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PM ओली की सफाई- मुझे संसद भंग करने के लिए मजबूर किया गया, ये राजनीतिक फैसला है

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो)

Nepal Political Crisis: नेपाल के कार्यकारी पीएम केपी शर्मा ओली ने अपने संसद भंग करने के फैसले का बचाव किया है. ओली ने आरोप लगाया है कि उन्हें ये फैसला लेने के लिए मजबूर किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 8:15 PM IST
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काठमांडू. नेपाल (Nepal) के कार्यकारी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने संसद भंग करने के फैसले को मजबूरी में लिया गया निर्णय बताया है. इस फैसले को कोर्ट में चुनौती से जुड़े सवाल पर ओली ने कहा कि ये एक राजनीतिक क़दम था और इसमें न्यायिक समीक्षा की आधिकारिक अनुमति नहीं है. ओली ने कहा कि मुझे पार्टी के ही कुछ नेताओं ने ये फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया था.

द काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के 25 दिसंबर के कारण बताओ नोटिस की प्रतिक्रिया में पीएम ओली ने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के ज़रिए अपना जवाब दिया. सुप्रीम कोर्ट को दिए 11 पन्नों के जवाब मे पीएम ओली ने कहा, 'संसद भंग करने की सिफ़ारिश करना और संसद भंग करना दोनों पूरी तरह राजनीतिक फ़ैसले हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ख़ुद ये सिद्धांत निर्धारित किया है कि ऐसे मुद्दों पर संवैधानिक और क़ानूनी वैधता के प्रश्न न्यायिक समीक्षा का विषय नहीं होने चाहिए. पार्टी के अंदर बढ़ते टकराव के बीच मुझे नहीं लगा कि सरकार चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने में सक्षम होगी.'

'मुझे मजबूर किया गया'
ओली ने कहा कि उन्हें नए जनादेश के लिए मजबूर किया गया क्योंकि सरकार पार्टी में हो रहे टकराव के बीच फंस गई थी. ओली ने अपने लिखित जवाब में इसका भी उल्लेख किया है कि उनका स्वार्थ केवल समृद्ध नेपाल और ख़ुशहाल नेपाली लोग चाहना है. संसद को भंग करने के बाद पीएम ओली ने मध्यावधि चुनाव के लिए 30 अप्रैल और 10 मई की तारीखों की घोषणा की थी. ओली का दावा है कि उनका ये क़दम ‘आवश्यकता के सिद्धांत’ पर आधारित है क्योंकि पार्टी की अंतहीन समस्याओं के कारण सरकार और संसद प्रभावित हो रहे थे.



नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते टकराव के बीच 20 दिसंबर 2020 को पीएम केपी ओली ने राष्ट्रपति को संसद भंग करने की सिफ़ारिश की थी जिसे राष्ट्रपति ने उसी दिन स्वीकार कर लिया था. तब से ओली दावा कर रहे हैं कि पार्टी में उनके विरोधियों पुष्प कमल दहल प्रचंड, माधव कुमार नेपाल और अन्य लोगों के मुश्किलें पैदा के कारण उन्हें ये कठोर क़दम उठाना पड़ा. हालांकि ओली की लोकप्रियता उनके भारत विरोधी रुख के कारण लगातार कम हो रही थी. भारत के प्रति कड़े रुख और बयानबाजी के बाद ही कम्युनिस्ट पार्टी की सीनियर लीडरशिप ने उन पर सवाल खड़े किये थे. ओली पर आरोप लगते रहे हैं कि वो चीन समर्थक होने चलते भारत विरोधी रुख अपनाए हुए हैं.
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