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'ओमिक्रॉन' से युवाओं को जोखिम ज्यादा! एक्सपर्ट बोले- हल्की बीमारी का कारण बन रहा नया वेरिएंट

'ओमिक्रॉन' से युवाओं को जोखिम ज्यादा! एक्सपर्ट बोले- हल्की बीमारी का कारण बन रहा नया वेरिएंट

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार वृद्धि का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों ने नए स्वरूप की पहचान की. नैदानिक ​​​​परीक्षणों से संकेत मिलता है कि नए मामलों में से 90 प्रतिशत के लिए यह स्वरूप जिम्मेदार है.  (सांकेतिक तस्वीर: AP)

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार वृद्धि का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों ने नए स्वरूप की पहचान की. नैदानिक ​​​​परीक्षणों से संकेत मिलता है कि नए मामलों में से 90 प्रतिशत के लिए यह स्वरूप जिम्मेदार है. (सांकेतिक तस्वीर: AP)

Coronavirus Omicron Variant: दक्षिण अफ्रीका (South Africa) के वैज्ञानिक बिजली की रफ्तार से फैल रहे कोरोना वायरस संक्रमण के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से निपटने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में ही सबसे पहले कोरोना वायरस के इस बेहद संक्रामक स्वरूप की पहचान की गई है और दूसरे देश भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में पहले संक्रमण के कम मामले सामने आ रहे थे, लेकिन ओमिक्रॉन की उत्पत्ति के बाद दो सप्ताह के दौरान नए मामलों में तेज वृद्धि देखी गई है.

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    जोहानिसबर्ग. कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) को लेकर राहत की खबर है. दक्षिण अफ्रीकी जानकार ने बताया है कि यह वेरिएंट बगैर किसी प्रमुख सिंड्रोम के हल्की बीमारी का कारण बन रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को इस नए वेरिएंट को ‘ओमिक्रॉन’ नाम दिया है. इसके अलावा वेरिएंट में बड़ी संख्या में हुए म्यूटेशन्स ने भी जानकारों को चिंता में डाल दिया है. नए वेरिएंट की बारे में खबरें सामने आने के बाद अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों ने कई दक्षिण अफ्रीकी देशों से यात्रा पर रोक लगा दी थी.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष एंजेलीक कोएट्जी ने स्पूतनिक को बताया कि इस वेरिएंट के परिणामस्वरूप हल्की बीमारी देखी जा रही हैं. उन्होंने कहा, ‘यह हल्की बीमारी दिखा रहा है, जिसमें मांसपेशियों में दर्ज और एक दिन के लिए थकान या दो दिनों तक बीमार रहना जैसे लक्षण हैं. अब तक हमने पाया है कि संक्रिमित खुशबू या गंध जाने की परेशानी का सामना नहीं कर नहीं कर रहे हैं. उन्हें हल्का कफ हो सकता है. ये कोई प्रमुख लक्षण नहीं हैं.’ उन्होंने बताया कि नए वेरिएंट से संक्रमित हुए कुछ लोग घर पर ही इलाज कर रहे हैं.

    अधिकारी का कहना है कि ओमिक्रॉन से ग्रस्त मरीजों की संख्या अस्पताल में ज्यादा नहीं है. साथ ही वैक्सीन हासिल कर चुके लोगों में यह नया स्ट्रेन नहीं मिला है. हालांकि, वैक्सीन नहीं लेने वालों के मामले में हालात अलग हो सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘हम दो हफ्तों के बाद ही इसके बारे में जान पाएंगे. हां, यह फैल सकता है, लेकिन अभी के लिए चिकित्सकों के तौर पर हमें यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर इतना प्रचार क्यों किया जा रहा है. हम इसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. हम दो से तीन हफ्तों के बाद ही जान पाएंगे, क्योंकि कुछ मरीज भर्ती हुए हैं और ये सभी युवा हैं, जिनकी आयु 40 या इससे कम है.’ कुछ देशों ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है. कोएट्जी ने देशों के इस फैसले का भी विरोध किया है.

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    दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक बिजली की रफ्तार से फैल रहे कोरोना वायरस संक्रमण के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से निपटने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में ही सबसे पहले कोरोना वायरस के इस बेहद संक्रामक स्वरूप की पहचान की गई है और दूसरे देश भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका में पहले संक्रमण के कम मामले सामने आ रहे थे, लेकिन ओमिक्रॉन की उत्पत्ति के बाद दो सप्ताह के दौरान नए मामलों में तेज वृद्धि देखी गई है. वैसे तो देश में अब भी संक्रमण के अपेक्षाकृत कम मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन युवाओं को संक्रमित करने की ओमिक्रॉन की रफ्तार देखकर स्वास्थ्य पेशेवर भी हैरान हैं. शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका में संक्रमण के 2,828 नए मामले सामने आए.

    सोविटोज बरगवनथ अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) की प्रमुख रूडो मैथिवा ने ऑनलाइन प्रेस वार्ता में कहा, ‘हम कोविड-19 के रोगियों की जनसांख्यिकीय पहचान में एक उल्लेखनीय परिवर्तन देख रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ’20 साल से युवाओं से लेकर लगभग 30 की आयु तक के लोग मध्यम या गंभीर रूप से बीमारी की हालत में आ रहे हैं. कुछ को गहन चिकित्सा की जरूरत है. लगभग 65 प्रतिशत ने टीका नहीं लगवाया और शेष लोगों में से अधिकतर ने केवल एक खुराक ही ली है. मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि जैसे-जैसे मामलों में वृद्धि होगी, जन स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था चरमरा जाएगी.’

    उन्होंने कहा कि सार्वजनिक अस्पतालों को गहन चिकित्सा की आवश्यकता वाले रोगियों की संभावित बड़ी आमद से निपटने में सक्षम बनाने के लिए तत्काल तैयारी करने की आवश्यकता है.

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    दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार वृद्धि का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों ने नए स्वरूप की पहचान की. नैदानिक ​​​​परीक्षणों से संकेत मिलता है कि नए मामलों में से 90 प्रतिशत के लिए यह स्वरूप जिम्मेदार है. प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि इसकी प्रजनन दर 2 है – जिसका अर्थ है कि इससे संक्रमि प्रत्येक व्यक्ति के जरिये दो अन्य लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका है.

    वहीं अफ्रीका हेल्थ एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विलेम हेनकॉम ने ‘एसोसिएटिड प्रेस’ से कहा, ‘यह बहुत बड़ी चिंता है. हम सभी इस वायरस को लेकर बहुत चिंतित है.’ हेनकॉम दक्षिण अफ्रीका कोविड स्वरूप अनुसंधान समूह के सह अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने कहा, ‘यह स्वरूप मुख्य रूप से ग्वेतेंग प्रांत में केंद्रित है, लेकिन हमें नैदानिक ​​परीक्षणों से सुराग मिले हैं… जो बताते हैं कि यह स्वरूप पहले से ही पूरे दक्षिण अफ्रीका में मौजूद है.’

    टीकाकरण एक महत्वपूर्ण कारक है. ऐसा प्रतीत होता है कि नया स्वरूप उन लोगों में सबसे तेजी से फैल रहा है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है. दक्षिण अफ्रीका में फिलहाल लगभग 40 प्रतिशत वयस्क लोगों को ही टीका लगा है, और 20 से 40 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों में यह संख्या बहुत कम है. हेनकॉम ने कहा वैज्ञानिक ओमिक्रॉन के बारे में और जानकारी हासिल कर रहे हैं, ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के लोगों को चाहिये कि वे अपने बचाव के लिये एहतियाती उपायों का पालन करते रहें.

    (भाषा इनपुट के साथ)

    Tags: Coronavirus, Coronavirus New Variant, Covid-19 Update, Omicron

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