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असम में हमारे घुसपैठिए है या नहीं, भारत दे सबूत तो बातचीत से सुलझाएंगे मुद्दा: बांग्लादेश

असम में हमारे घुसपैठिए है या नहीं, भारत दे सबूत तो बातचीत से सुलझाएंगे मुद्दा: बांग्लादेश

सोमवार को असम एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट जारी हुआ.

सोमवार को असम एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट जारी हुआ.

बांग्लादेश के गृहमंत्री अस-दुजमान खान ने बुधवार 'News18' के साथ फोन पर हुई बातचीत में ये बातें कही. उन्होंने कहा, 'असम एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं हैं. इन्हें बांग्लादेशी बताया जा रहा है, जिसके पीछे कोई तर्क या ठोस सबूत नहीं है. उम्मीद है कि भारत 40 लाख बेघर लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगा.'

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    असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) पर भारत में सियासत गर्मायी हुई है. सोमवार को जारी एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया. इसमें ज्यादातर लोग बांग्लादेशी बताए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही देश में रहने का अधिकार है. यहां कोई अवैध तरीके से नहीं रह सकता. वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश ने पूरे मामले में पल्ला झाड़ते हुए कहा कि असम के 40 लाख लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिए समझने का कोई तर्क (लॉजिक) नहीं है. उम्मीद है कि उन्हें बांग्लादेश नहीं भेजा जाएगा.

    बांग्लादेश गृहमंत्री ने कहा, 'अगर इस पर भारत कोई ठोस सबूत पेश करे, तो मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है.'

    बांग्लादेश के गृहमंत्री अस-दुजमान खान ने बुधवार 'News18' के साथ फोन पर हुई बातचीत में ये बातें कही. उन्होंने कहा, 'असम एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों के नाम नहीं हैं. इन्हें बांग्लादेशी बताया जा रहा है, जिसके पीछे कोई तर्क या ठोस सबूत नहीं है. ये भारत का आतंरिक मामला है, जिसे उसे खुद ही अपने स्तर पर सुलझाना होगा. उम्मीद है कि भारत 40 लाख बेघर लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगा.'

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    बांग्लादेश छोड़कर गए लोगों का हो चुका पुनर्वास
    अस-दुजमान खान ने कहा, '1971 के बंटवारे के बाद कुछ लोग बांग्लादेश छोड़कर चले गए थे. जिन लोगों ने देश छोड़ा था, वो अब कहीं न कहीं बस चुके हैं. सहमति समझौते के तहत बांग्लादेश के कुछ लोगों ने भारत में भी शरण ली थी, लेकिन बाद में उन्हें वापस भेज दिया गया, जहां उनका पुनर्वास कर दिया गया. इसके बाद भारत में किसी भी बांग्लादेशी शरणार्थी के होने की रिपोर्ट उनकी सरकार के पास नहीं है.'

    सबूत हो, तो आपसी बातचीत से सुलझ सकता है मामला
    बांग्लादेशी गृहमंत्री ने कहा, 'ऐसा विश्वास करना गलत होगा कि असम एनआरसी में जिन 40 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया, वो सभी बांग्लादेशी हैं. अगर भारत इस मामले में कोई मजबूत तर्क और ठोस सबूत देता है, तो इस मुद्दे को बातचीत के माध्यम से हल किया जा सकता है. बातचीत के बाद अगर जरूरत हो, तो बांग्लादेश उन्हें अपने देश के नागरिक के तौर पर स्वीकार कर सकता है. मुझे लगता है कि इस तरह की स्थिति में पड़ोसी देश के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने का एकमात्र तरीका 'संवाद' है.'

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    NRC का भारत-बांग्लादेश के रिश्ते पर नहीं होगा असर
    बांग्लादेशी गृहमंत्री ने यह भी साफ किया कि असम एनआरसी मुद्दे का असर भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर नहीं पड़ेगा. अस-दुजमान खान ने कहा, 'दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंध है. इसी बेहतर संबंधों के बल पर हम ये उम्मीद करते हैं कि भारत किसी जल्दबाजी में असम के 40 लाख लोगों को बांग्लादेश नहीं भेजेगा.'

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    बता दें कि बांग्लादेश के गृहमंत्री से पहले वहां के सूचना मंत्री हसन उल हक ने भी ऐसा ही बयान दिया था. मंगलवार को हक ने कहा, 'यह भारत और असम का आंतरिक मामला है, बांग्लादेश का इस मामले से कुछ लेना-देना नहीं है और न ही ये लोग (40 लाख) हमारे हैं. हो सकता है कि वे असम के पड़ोसी राज्यों के हों. इस मामले में बांग्लादेश की भागीदारी का कोई मामला नहीं उठता.


    बांग्‍लादेश के सूचना मंत्री ने यह भी कहा, 'हमारी अर्थव्‍यवस्‍था अच्‍छी खासी बढ़ रही है. ऐसे में किसी बांग्‍लादेशी को भारत जाने की जरूरत ही नहीं है. वे लोग बांग्लादेशी हैं, तो भारत सरकार को आधिकारिक तौर पर बात करनी होगी.' सूचना मंत्री हसन उल हक ने स्‍पष्‍ट किया कि इस संबंध में बांग्‍लादेश असम सरकार से किसी प्रकार का संवाद नहीं करेगा.

    Tags: Bangladesh, NRC Assam

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