UNSC की बैठक में पाक और चीन को लगा तगड़ा झटका, ज्यादातर देश भारत के पक्ष में

भाषा
Updated: August 17, 2019, 7:58 PM IST
UNSC की बैठक में पाक और चीन को लगा तगड़ा झटका, ज्यादातर देश भारत के पक्ष में
यूएनएससी की बैठक

संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत (India) के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने मीडिया से कहा, "यदि राष्ट्रीय बयानों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इच्छा के रूप में पेश करने कोशिश की जाएगी तो वह भी भारत का राष्ट्रीय रूख सामने रखेंगे. उनका इशारा चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) के बयानों की ओर था."

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कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हुई बंद कमरे में बैठक बेनतीजा और बगैर किसी बयान के समाप्त हो गया. इसके बाद इस विषय का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में जुटे पाकिस्तान और उसके सहयोगी देश चीन को एक बड़ा झटका लगा है. वैश्विक संस्था की 15 देशों की सदस्यता वाली परिषद के ज्यादातर देशों ने इस बात पर जोर दिया कि यह भारत और पाक के बीच एक द्विपक्षीय मामला है.

चीन के अनुरोध पर शुक्रवार को बुलाई गई ये अनौपचारिक बैठक करीब एक घंटे तक चली. उसके बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन और पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोदी ने एक-एक कर टिप्पणी की. इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं का कोई सवाल नहीं लिया.

UNSC में कश्मीर पर चीन की चालबाजी नाकाम.


बैठक में हुई चर्चा के बारे में सूत्रों ने मीडिया को बताया कि चीन किसी नतीजे के लिए, या फिर पोलैंड द्वारा कोई विज्ञप्ति जारी किये जाने पर जोर दे रहा था. ब्रिटेन ने भी प्रेस विज्ञप्ति की मांग पर चीन का साथ दिया. पोलैंड अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.

ज्यादातर सदस्य बोले जारी न किया जाए कोई बयान
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में ज्यादातर का कहना था कि इस चर्चा के बाद कोई बयान या नतीजा जारी नहीं किया जाना चाहिए और आखिरकार उनकी ही बात रही. उसके बाद चीन बैठक से बाहर आ गया और बतौर एक देश उसने बयान दिया. फिर पाकिस्तान ने भी बयान दिया. सूत्रों ने बताया कि यूएनएससी अध्यक्ष ने चर्चा के बाद कहा, "पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने का कोई आधार नहीं है. इस बार भी उसकी बातों में कोई दम नहीं था. कोई नतीजा नहीं निकला, परामर्श के बाद पोलैंड ने कोई बयान नहीं दिया."

यूएनएससी की बैठक

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने मीडिया से कहा, "यदि राष्ट्रीय बयानों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इच्छा के रूप में पेश करने कोशिश की जाएगी तो वह भी भारत का राष्ट्रीय रूख सामने रखेंगे. उनका इशारा चीन और पाकिस्तान के बयानों की ओर था."

सदस्यों ने माना ये भारत-पाक का द्विपक्षीय मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा परिषद के ज्यादातर सदस्यों ने माना कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है और उन दोनों को ही आपस में इसका समाधान करने की जरूरत है. ये कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की मंशा रखने वाले पाकिस्तान के लिए एक झटका है. सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार वाले पांच स्थायी सदस्य देशों में शामिल चीन ने यह बैठक बुलाने की मांग की थी. परिषद की प्रक्रियाओं के अनुसार उसके सदस्य किसी भी मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकते हैं. लेकिन बंद कमरे में बैठकों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन.


भारत ने ध्वस्त की सारी दलीलें
सूत्रों के अनुसार सुरक्षा परिषद के सदस्यों के साथ इस चर्चा में भारत ने एक-एक कर सारी दलीलें ध्वस्त कर दी. भारत का यह रूख रहा कि कैसे कोई संवैधानिक मामला शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है, जैसा कि पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 के संदर्भ में दावा किया है. सूत्रों ने बताया कि भारत का कहना था, "कैसे किसी संघीय व्यवस्था का सीमा के पार असर हो सकता है."

भारत बार-बार इस बात पर बल दे रहा है कि वह कश्मीर मुद्दे पर शिमला समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है. मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के मुद्दे पर सूत्रों ने कहा, "पाकिस्तान इस मोर्चे पर भी मात खा गया क्योंकि चीन मानवाधिकारों की दुहाई दे रहा है." सूत्रों ने कहा कि यदि पाकिस्तान महसूस करता है कि अनुच्छेद 370 स्थिति में एक बड़ा बदलाव है तो चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) क्या है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस.


इन देशों ने किया भारत का समर्थन
सूत्रों के अनुसार परिषद में अफ्रीकी देशों, आईवरी कोस्ट एवं इक्वेटोरियल गुएना, डोमिनिकन रिपब्लिक, जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और रूस ने भारत का समर्थन किया. संयुक्त राष्ट्र के कूटनीतिक सूत्र ने कहा कि फ्रांस क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखे हुए है लेकिन उसकी प्राथमिकता यह है कि भारत एवं पाकिस्तान द्विपक्षीय संवाद करें. अमेरिका और जर्मनी का भी यही रूख था.

रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलिंस्की ने बैठक कक्ष में जाने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का मानना है कि यह भारत एवं पाकिस्तान का "द्विपक्षीय मामला" है. इंडोनेशिया भी बढ़ते तनाव से चिंतित था और उसने दोनों देशों से संवाद एवं कूटनीति पर लौटने की अपील की.

ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कहा, "आज सुरक्षा परिषद ने कश्मीर की स्थिति पर चर्चा की. हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. कश्मीर की घटनाओं की क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता है. हम सभी से शांति और सतर्कता बनाए रखने की अपील करते हैं."

पाकिस्तान को लगे कई झटके
बंद कमरे में हुई सुरक्षा परिषद की इस बैठक से पहले पाकिस्तान को कई झटके लगे हैं. उसने इस विषय पर खुली बैठक की मांग की थी. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पत्र लिखकर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के भारत के कदम पर सुरक्षा परिषद में चर्चा की मांग की थी. लेकिन सुरक्षा परिषद ने एक अनौपचारिक और बंद कमरे में बैठक की. कुरैशी ने यह भी अनुरोध किया था कि पाकिस्तान सरकार के एक प्रतिनिधि को बैठक में हिस्सा लेने दिया जाए. उस अनुरोध को भी नहीं माना गया क्योंकि चर्चा बस सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों के बीच थी.

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First published: August 17, 2019, 6:43 PM IST
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