CPEC गलियारा: पाक सेना के अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल, जवान झेल रहे चीनी श्रमिकों की हेकड़ी

CPEC गलियारा: पाक सेना के अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल, जवान झेल रहे चीनी श्रमिकों की हेकड़ी
पाकिस्‍तान के जवान चीनी श्रमिकों की हेकड़ी झेल रहे हैं.

China Pakistan Economic Corridor: CPEC के ज़रिए चीन अपना जाल ग्वादर बंदरगाह से होते हुए अरब सागर तक बिछाना चाहता है. लेकिन आए दिन CPEC कॉरिडोर को लेकर विवाद हो रहा है. विवादों के ताज़ा प्रकरण में 21 जुलाई की सुबह चीनी श्रमिकों (Chinese Workers) और पाक सैनिकों (Pak Soldiers) के बीच जमकर लात-मुक्के चले.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 11, 2020, 10:08 PM IST
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नई दिल्‍ली. पाकिस्‍तान (Pakistan) को मोहरा बना कर चीन दक्षिण एशिया में अपना दायरा फैलाना चाहता है. इमरान खान सरकार (Imran Khan Government) भी चीन के इस मंसूबे का समर्थन कर रही है. CPEC यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China Pakistan Economic Corridor) के ज़रिए चीन अपना जाल ग्वादर बंदरगाह से होते हुए अरब सागर तक बिछाना चाहता है. लेकिन आए दिन CPEC कॉरिडोर को लेकर विवाद हो रहा है.

चीन के श्रमिकों से पाक सैनिकों की मारपीट
विवादों के ताज़ा प्रकरण में 21 जुलाई की सुबह चीनी श्रमिकों और पाक सैनिकों के बीच जमकर लात-मुक्के चले. बता दें कि चीनी श्रमिकों को पाकिस्तान का स्पेशल सिक्योरिटी डिवीज़न-SSD सुरक्षा प्रदान करता है. उस दिन भी 341 लाइट कमांडो ब्रिगेड के 6 जवान चार चीनी श्रमिकों की सुरक्षा में तैनात थे और असद उल्लाह 'प्रोटेक्शन पार्टी' का नेतृत्व कर रहे थे. इसके साथ दो चीनी आम नागरिक भी मौजूद थे.

मेन लाइन प्रोजेक्ट के दो टावरों पर काम चल रहा था, G-1526 और G-1523. चीनियों ने पहली साइट पर बिना सुरक्षा के एक श्रमिक को छोड़ने की बात कही लेकिन पाक सैनिक इसके लिए तैयार नहीं हुए. मौके पर कोई ट्रांसलेटर भी नहीं था. सुरक्षा टीम के प्रमुख असद उल्लाह ने हेडक्वार्टर फ़ोन करना चाहा, लेकिन इससे पहले चीनी श्रमिक ली युयुन ने असद उल्लाह के सर पर दो बार प्रहार किया जिसके बाद चीनी श्रमिक और पाक सैनिक आपस में भिड़ गए. और करीब 15 मिनट तक मुक्के-लातें चलते रहे. मामले की जानकारी कैम्प कमांडेंट मेजर शेज़ाद को दी गयी, जिसने तुरंत अपने जवानों से पीछे हटने को कहा. पाकिस्तान ने सेना के सभी रैंक के अधिकारियों से चीनियों से किसी भी प्रकार से उलझने से मना किया है, चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो. क्योंकि चीन इस प्रोजेक्ट में करोड़ों डॉलर खर्च कर रहा है, पाक उसे नाराज़ नहीं करना चाहता.
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21 जुलाई को हुई मारपीट का मामला जब SSD कमांडिंग अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान क़ासिम के पास पहुंचा तो उन्होंने मामले को रफादफा कर दिया. क्योंकि पाक सेना को चीनियों से न उलझने को कहा गया है. लेकिन सच्चाई यह है कि पाक सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी CPEC गलियारे से जुड़े भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं. SSD के कमांडिंग अफसर इमरान कासिम भी इसमें शामिल हैं. इमरान पर लाखों रुपयों के गबन का आरोप है. आरोपों के मुताबिक वो चीनी कंपनियों को स्थानीय श्रमिक मुहैय्या करते हैं और यह उनकी ऊपरी कमाई का ज़रिया बन चुका है. इसीलिए मारपीट के बाद भी उन्होंने अपने जवानों की सुनवाई तक नहीं की. पाक सेना के वरिष्ठ और मध्य वर्ग के अधिकारी इस कॉरिडोर से लाखों रुपये कमा रहे हैं, भले ही उनके अपने सैनिकों के मनोबल पर चीनियों के हाथों प्रहार हो.

चीनी श्रमिकों की मनमानी पर भी चुप रहती हैं पाक सैनिक
SSD के 86 विंग ने जून 2019 में पत्र लिखकर चीनी श्रमिकों की शिकायत की थी, और कहा था कि चीनी श्रमिक सेना की गाड़ियों में 'रेड लाइट' एरिया में जाते हैं जिससे उनका अधिक ईंधन खर्च होता है. लेकिन इस शिकायत पर भी SSD हेडक्वार्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की.

चीन के घटिया निर्माण पर भी सेना डालती है पर्दा
हाल ही में पाकिस्तान में एक समिति ने पाक के पावर सेक्टर से जुड़ी 278 पन्नों की रिपोर्ट इमरान खान सरकार को सौंपी. पाक के पावर सेक्टर में भी चीन की कंपनियों का दबदबा है. पाक के अन्य अधिकारी भी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं इसलिए अपनी छवि और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए इस रिपोर्ट को बनाने के लिए ISI के अधिकारियों को शामिल किया गया.

इस्लामाबाद में पाकिस्तान के नए अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का कॉन्ट्रैक्ट भी चायना कंस्ट्रक्शन थर्ड इंजीनियरिंग ब्यूरो को मिला है और यह प्रोजेक्ट $ 2.6 बिलियन का है. एयरपोर्ट के उद्घाटन से पहले ही कुछ हिस्सा ज़मीन पर आ गिरा, जिससे चीनी कंपनी के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए. जांच में पता चला कि इस प्रोजेक्ट में 13 रिटायर्ड सेना और वायु सेना के अधिकारी शामिल थे जिसमें एक लेफ्टिनेंट जनरल और एयर मार्शल शामिल था
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