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मौसम से हुई तबाही ला सकती है जल्दी बुढ़ापा ! नए रिसर्च में हुआ हैरान कर देने वाला खुलासा

मौसम से हुई तबाही ला सकती है जल्दी बुढ़ापा ! नए रिसर्च में हुआ हैरान कर देने वाला खुलासा

इम्यून सिस्टम पर पड़ता है प्रभाव (सांकेतिक तस्वीर, आभार@dailyscience)

इम्यून सिस्टम पर पड़ता है प्रभाव (सांकेतिक तस्वीर, आभार@dailyscience)

रिसर्च में पाया गया है कि तूफान या किसी घातक मौसमी गतिविधियों का शरीर पर वहीं असर पड़ता है जो किसी व्यक्ति के बूढ़ा होने पर उसके इम्यून सिस्टम (Immune System) पर पड़ता है. कुल मिलाकर इस तरह की गतिविधि से जूझने वाल व्यक्ति का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और वह वक्त से पहले बूढ़ा हो जाता है.

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    मौसम में हुए बदलावों की वजह से हम लगातार नई-नई दिक्कतों से जूझ रहे हैं. पिछले कुछ दशकों से पानी और खाद्य पदार्थों की समस्याओं के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी देखी जा रही है. अब नए अध्ययन में एक नई बात सामने आई है, जिस जानकर यकीनन आप हैरान रह जाएंगे. रिसर्च में कहा गया है कि तूफान या किसी मौसमी त्रासदी से बचे लोगों में बुढ़ावा जल्दी आने की आशंका बनी रहती हैं. हाल ही में पीएनएस पत्रिका (PNS Magazine) में प्रकाशित शोध के मुताबिक ऐसे मकाउ बंदर जिन्होंने तूफान का अनुभव किया था उनमें बुढ़ापे के लक्षण जल्दी देखे गए. वहीं वे मकाऊ जिन्होंने किसी तरह का कोई तूफान नहीं देखा था तुलनात्मक रूप से वह देर से बुढ़े हुए.

    वन्य जीवन पर हुआ गहरा असर

    यह अध्ययन सितबंर 2017 में प्यूर्टो रिको में आए तूफान की तबाही के बाद किया गया था. इस तूफान में करीब 3000 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. ‘मारिया’ नाम के इस तूफान की वजह से करीब 34 लाख लोग कई हफ्तों तक बगैर बिजली के रहने को मजबूर हो गये थे और करीब 100 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. जहां इस तूफान से इंसानों ने अपनी जान गंवाई वहीं इससे वन्य जीवन पर भी गहरा असर पड़ा था. इन वन्य जीवों में रीशस मकाऊ भी थे जो प्यूर्टो रिको के एक अलग-थलग केयो सेंटिगो नाम के आइलैंड पर पाए जाते हैं.

    इम्यून सिस्टम पर असर

    1938 से इस कैरेबियन द्वीप के प्राइमेट रिसर्च सेंटर में रहने वाले जीवित मकाउ पर तूफान मारिया से पहले और इस प्राकृतिक आपदा के बाद इन बंदरों के चार साल के आंकड़े इकट्ठे किये गये, अध्ययन में सामने आया कि तूफान की वजह से उम्र बढ़ने पर बंदरों के इम्यून सिस्टम में कमी आ सकती है.

    इससे पहले अध्ययन यह स्थापित कर चुका है कि तूफान की वजह से चरम परिस्थितियों से गुजरने वाले लोगों में दिल की बीमारी और बुजुर्गों में दूसरी बीमारियों के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, शोधकर्ताओं को अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि यह रोग होने या बूढ़ा होने का खतरा क्यों है.

    मकाउ बंदरों पर हुआ अध्ययन

    एक ही काल और उम्र के लोग भले ही जन्म से समान हो लेकिन फिर भी उनकी जैविक उम्र अलग हो सकती है. वैज्ञानिकों ने तूफान में जीवित बचे मकाउ में जैविक उम्र बढ़ाने वाले मार्करों का विश्लेषण किया. इस प्रक्रिया में आण्विक बदलाव के जरिए जीन में आने वाली रुकावटों को भी शामिल किया गया था. मकाऊ में इम्यून सेल्स यानी कोशिकाओं में जीन की प्रक्रिया का वैज्ञानिकों ने गहनता के साथ अध्ययन किया और पाया कि तूफान की प्रतिकूलता की वजह से बंदरों का इम्यून सिस्टम उम्र बढ़ने में तेजी ला सकता है. खास बात यह है कि तूफान की वजह से बंदरों के इम्यून सिस्टम के 4 फीसद जीन बदल चुके थे.

    इंसानी उम्र 7-8 साल हो सकती है कम!

    इस तरह से वैज्ञानिकों ने जीन एक्सप्रेशन पर उम्र बढ़ने वाले असर और उस पर हुए तूफान के प्रभाव में गहर संबंध पाया, जहां तूफान का प्रभाव इम्यून सिस्टम पर ठीक वैसा ही पड़ा था जैसा किसी के बुजुर्ग होने पर उसका इम्यून सिस्टम हो जाता है. शोध में पाया गया कि जिन बंदरों ने तूफान को झेला था, उनके इम्यून जीन एक्सप्रेशन पर जो असर पड़ा था उसने उन्हें करीब दो साल बूढ़ा कर दिया था जिसे अगर इंसानों की जिंदगी के आधार पर समझे तो 7-8 साल होगा.

    अध्ययन के बाद यह बात सामने आई है कि तूफान या किसी चरम मौसमी गतिविधी का शरीर पर वहीं असर पड़ता है जो किसी व्यक्ति के बूढ़ा होने पर उसके इम्यून सिस्टम पर पड़ता है. कुल मिलाकर इस तरह की गतिविधि से जूझने वाल व्यक्ति का इम्यून सिस्टम की उम्र बढ़ जाती है और वह वक्त से पहले बूढ़ा हो जाता है. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कुछ बंदरो की जैविक उम्र दूसरे बंदरों की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिससे यह साफ हुआ कि बंदरो के माहौल के दूसरे पहलू भी उनके प्रतिकूल परिस्थितियों  में दी जाने वाली प्रतिक्रिया पर असर डालते हैं. मसलन जो बंदर ज्यादा सामाजिक थे वह तूफान के बाद किसी भी तरह के हानिकारक असर को दूर करने में ज्यादा सक्षम थे.

    वैज्ञानिकों का कहना है कि तमाम तरह की शोध के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि चरम तूफान का इम्यून सेल जीन रेग्यूलेशन में बदलाव से संबंध होता है जो किसी जीव को वक्त  से पहले बूढ़ा कर सकती है.

    Tags: Science, Science news

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