समझौता ब्लास्ट में आरोपियों की रिहाई पर पाकिस्तान बोला- हम अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे मामला

हरियाणा के पंचकुला में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की एक अदालत ने 20 मार्च को नाबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद समेत तीन अन्य तीन को रिहा कर दिया था.

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Updated: May 17, 2019, 9:05 AM IST
समझौता ब्लास्ट में आरोपियों की रिहाई पर पाकिस्तान बोला- हम अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएंगे मामला
(Photo by Sipra Das/The India Today Group/Getty Images/news18.com)
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Updated: May 17, 2019, 9:05 AM IST
पाकिस्तान ने कहा है कि वह समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट्स में संदिग्धों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख कर सकता है. पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा है कि वह इस पर विचार कर रहा है. साल 2007 में हरियाणा स्थित पानीपत में हुए ब्लास्ट में 68 लोगों की मौत हो गई जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या ज्यादा थी.

हरियाणा के पंचकुला में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की एक अदालत ने 20 मार्च को नाबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद समेत तीन अन्य तीन को रिहा कर दिया था.



पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवकता मोहम्मद फैसल ने पत्रकारों से कहा, 'इस निंदनीय हमले का मास्टरमाइंड जिसने एक मजिस्ट्रेट के सामने अपने अपराधों को कबूल किया था, वह रिहा हो गया. ऐसे फैसले से भारतीय न्याय व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े होते हैं.' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, 'भारत के समक्ष यह मुद्दा उठाता रहा है, खास तौर से रिहाई के बाद हमने यह मुद्दा उठाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.'

फैसल ने कहा,  'फिलहाल हम इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लेकर जाने के लिए विचार कर रहे हैं.'

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रिहाई पर स्वामी असीमानंद ने कहा

वहीं समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट मामले में बरी होने के बाद स्वामी असीमानंद ने कहा कि हिन्दू आतंकवाद की झूठी कहानी गढ़ी गई. ‘मुझे हिन्दू और कथित भगवा आतंकवाद का पर्याय बना दिया गया था’. उन्होंने कहा कि उन्हें देश के संविधान पर पूरा विश्वास है. उन पर लगे सभी आरोपों को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने 'भगवा आतंकवाद' के आरोपों को भी निराधार पाया है.
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स्वामी असीमानंद ने बताया कि उन दिनों पश्चिम बंगाल में तेजी से धर्मांतरण कराया जा रहा था. ऐसे समय में उन्होंने हिंदुत्व के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया और धर्मांतरण करने वाले लोगों को हिंदू धर्म में वापसी करवाई. इसी ने नाराज होकर तत्कालीन सरकार ने उन्हें झूठे मामलों में फंसाना शुरू कर दिया.

समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट में उनका नाम और अंडरग्राउंड होने पर स्वामी असीमानंद ने कहा कि वे कहीं छिपे नहीं थे. उनका मोबाइल भी एक्टिव था. उन्होंने कहा कि ब्लास्ट मामले की जानकारी उन्हें टीवी के जरिए ही मिली और ये भी पता चला कि पुलिस उनकी तलाश कर रही है. समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट करने के झूठे आरोप में पुलिस ने हरिद्वार से उन्हें 19 नवंबर 2010 को गिरफ्तार कर लिया.

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यह है मामला

मामला 18 फरवरी 2007 का है. समझौता एक्सप्रेस विस्फोट एक आतंकवादी घटना थी जिसमें 18 फरवरी, 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट हुए थे. यह ट्रेन दिल्ली से अटारी, पाकिस्तान जा रही थी. इस ब्लास्ट में 68 लोगों की जान चली गई थी और 19 कब्रों को आज तक पहचान का इंतजार है. मामले के आरोपियों में से एक की हत्या हो गई थी और तीन को पीओ घोषित कर दिया गया था.
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