PAK में हिंदू मंदिर बनने का रास्ता साफ़, शीर्ष इस्लामिक संस्था ने कहा- शरिया ठीक से पढ़िए

इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनने का रास्ता साफ़
इस्लामाबाद में हिंदू मंदिर बनने का रास्ता साफ़

Hindu temple in Islamabad: पाकिस्तान (Pakistan) के शीर्ष धार्मिक संगठन इस्लामी विचारधारा परिषद (सीआईआई) ने स्पष्ट कहा है कि इस्लामाबाद या फिर पाकिस्तान (Pakistan) में कहीं भी और नया हिंदू मंदिर बनने की शरिया में मनाही नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2020, 7:30 AM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) के सर्वोच्च धार्मिक संगठन ने कहा है कि शरिया में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि पाकिस्तान या फिर इस्लामाबाद के किसी भी हिस्से में नया हिंदू मंदिर नहीं बनाया जा सकता है. इस्लामी विचारधारा परिषद (Council of Islamic Ideology-CII) ने कहा कि लोग बिना पढ़े ही शरिया के आधार पर विरोध जाता रहे हैं जबकि मंदिर के निर्माण पर कोई संवैधानिक अथवा शरिया प्रतिबंध नहीं हैं. संस्था ने न सिर्फ हनुमान मंदिर को अनुमति दी बल्कि एक अन्य मंदिर जिस पर मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर लिया है वो भी वापस सौंपने के निर्देश जारी किये.

'डॉन न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामी विचारधारा परिषद (सीआईआई) ने संविधान और 1950 में हुए लियाकत-नेहरू समझौते के आधार पर एक बैठक में यह निर्णय लिया. सीआईआई ने सरकार को सैदपुर गांव में स्थित एक प्राचीन मंदिर और उससे सटी धर्मशाला को भी इस्लामाबाद के हिंदू समुदाय को सौंपने की अनुमति दी. परिषद ने कहा, 'इस्लामाबाद में वर्तमान आबादी के मद्देनजर सैदपुर गांव में स्थित एक प्राचीन मंदिर और उससे सटी धर्मशाला को हिंदू समुदाय के लिए खोला जाए और उनके लिए वहां पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि वे अपने धार्मिक अनुष्ठान कर सकें.' इस निर्णय पर सीआईआई के 14 सदस्यों के हस्ताक्षर हैं और इसमें कहा गया कि देश के अन्य धार्मिक समूहों की तरह ही हिंदुओं को भी अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार करने के लिए एक स्थान का संवैधानिक अधिकार है.

मंदिर और शवदाहगृह पर हो रहा था बवाल
बता दें कि धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने छह जुलाई को एक आवेदन सीआईआई के समक्ष भेजा था, जिसमें हिंदू समुदाय को शवदाह ग‍ृह, धर्मशाला और एक मंदिर के लिए भूमि आवंटित किए जाने को लेकर राय मांगी गई थी. मंत्रालय ने शवदाह गृह और मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 10 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने के संबंध में भी परिषद का सुझाव मांगा था. बता दें कि कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे.



पाकिस्तान के कई मौलवियों ने इस पर आपत्ति जताई थी और दावा किया था कि मंदिर के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि गैर-इस्लामिक है. शवदाह गृह और मंदिर निर्माण के खिलाफ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में भी एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी. हालांकि, अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर इसे सीआईआई के निर्णय से जोड़ दिया था. बैठक के बाद, सीआईआई के अध्यक्ष किबला अयाज ने कहा कि परिषद ने मौलवियों और हिंदू समुदाय के विभिन्न संदर्भों को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला. उन्होंने कहा, 'शरिया के विभिन्न प्रावधानों के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया है.' हालांकि, परिषद ने कहा कि वह मंदिर निर्माण के लिए सरकारी धन आवंटन का समर्थन नहीं करते क्योंकि आमतौर पर ऐसा कोई चलन नहीं है कि सरकार धार्मिक पूजा स्थलों के लिए धन मुहैया कराए.
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