारत के तीन क्षेत्रों को शामिल किया गया है.

ओली और प्रचंड हाल के दिनों में आमने-सामने की आधा दर्जन से ज्यादा वार्ताएं कर चुके हैं और सत्ता में साझेदारी के समझौते के बहुत करीब पहुंच गए हैं. शुक्रवार को एनसीपी की 45 सदस्य शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक आखिरी समय पर चौथी बार टाली गई थी. इसका कारण बाढ़ और भूस्खलन बताया गया है जिसमें कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई है. इस्तीफे के बढ़ते दबाव के बीच, प्रधानमंत्री ओली ने पार्टी के अंदर दरार को अहमियत नहीं देते हुए कहा कि विवाद तो नियमित घटनाएं हैं जिन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज