वीडियो गेम्स-इंटरनेट के लिमिटेड यूज का विरोध, छात्र ने कहा- परिवार तय करेगा

वीडियो गेम्स-इंटरनेट के लिमिटेड यूज का विरोध, छात्र ने कहा- परिवार तय करेगा
प्रतीकात्मक तस्वीर

जापान सरकार (Japan Government) ने स्कूली छात्रों के वीडियो गेम्स (Video Games) और इंटरनेट के लिमिटेड यूज (Limited Use Of Internet) को लेकर एक आदेश पारित किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 13, 2020, 10:06 AM IST
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टोक्यो. जापान सरकार (Japan Government) ने स्कूली छात्रों के वीडियो गेम्स (Video Games) और इंटरनेट के लिमिटेड यूज (Limited Use Of Internet) को लेकर एक आदेश पारित किया है. इस आदेश को लेकर हाईस्कूल के एक स्टूडेंट ने सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है. सरकार ने अपने आदेश में स्कूली बच्चों के वीडियो गेम और इंटरनेट के एक घंटे से ज्यादा इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है. जापान में कगावा के शिकोकू द्वीप के निवासी 17 साल के स्टूडेंट वटारू ने इसके लिए देश के बड़े वकील को ढूंढा. वटारू कगावा प्रशासन के इस आदेश को अदालत में चुनौती देने जा रहा है.

20 साल तक के छात्रों पर लगाया गया है बैन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कगावा में अप्रैल महीने में लागू किए गए एक कानून में प्रावधान किया गया है कि 20 साल से छाेटे युवा स्कूल के दिनों में एक घंटे और छुट्‌टी के दिनों में डेढ़ घंटे से ज्यादा वीडियो गेम या इंटरनेट इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. वटारू का कहना है कि बच्चे कितनी देर इंटरनेट इस्तेमाल करेंगे या वीडियो गेम पर कितना समय देंगे, यह तय करना परिवार का अधिकार है. यह अधिकार उनसे कोई नहीं छीन सकता है. वटारू ने कहा कि सरकार इन मामलों में दखलअंदाजी ना रकें.



वटारू ने इन्हीं कारणों के मद्देनजर जापान के नामी वकील तोमोशी साक्का से संपर्क किया. साक्का ने तथ्यों और वैज्ञानिक आधार पर इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की मंजूरी दे दी है. उनका कहना है कि इस मामले में उनके जीतने के आसार अच्छे हैं, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सीमाओं का उल्लंघन है.
'यह फैसला पारिवारिक जीवन में घुसपैठ की तरह'

वटारू और उसकी मुहिम का समर्थन करने वालों का मानना है कि गेमिंग की लत दूर करने के और भी कई कारगर तरीके हैं. कगावा के कानूनों में वैज्ञानिक आधार की कमी और निजी अधिकारों का उल्लंघन ज्यादा है. यह पारिवारिक जीवन में एक तरह की घुसपैठ है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

मैं आवाज न उठाऊं तो कौन उठाएगा: वटारू

वटारू का कहना है कि उसे वीडियो गेम्स में कोई रुचि नहीं है लेकिन कगावा प्रशासन ने कोरोना संक्रमण काल में ऐसा फैसला लिया है, जिससे हरेक बच्चा प्रभावित हो रहा है. इस समय जब सारे खेल मैदान और स्पोर्ट्स क्लब बंद पड़े हैं, तब बच्चों के पास इसके अलावा और क्या विकल्प हैं? अगर उनके लिए मैं आवाज न उठाऊं तो कौन उठाएगा?

लंबे समय तक वीडियो गेम खेलने से बच्चों को परेशानी

कगावा प्रशासन ने यह महसूस किया कि लंबे समय तक वीडियो गेम खेलने की वजह से यहां अधिकांश बच्चों पर शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभाव देखा जा रहा है. स्कूल में भी उनका प्रदर्शन नकारात्मक ढंग से प्रभावित हो रहा है. वर्ष 2018 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गेम खेलने की लत (गेमिंग डिसऑर्डर) को मानसिक बीमारी माना था.

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