पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर लगा झटका, IMF कर्ज देने पर लगा सकता है रोक

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

पाकिस्तान को पिछले दिनों आर्थिक मोर्चे पर यूएई (UAE) ने झटका दिया था. यूएई ने पाकिस्तान को आगे कर्ज ना दिए जाने की घोषणा कर दी. अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को जोरदार झटका दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 11:48 PM IST
  • Share this:
इस्लामाबाद. पाकिस्तान को पिछले दिनों आर्थिक मोर्चे पर यूएई (UAE) ने झटका दिया था. यूएई ने पाकिस्तान को आगे कर्ज ना दिए जाने की घोषणा कर दी. अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को जोरदार झटका दिया है. आईएमएफ (IMF) ने कहा कि वह पाकिस्तान को अल्पकालिक ऋण देने पर रोक लगा सकता है. पाकिस्तान पहले ही कोरोना के चलते आर्थिक संकट से दो-चार हो रहा है. अब ऐसे में आईएमएफ का यह रूख उसके संकट को और गहरा कर सकती है. दरअसल पाकिस्तान इस तरके कर्जों से बजट संबंधी अनिवार्य प्रावधानों के लिए धन जुटा लेता था. गौरतलब है कि पाकिस्तान में इस साल पिछले वर्ष के बजट की अपेक्षा करीब 1.5 प्रतिशत ज्यादा धन की जरूरत होगी.

आगामी बजट प्रावधानों के लिए एक लाख करोड़ की होगी दरकार

आइएमएफ के अनुसार पाकिस्तान को आगामी वित्त वर्ष के लिए एक लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी. हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह राशि वर्तमान कर ढांचे में जुटा पाना मुश्किल होगा. कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते वर्तमान वित्त वर्ष में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद कई महीनों तक संस्थान बंद रहने से टैक्स की वसूली बहुत ज्यादा प्रभावित रही है.



क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान में एक तरफ तो करदाताओं की संख्या बहुत कम है. इस पर पिछले सात महीनों में वसूली की दर बहुत ही धीमी रही है. इसके उलट कोरोनावायरस महामारी के चलते सरकार पर बोझ बढ़ा है. जाहिर सी बात है कि आने वाले समय में आम जनता की सुविधाओं को लकर सरकार पर बोझ बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

ये भी पढ़ें: Pak: 10 साल पूर्व महिला ने मर्जी से की थी शादी, अब घर के 9 वर्षीय बच्चे ने की हत्या 

पाकिस्तानी नागरिक अमेरिका में साजिश रचता हुआ पकड़ाया, 20 साल की होगी जेल


आइएमएफ के अनुमान के अनुसार पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरतों को पूरा करने के लिए अल्प अवधि और मध्यम अवधि के ऋणों की जरूरत होगी. इनके बिना सरकार के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने में बाधा पैदा होगी. पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में सऊदी अरब, यूएई और चीन से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है. यही वजह है कि उसे अब आने वाले समय में कर्ज मिलना मुश्किल हो जाएगा और उसे आर्थिक मोर्चे पर दिक्कतें ज्यादा झेलनी होगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज