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Omicron scare: कोरोना वेरिएंट्स के खिलाफ कैसे काम करती हैं एंटीबॉडी, नए रैपिड टेस्ट से हुआ खुलासा

Omicron scare: कोरोना वेरिएंट्स के खिलाफ कैसे काम करती हैं एंटीबॉडी, नए रैपिड टेस्ट से हुआ खुलासा

शोधकर्ताओं ने कई अलग-अलग तरीकों से तकनीक का परीक्षण किया. (फाइल फोटो)

शोधकर्ताओं ने कई अलग-अलग तरीकों से तकनीक का परीक्षण किया. (फाइल फोटो)

Omicron scare,Antibodies Against Omicron: ड्यूक यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अध्यक्ष आशुतोष चिलकोटी ने कहा कि COVID-19 एंटीबॉडी और बायोमार्कर के लिए एक पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट विकसित करते समय, हमने महसूस किया कि एक खास तरह के वेरिएंट को बेअसर करने के लिए मनुष्य में मौजूद एंटीबॉडी की क्षमता का पता लगाने से इलाज में काफी लाभ पुहंच सकता है.

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    दुर्हम: जब से दुनिया के सामने कोरोना महामारी (Corona Pandemic) आई है तब से दुनिया भर के विशेषज्ञ वायरस (Virus) और वैक्सीन पर रिसर्च (Research on Vaccines) करन में जुटे हैं. वैज्ञानिकों ने वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी (Antibodies) को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के बायोमिडिकल इंजीनियरों ने एक ऐसी परीक्षण प्रणाली विकसित की है जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी व्यक्ति के शरीर में न्यूट्रलाइिजिंग एंटीबॉडीज कोविड-19 (Antibodies Against Covid Variants) के अलग अलग वेरिएंट के खिलाफ किस प्रकार से और कितनी अच्छी तरह से लड़ सकती है. इस रिसर्च को साइंस एडवासेज जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

    विशेषज्ञों का दावा है कि यह परीक्षण एक कोविड -19 संक्रमित व्यक्ति के इलाज में डॉक्टरों की काफी मदद कर सकता है और इससे डॉक्टर को भली प्रकार से पता चल सकेगा कि एक मरीज के इलाज के लिए कौन से मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की जरूरत है.

    ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर कैमरन वोल्फ ने कहा, वर्तमान में हमारे पास वास्तव में कोविड वेरिएंट का आकलन करने का कोई तेज और कारगर उपाय नहीं है और न ही कोई ऐसा तरीका है जिससे यह पता किया जा सके कि किसी व्यक्ति में कितनी क्षमता में वायरस मौजूद हैं और उससे लड़ने वाले एंटीबॉडी की क्षमता क्या है.

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    वोल्फ ने कहा कि हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन किया जा सके लेकिन अगर ओमिक्रॉन सबसे खराब स्थिति में पहुंच गया तो इसका आंकलन करना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

    ड्यूक यूनिवर्सिटी में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के अध्यक्ष आशुतोष चिलकोटी ने कहा कि COVID-19 एंटीबॉडी और बायोमार्कर के लिए एक पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट विकसित करते समय, हमने महसूस किया कि एक खास तरह के वेरिएंट को बेअसर करने के लिए मनुष्य में मौजूद एंटीबॉडी की क्षमता का पता लगाने से इलाज में काफी लाभ पुहंच सकता है.

    चिलकोटी ने कहा कि हम अपने परीक्षण के लिए डेल्टा वेरिएंट को शामिल करने में एक से दो सप्ताह का समय लगा. अब हम परीक्षण के लिए ओमिक्रॉन वेरिएंट पर करेंगे. उन्होंने कहा कि हमें टेस्टिंग के लिए इस वेरिएंटे स्पाइक प्रोटीन की जूरूरत है जिसके दुनिया भर में कई समूह सामने आ चुके हैं.

    वैज्ञानिकोंन अपने परीक्षण में COVID-19 वैरिएंट स्पाइक-ACE2-प्रतिस्पर्धी एंटीबॉडी न्यूट्रलाइज़ेशन को शार्ट में CoVariant-SCAN करार दिया है. परीक्षण की तकनीक एक बहुलक ब्रश कोटिंग पर टिकी हुई थी जो किसी भी चीज को रोकने के लिए नॉन-स्टिक कोटिंग के रूप में काम करती थी. शोधकर्ताओं ने एक स्लाइड पर फ्लोरोसेंट मानव ACE2 प्रोटीन – वायरस के स्पाइक प्रोटीन के सेलुलर लक्ष्यों को मुद्रित किया. स्लाइड में कुछ विशिष्ट स्थानों पर COVID-19 के प्रत्येक प्रकार के लिए विशिष्ट स्पाइक प्रोटीन भी मुद्रित किए गए. जब इसकी टेस्टिंग शुरू हुई तो, ACE2 प्रोटीन स्लाइड से अलग हो गए और अभी भी स्लाइड से जुड़े स्पाइक प्रोटीन द्वारा पकड़े गए, जिससे स्लाइड चमकने लगी.

    इस टेस्टिंग में सबसे खास बात यह थी कि एंटीबॉडी को कमजोर बनाने के काम में स्पाइक प्रोटीन अब ACE2 प्रोटीन को पकड़ने में सक्षम नहीं थे, जिससे स्लाइड की चमक कम हो गई, जो एंटीबॉडी की प्रभावशीलता को दर्शाता है. COVID-19 स्पाइक प्रोटीन के विभिन्न प्रकारों को प्रिंट करके, शोधकर्ता बेहद आसानी से यह देख सकते थे कि एंटीबॉडी किस प्रकार से वायरस को रोकने में प्रभावी थे.

    शोधकर्ताओं ने कई अलग-अलग तरीकों से तकनीक का परीक्षण किया. उन्होंने स्वस्थ टीकाकरण वाले लोगों और वर्तमान में वायरस से संक्रमित लोगों से लिए गए प्लाज्मा का भी परीक्षण किया.

    Tags: Covid-19 Case, Omicron variant

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