कश्मीर मुद्दे पर UNSC में यूं एक-एक कर धराशाई हो गईं पाक की सारी दलीलें, चीन ही बना मात की वजह

भाषा
Updated: August 18, 2019, 9:28 AM IST
कश्मीर मुद्दे पर UNSC में यूं एक-एक कर धराशाई हो गईं पाक की सारी दलीलें, चीन ही बना मात की वजह
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुई इस बैठक का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा.

सूत्रों ने बताया कि यूएनएससी अध्यक्ष ने चर्चा के बाद कहा, 'पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने का कोई आधार नहीं है. इस बार भी उसकी बातों में कोई दम नहीं था. कोई नतीजा नहीं निकला, परामर्श के बाद पोलैंड ने कोई बयान नहीं दिया.'

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कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक दुर्लभ और बंद कमरे में बैठक बेनतीजा या बगैर किसी बयान के खत्म हो जाने से पाकिस्तान (Pakistan) और उसके सहयोगी देश चीन को एक बड़ा झटका लगा है. वैश्विक संस्था की 15 देशों की सदस्यता वाली परिषद के ज्यादातर देशों ने इस बात पर जोर दिया कि यह भारत और पाक के बीच एक द्विपक्षीय मामला है.

चीन की गुजारिश पर शुक्रवार को बुलाई गई यह अनौपचारिक बैठक करीब एक घंटे तक चली. उसके बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन और पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोदी ने एक-एक कर टिप्पणी की. उन्होंने संवाददाताओं का कोई सवाल नहीं लिया.

इस बैठक में हुई चर्चा के बारे में सूत्रों ने बताया कि चीन किसी नतीजे के लिए या पोलैंड द्वारा कोई विज्ञप्ति जारी किए जाने पर जोर दे रहा था. ब्रिटेन ने भी प्रेस विज्ञप्ति की मांग पर चीन का साथ दिया. बता दें कि पोलैंड अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष है.

सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में ज्यादातर का कहना था कि इस चर्चा के बाद कोई बयान या नतीजा जारी नहीं किया जाना चाहिए और आखिरकार उनकी ही बात रही. उसके बाद चीन बैठक से बाहर आ गया और बतौर एक देश उसने बयान दिया. फिर पाकिस्तान ने भी बयान दिया.

पाकिस्तान की दलीलों में नहीं दिखा दम
सूत्रों ने बताया कि यूएनएससी अध्यक्ष ने चर्चा के बाद कहा, 'पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाने का कोई आधार नहीं है. इस बार भी उसकी बातों में कोई दम नहीं था. कोई नतीजा नहीं निकला, परामर्श के बाद पोलैंड ने कोई बयान नहीं दिया.'

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने मीडिया से कहा कि 'अगर राष्ट्रीय बयानों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इच्छा के रूप में पेश करने कोशिश की जाएगी' तो वह भी भारत का राष्ट्रीय रुख सामने रखेंगे. उनका इशारा चीन और पाकिस्तान के बयानों की ओर था.
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संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन और पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोदी ने एक-एक कर टिप्पणी की
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन और पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोदी ने एक-एक कर टिप्पणी की


सूत्रों के अनुसार सुरक्षा परिषद के ज्यादातर सदस्यों ने माना कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है और उन दोनों को ही आपस में इसका समाधान करने की जरूरत है. यह कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की मंशा रखने वाले पाकिस्तान के लिए एक झटका है.

सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार वाले पांच स्थायी सदस्य देशों में शामिल चीन ने यह बैठक बुलाने की मांग की थी. परिषद की प्रक्रियाओं के अनुसार उसके सदस्य किसी भी मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकते हैं, लेकिन बंद कमरे में बैठकों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा.

सूत्रों के अनुसार सुरक्षा परिषद के सदस्यों के साथ इस चर्चा में भारत ने एक-एक कर सारी दलीलें ध्वस्त कर दी. भारत का यह रुख रहा कि कैसे कोई संवैधानिक मामला शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है, जैसा कि पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 के संदर्भ में दावा किया है. सूत्रों ने बताया कि भारत का कहना था, 'कैसे किसी संघीय व्यवस्था का सीमा के पार असर हो सकता है.' भारत बार-बार इस बात पर जोर दे रहा है कि वह कश्मीर मुद्दे पर शिमला समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है.

मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के खोखले साबित हुए चीन के दावे
मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के मुद्दे पर सूत्रों ने कहा, 'पाकिस्तान इस मोर्चे पर भी मात खा गया, क्योंकि चीन मानवाधिकारों की दुहाई दे रहा है.'  सूत्रों ने कहा कि यदि पाकिस्तान महसूस करता है कि अनुच्छेद 370 स्थिति में एक बड़ा बदलाव है तो चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) क्या है. सूत्रों के अनुसार परिषद में अफ्रीकी देशों - आईवरी कोस्ट एवं इक्वेटोरियल गुएना, डोमिनिकन रिपब्लिक, जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और रूस ने भारत का समर्थन किया.

संयुक्त राष्ट्र के कूटनीतिक सूत्र ने कहा कि फ्रांस क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखे हुए है, लेकिन उसकी प्राथमिकता यह है कि भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय संवाद करे. अमेरिका और जर्मनी का भी यही रुख था. रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलिंस्की ने मीटिंग रूम में जाने से पहले संवाददाताओं से कहा कि मॉस्को का मानना है कि यह भारत और पाकिस्तान का 'द्विपक्षीय मामला' है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी (फाइल फोटो)
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी (फाइल फोटो)


इंडोनेशिया भी बढ़ते तनाव से चिंतित था और उसने दोनों देशों से संवाद तथा कूटनीति पर लौटने की अपील की. ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कहा, 'आज सुरक्षा परिषद ने कश्मीर की स्थिति पर चर्चा की. हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. कश्मीर की घटनाओं की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता है- हम सभी से शांति एवं सतर्कता बनाए रखने की अपील करते हैं.'

UNSC की बैठक से पहले ही पाकिस्तान को लगे कई झटके
बंद कमरे में हुई सुरक्षा परिषद की इस बैठक से पहले पाकिस्तान को कई झटके लगे हैं. उसने इस विषय पर खुली बैठक की मांग की थी. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने के भारत के कदम पर सुरक्षा परिषद में चर्चा की मांग की थी.  लेकिन सुरक्षा परिषद ने एक अनौपचारिक और बंद कमरे में बैठक की. कुरैशी ने यह भी अनुरोध किया था कि पाकिस्तान सरकार के एक प्रतिनिधि को बैठक में हिस्सा लेने दिया जाए. उस अनुरोध को भी नहीं माना गया क्योंकि चर्चा बस सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों के बीच थी.

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First published: August 18, 2019, 8:56 AM IST
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