पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण से 42 डॉक्टर्स की मौत, UN ने इमरान को बताया नाकाम

पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण से 42 डॉक्टर्स की मौत, UN ने इमरान को बताया नाकाम
UNDP ने कोरोना से निपटने में इमरान सरकार को बताया नाकाम

पाकिस्तान (Pakistan) के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि 42 डॉक्टरों सहित करीब 65 स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण अपनी जान गंवाई है. उनमें से 30 डॉक्टर पंजाब प्रांत के हैं. उधर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने कहा है कि कोविड -19 संकट से निपटने के मामले में इमरान सरकार नाकाम साबित हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 23, 2020, 10:44 AM IST
  • Share this:
इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) में कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के खिलाफ फ्रंटलाइन पर जंग लड़ रहे 65 स्वास्थयकर्मियों की PPE किट और मास्क की कमी से जूझते हुए मौत हो गयी है, जबकि करीब 5000 से ज्यादा संक्रमित हुए हैं. राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान की रिपोर्ट में कहा गया है कि 42 डॉक्टरों सहित करीब 65 स्वास्थ्य कर्मियों ने कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गंवाई है. उनमें से 30 डॉक्टर पंजाब प्रांत के हैं. उधर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने कहा है कि कोविड -19 संकट से निपटने के मामले में इमरान सरकार नाकाम साबित हुई है.

आंकड़ों के मुताबिक, सिंध में कोविड-19 से 11 डॉक्टरों और एक नर्स की जान चली गई है, जबकि बलूचिस्तान में चार डॉक्टर और तीन पैरामेडिकल कर्मी और गिलगित-बाल्तिस्तान में एक डॉक्टर की मौत हुई है. खैबर-पख्तूनख्वा में जान गंवाने वाले डॉक्टरों में एक सिख डॉक्टर डॉ फागचंद सिंह भी शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि देश में अब तक 3,000 डॉक्टरों और 600 नर्सों सहित लगभग 5,000 स्वास्थ्य कर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तान में सोमवार को संक्रमण के 4,471 नये मामले सामने आने से कोविड-19 के कुल 1,81,088 मामले हो गए हैं जबकि 89 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 3,590 तक पहुंच गई है.

UNDP ने इमरान सरकार को बताया फेल
यूएनडीपी ने कहा है कि दुनिया भर की स्थानीय सरकारें वर्तमान कोविड -19 संकट के मामले में सबसे आगे आकर काम कर रही थीं, लेकिन पाकिस्तान की इमरान सरकार एक हद तक अपने नागरिकों से कटी हुई थी. यूएनडीपी ने कहा कि पाकिस्तान में शासन शैली ऊपर से नीचे की ओर प्रतिक्रियाशील और आधिकारिक हैं जिससे कोरोना की रोकथाम के कार्यों में मुश्किलें पेश आ रहीं हैं.
ये भी पढ़ें: कैसी है चीन की साइबर आर्मी, जो कोड '61398' के तहत करती है हैकिंग



उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में महामारी को रोकने पर्याप्त प्रयासों के बावजूद, परिणाम खराब रहे हैं. ट्रेडर्स और बिजनेसमैन, संघीय सरकार के एकतरफा फैसलों से असंतुष्ट हैं क्योंकि इससे उनका कारोबार खासा प्रभावित हुआ है. यह भी कहा गया कि चिकित्सा स्वास्थ्य पेशेवरों को पीपीई (व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपकरण) की अनुपलब्धता और परीक्षण- ट्रैकिंग में एक कुशल प्रणाली की कमी, इसके प्रबंधन की खामियों को उजागर कर रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू की
उधर पाकिस्तान ने विदेश में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा आंशिक रूप से शुरू कर दी है. उसके नागरिक कोविड-19 के कारण लागू किए लॉकडाउन की वजह से अन्य देशों में फंस हुए हैं. पाकिस्तान ने मुल्क में कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन को स्थगित कर दिया था. एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर के मुताबिक, सरकार ने देश के हवाई क्षेत्र के 25 फीसदी हिस्से को खोल दिया है ताकि विदेश में फंसे उसके नागरिक वतन लौट सकें.

ये भी पढ़ें: भारत के इलाकों को अपना बताने के बाद अब कौन सा नया झटका देने की तैयारी में नेपाल?

खबर में कहा गया है कि एक निजी चैनल से बातचीत करते हुए विदेशी पाकिस्तानी और मानव संसाधन विकास पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक जुल्फीकार अब्बास बुखारी ने कहा कि हवाई क्षेत्र को आंशिक रूप से खोलने का फैसला इसलिए किया गया है , क्योंकि सरकार विदेश में, खासकर खाड़ी में बड़ी संख्या में फंसे पाकिस्तानी श्रमिकों को लेकर फिक्रमंद है. संघीय सरकार ने बुधवार को नई नीति का ऐलान किया था जिसके तहत 20 जून के बाद हवाई क्षेत्र के 25 फीसदी हिस्से को खोलने के फैसले के बारे में जानकारी दी गई थी. नीति के तहत हर हफ्ते 40 से 50 हजार पाकिस्तानी वतन लौटेंगे और फंसे हुए सभी नागरिक एक महीने में घर होंगे. सभी मुसाफिरों को 14 दिन तक घर में पृथक वास में रहने होगा और उन्हें यह हवाई अड्डे पर लिखित में देना होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज