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बंटवारे के दंगों के बाद बन गए 'अब्दुल खालिक', अब अपने हिन्दू परिवार से मिलने को हैं तैयार

बंटवारे के दंगों के बाद बन गए 'अब्दुल खालिक', अब अपने हिन्दू परिवार से मिलने को हैं तैयार

जालंधर के रहने वाले 92 वर्षीय सरवन सिंह अपने बड़े भाई के बेटे से मिलने को लेकर उत्साहित हैं. (Image: Hindustan Times)

जालंधर के रहने वाले 92 वर्षीय सरवन सिंह अपने बड़े भाई के बेटे से मिलने को लेकर उत्साहित हैं. (Image: Hindustan Times)

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे में हुए दंगों में कई हिन्दू परिवारों को पाकिस्तान में बेरहमी से मार दिया गया था. इन दंगों के बाद अभी भी कई परिवार अपनों की तलाश में जुटे हुए हैं.

हाइलाइट्स

भारत-पाक बंटवारे के समय हुए हिंसक दंगों में करीब 20 लाख लोग मारे गए थे
दो यूट्यूबर की मदद से अब 75 वर्षों के बाद अब्दुल खालिक को उनके भारत स्थित परिवार से मिलाया जा रहा है
अब्दुल खालिक के चाचा सरवन सिंह ने भी बंटवारे के समय अपने कई सदस्यों को खो दिया था

इस्लामाबाद. भारत-पाक बंटवारे के दौरान हुए दंगोंं में अपने परिवार से बिछड़े एक 81 वर्षीय व्यक्ति को अब लंबे इंतजार के बाद भारत स्थित अपने परिवार से मिलने का मौका मिल रहा है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार बंटवारे के वक्त हुए हिंसक दंगों के समय 6 साल के रहे मोहन सिंह ने पाकिस्तान में अपने परिवार के 22 लोगों को खो दिया था. दंगों के दौरान मोहन दंगाइयों के चंगुल से भागने में सफल रहे थे, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान में ही एक मुस्लिम परिवार ने पाला था. हालांकि पाकिस्तान में रहने वाले मोहन सिंह का नाम अब अब्दुल खालिक है.

मोहन की ही तरह जालंधर के रहने वाले मोहन के चाचा सरवन सिंह भी अपने भतीजे से मिलने को लेकर उत्साहित हैं. दंगों में सरवन सिंह के माता-पिता सहित 4 भाई-बहन मारे गए थे. आपको बता दें कि आजादी के समय हुए इन दंगों में करीब 20 लाख लोग मारे गए थे. वहीं करीब 40 लाख से अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा था.

कैसे मिले मोहन सिंह?
पंजाब के जंडियाला में रहने वाले यूट्यूबर हरजीत सिंह विभाजन की कहानियों को डॉक्यूमेंट कर रहे हैं. मोहन के चाचा सरवन सिंह का इंटरव्यू लेने के बाद हरजीत सिंह ने ही लगभग आठ महीने पहले मोहन की तलाश शुरू की थी. वीडियो पोस्ट करने के पांच महीने बाद, पाकिस्तानी यूट्यूबर मोहम्मद जाविद इकबाल ने अब्दुल खालिक की कहानी सुनाई, जो विभाजन के दौरान अपने हिंदू खत्री परिवार से अलग हुए थे. इस साक्षात्कार में उजागर की गई जानकारी में से एक यह थी कि अब्दुल के एक हाथ पर दो अंगूठे थे.

इसी मामूली जानकारी ने मोहन सिंह उर्फ़ अब्दुल खालिक को अपने चाचा सरवन सिंह से मिलाने में मदद की है. उन्हें ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति ने वीडियो देखने बाद भारत स्थित उनके चाचा से मिलवाया. अब मोहन सिंह भारत आ गए हैं, जहां से वह जालंधर अपने चाचा से मिलने जाएंगे.

Tags: India, Pakistan

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