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कोरोना वायरस से बचने के लिए ईरान में लोग पी रहे हैं ज़हरीली शराब, मृतकों की संख्या हुई 300 के पार

News18Hindi
Updated: March 27, 2020, 6:07 PM IST
कोरोना वायरस से बचने के लिए ईरान में लोग पी रहे हैं ज़हरीली शराब, मृतकों की संख्या हुई 300 के पार
न्यूयॉर्क में मुस्लिम समुदाय के लिए कोरोना महामारी की वजह से हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ईरान में ये अफवाह फैली हुई है कि अल्कोहल से कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है

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  • Last Updated: March 27, 2020, 6:07 PM IST
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ईरान में कोरोना वायरस का संक्रमण जमकर कहर बरपा रहा है. हर दिन यहां मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. पिछले 24 घंटों में ईरान में 157 लोगों की मौत हुई. इसके साथ ही मरने वालों का आधिकारिक आंकड़ा 2234 हो गया. लेकिन ईरान में कोरोना वायरस के संक्रमण से हट कर भी कोरोना की वजह से मौतें हो रही हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक जहरीली शराब पीने से ईरान में अब तक 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं जबकि एक हज़ार से ज्यादा लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं.

दरअसल सोशल मीडिया के जरिए ईरान में ये अफवाह फैली हुई है कि अल्कोहल से कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है. इसी अफवाह पर भरोसा कर लोग कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए जहरीली शराब पी रहे हैं. मेथेनॉल पीने से होने वाली मौत का आंकड़ा लगातार ईरान में बढ़ता जा रहा है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ईरान में शराब पीने पर प्रतिबंध है और नियम तोड़ने वाले मुस्लिम शख्स के लिए 80 कोड़े की सज़ा मुकर्रर की गई है. इसके बावजूद लोग सोशल मीडिया पर फैली अफवाह पर भरोसा कर जहरीली शराब पी कर अपनी और अपने परिवार की ज़िंदगी खतरे में डाल रहे हैं.



जहरीले मेथेनॉल पर अध्यन करने वाले ओस्लो के क्लीनिकल टॉक्सिकोलॉजिस्ट डॉ नट एरिक होवडा आशंका जताते हैं कि जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में ईरान की आधिकारिक रिपोर्ट से ज्यादा बदतर हालात हो सकते हैं. उनका कहना है कि लोग इसी तरह मेथनॉल का सेवन करते रहे तो कोरोना वायरस की ही तरह जहरीली शराब से भी मरने वालों की तादाद बढ़ सकती है.



कोरोना वायरस की महामारी की वजह से दुनिया के 199 देश बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. तेजी से बढ़ते संक्रमण के नए नए मामलों ने दुनिया को एक जगह पर रोक दिया है. अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है तो अमेरिका , इटली, स्पेन और ब्रिटेन जैसे देशों में अस्पतालों में कोहराम मचा हुआ है. अभी तक कोरोना वायरस के संक्रमण का कोई इलाज नहीं मिल सका है. दुनियाभर के डॉक्टर और साइंडिस्ट कोरोना वायरस पर असर करने वाली प्रभावी दवाई और वैक्सीन की रिसर्च में जुटे हुए हैं. इसके बावजूद ईरान के सोशल मीडिया में ये मैसेज बड़ी तेजी से फैला कि एक ब्रिटिश स्कूल टीचर और कुछ अन्य लोगों अल्कोहल और शहद से कोरोना वायरस के संक्रमण का इलाज किया. वहीं लोगों के बीच ये भ्रम भी फैला कि अल्कोहलयुक्त सैनिटाइज़र की ही तरह अल्कोहल पीने से शरीर के भीतर कोरोना वायरस मर जाता है.

मिडिल ईस्ट में ईरान अकेला ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा 29 हज़ार लोग कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो चुके हैं. ऐसे में कोरोना वायरस के संक्रमण का डर, अशिक्षा और सोशल मीडिया की अफवाहों के चलते ईरान के दक्षिण-पश्चिम प्रांत खुजेश्तान के शिराज शहर में मेथेनॉल पीने से कई लोगों की मौत हो गई.

शराब में पाए जाने वाले एक प्रकार के अल्कोहल इथेनॉल का उत्पादन ईरान में बैन है जबकि मेथेनॉल का उत्पादन करने वाले निर्माताओं को सरकार की साफ हिदायत है कि वो मेथेनॉल में आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल करें ताकि जनता इथेनॉल और उसके बीच फर्क समझ सके. टॉक्सिक मेथेनॉल से बने उत्पाद का इस्तेमाल घावों को साफ करने के लिए किया जाता है.  दरअसल, गंध, स्वाद और रंग के आधार पर एथेनॉल और मेथेनॉल में फर्क करना बहुत मुश्किल होता है. मेथेनॉल बहुत खतरनाक होता है जिसको शराब में ज्यादा मिलाने से शराब जहरीली हो जाती है. अवैध शराब बनाने वाले लोग मेथेनॉल का इस्तेमाल नशा बढ़ाने के लिए करते हैं जबकि शराब बनाने में एथेनॉल यानी इथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल किया जाता है जिसका ईरान में उत्पादन बैन है.

एक रिसर्च के मुताबिक ईरान में इससे पहले भी सितंबर और अक्टूबर 2018 के बीच मेथनॉल पीने की वजह से 768 लोग बीमार हो गए थे जिसमें 76 की मौत हो गई थी. इसके बावजूद मेथेनॉल के खतरे के प्रति जनता के बीच जागरुकता का अभाव कम नहीं हुआ.

मेथनॉल से किडनी, लिवर और आंखों की रोशनी जा सकती है. इसकी ज्यादा मात्रा से मौत हो सकती है.  इसके बावजूद ईरान में अशिक्षित और अफवाहों पर भरोसा करने वाली जनता कोरोना वायरस के इलाज के धोखे में मेथेनॉल पीकर जान गंवा रही है. वहीं ईरान में ये भी अफवाह है कि शराब पाचन तंत्र को धो कर साफ कर सकती है. इसी अफवाह के चलते भी लोग मेथेनॉल पीने की वजह से अस्पताल में भर्ती किए जा रहे हैं.

दरअसल, इसके पीछे एक बड़ी वजह ईरान की सरकार और जनता के बीच भरोसे की कमी को भी माना जा रहा है. ईरानी सरकार पर आरोप है कि उसने कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत में इसके खतरों से जनता को आगाह नहीं किया और बड़े कदम नहीं उठाए. बाद में जब वायरस विकराल हुआ तो हालात बेकाबू हो गए जिस वजह से ईरानी सरकार की हिदायतों और आश्वासनों पर जनता ने भरोसा नहीं किया. ईरान की जनता अपनी ही सरकार को कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के मामले में शक की निगाह से देख रही है. जबकि उसे सोशल मीडिया पर फैले नकली नुस्खों और इलाज पर ज्यादा भरोसा हो रहा है.
First published: March 27, 2020, 6:03 PM IST
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