इस पाकिस्तानी लेखक ने इमरान सरकार को सुनाई खरी-खोटी, कहा चंद्रयान-2 पर बोलने की तुम्हारी औकात नहीं'

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Updated: September 10, 2019, 3:42 PM IST
इस पाकिस्तानी लेखक ने इमरान सरकार को सुनाई खरी-खोटी, कहा चंद्रयान-2 पर बोलने की तुम्हारी औकात नहीं'
भारत के चंद्रयान मिशन का मजाक उड़ाने पर पाकिस्तानी सरकार की कड़ी निंदा करने वाले पाक पत्रकार आतिफ तौकीर ( फोटो सौ. आतिफ का Fb पोस्ट)

भारत के चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) मिशन पर जिस तरह की प्रतिक्रिया पाकिस्तान (Pakistan) की तरफ से आईं, उससे दुनियाभर में उसकी खिल्ली उड़ने लगीं. यहां तक के पाकिस्तान के लेखक और पत्रकारों ने ही वहां की हुकूमत को आईना दिया दिया. देखें वीडियो.

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पाकिस्तानी कवि और लेखक आतिफ तौकीर (Atif Taueer) ने चंद्रयान-2 (Chandrayan-2) पर बोलने और ट्वीट करने वाले उन सभी पाकिस्तानी नेताओं और हुक्मरानों को खरी-खोटी सुनाई है, जो चंद्रयान का मजाक उड़ा रहे हैं. आतिफ ने फेसबुक (Facebook) पर एक वीडियो पोस्ट किया और उसकी शुरुआत में ही कहा कि 'भारत का चांद मिशन और हमारा गैर गंभीर सरकारी जश्न'. लेखक ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सराहना करते हुए ये बताया है कि ऐसे मिशन कैसे बच्चे और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं और उन्हें देश की तरक्की और साइंस के भविष्य को बेहतर करने के लिए प्रेरित करते हैं.

लेखक आतिफ तौकीर ने इस वीडियो की शुरुआत में एक वाकया याद करते हुए कहा कि जब वो सात बरस के थे, तो पाकिस्तान ने एक उपग्रह छोड़ा था. उसकी खबर पढ़कर सात बरस की उम्र में ही उन्हें फिजिक्स और गणित जैसे विषयों से बेहद लगाव हो गया.

पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी पर सीधा हमला करते हुए आतिफ कहते हैं, 'हमारे विज्ञान मंत्री कहते हैं कि भारत ने बेकार में अरबों रुपए इस अंतरिक्ष कार्यक्रम पर व्यर्थ कर दिए'. पाकिस्तानी नेताओं की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से बड़े ओहदों पर बैठे लोग चंद्रयान को लेकर ट्वीट कर रहे हैं, उससे ज्ञान और तकनीक के प्रति पाकिस्तान की उपेक्षा का भी अंदाजा लगाया जा सकता है.

पाकिस्तानी पत्रकार कहते हैं कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान भले ही भारत की आलोचना करे लेकिन चंद्रयान-2 पर उसे बात करने का कोई हक नहीं.  वीडियो में तौफीक कहते हैं कि 'एक बार किसी ने उनसे पूछा की चांद की बंजर जमीन पर आदमी का जाने का फायदा क्या है? इसके जवाब में मैं कहता हूं कि आदमी की जिज्ञासा ही उसकी तरक्की, तरह-तरह के अविष्कार की बुनियाद है.'

वे सवाल करते हैं - " पाकिस्तान में डॉ. अब्दुल सलाम जैसे विद्वान हुए फिर भी हम साइंस के क्षेत्र में कहीं नहीं हैं, इसकी वजह है ये है कि साइंस और इल्म हमारी किसी भी स्तर पर हमारी प्रथामिकता में शामिल नहीं हैं. स्थिति ये है कि आज भी पाकिस्तान किसी भी कार्यक्रम के लिए चीन के रॉकेटों पर निर्भर है."


देखिए किस तरह से खरी-खोटी सुना रहे हैं इमरान सरकार को...


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वीडियो में वे कहते हैं - "हमारे यहां आपको सस्ती नारेबाजी मिलेगी, ओछी जुमनेबाजी भी मिलेगी. बहुत कुछ मिलेगा, लेकिन इल्म नहीं मिलेगा. अगर कोई सोच या फिर इल्म की बात करे तो उसे मुख्य धारा से अलग करने की कोशिश करते हैं. हमारे यहां एक मशहूर जुमला ये है कि ज्यादा पढ़ने से दिमाग खराब हो जाता है. अगर आप इल्म की तरफ ज्यादा जाते हैं तो यकीनी तौर पर कोई पागल हैं."

किसी दर्शक के सवाल पर और तल्ख होते हुए लेखक ने कहा है- "एक सवाल होता है कि हमारे यहां बच्चे बहुत मेहनत कर नंबर भी हासिल कर लेते हैं, लेकिन कोई आइंस्टीन क्यों नहीं पैदा होता, इसका जवाब ये है कि आप जो पैदा करना चाहते हैं वही तो पैदा होगा. ये कैसे हो सकता है कि आप चने के बीज बो रहे हैं और उम्मीद करें कि गेहूं पैदा होगा."

भारत के चंद्रयान कार्यक्रम की तारीफ करते हुए इस लेखक ने कहा है कि जिस दिन भारत के बच्चों ने चंद्रयान को देखा होगा उस दिन बहुत ढेर सारे बच्चों में फिजिक्स के प्रति दिलचस्पी पैदा हुआ होगा. उनमें से कितने होंगे जो वैज्ञानिक बनेंगे या वैज्ञानिक बनने की राह पर चलेंगे. साथ ही वे ये भी कहते हैं - " हमारे यहां जिन बच्चों ने पाकिस्तान के साइंस मिनिस्टर के बयान को पढ़ा और सुना होगा उनकी विज्ञान के प्रति क्या नजरिया होगा." उन्होंने कहा कि जिस देश के साइंस मिनिस्टर का ये नजरिया होगा वहां साइंस की हालत क्या होगी. अपने वीडियो में इस कवि ने पढ़ने और जानने का जज्बा पैदा करने की अपील भी की है.

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First published: September 10, 2019, 3:37 PM IST
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