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इंग्लैंड कोर्ट ने दिया PAK को बड़ा झटका, भारत को मिलेगी हैदराबाद के निजाम की 3 अरब की संपत्ति

News18Hindi
Updated: October 2, 2019, 8:31 PM IST
इंग्लैंड कोर्ट ने दिया PAK को बड़ा झटका, भारत को मिलेगी हैदराबाद के निजाम की 3 अरब की संपत्ति
हैदराबाद के सातवें निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ान सिद्दिक़ी के वित्त मंत्री नवाब मोईन नवाज़ जंग ने 1948 में ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के बैंक खाते में जो 10 लाख पाउंड भेजे थे.

ये मामला हैदराबाद के सातवें निजाम (Hyderabad Nizam) के करीब 3 अरब रुपए से जुड़ा हुआ है. इस मामले में इंग्लैंड की कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला दिया. इस पैसे पर भारत में निजाम के उत्तराधिकारियों का अधिकार होगा. बुधवार को इंग्लैंड एंड वेल्स हाईकोर्ट (The high court of England and Wales) ने भारत और हैदराबाद के सातवें निजाम के दो वंशजों के हक में फैसला दिया.

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  • Last Updated: October 2, 2019, 8:31 PM IST
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लंदन: भारत ने दुनिया के एक और मंच पर पाकिस्तान (Pakistan) को तगड़ा झटका दिया है. ये मामला हैदराबाद के सातवें निजाम (Hyderabad Nizam) के करीब 3 अरब रुपए से जुड़ा हुआ है. इस मामले में इंग्लैंड की कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला दिया. इस पैसे पर भारत में निजाम  के उत्तराधिकारियों का अधिकार होगा. बुधवार को इंग्लैंड एंड वेल्स हाईकोर्ट (The high court of England and Wales) ने भारत और हैदराबाद के सातवें निजाम के दो वंशजों के हक में फैसला दिया.

ये मामला निजाम द्वारा 1948 में दस लाख पाउंड लंदन के बैंक में भेजने से जुड़ा है. इस समय ये रकम करीब 3.5 करोड़ पाउंड (3062953745.95 रुपए) के बराबर हो चुकी है. पिछले 70 साल में ये केस कई उतार चढ़ाव से भरा रहा. इसमें एक तरफ भारत के साथ निजाम के वंशज मुकर्रम जाह और मुफ्फाकम जाह थे तो दूसरी तरफ पाकिस्तान था. पाकिस्तान का दावा है कि ये पैसा उस समय हथियारों की सप्लाई के लिए जारी किया गया था.

166 पेजों में दिया जज ने अपना फैसला
166 पेजों के फैसले में जस्टिस मार्क्स स्मिथ ने कहा, भले ये बात सही हो कि भारत में शामिल होने और गिरफ्तारी के डर के कारण निजाम की सरकार हथियारों की खरीद में शामिल थी. और उसनके हथियारों की खरीद के लिए दूसरे अकाउंट का इस्तेमाल किया था. लेकिन इस पैसे पर पाकिस्तान का हक नहीं है. उससे उसका कोई लेना देना नहीं है. मुझे नहीं लगता कि हथियारों की खरीद या पाकिस्तान की क्षतिपूर्ति का किसी भी तरह से हथियारों की खरीद से कोई लेना-देना था.

जज ने अपने ऑर्डर में कहा, 'निजाम के भारत में जो वंशज हैं,  वही इस पैसे को पाने के असली उत्तराधिकारी हैं. ऐसे में हमें कोई संभावना नहीं लगती कि भारत के उनके वंशजों के अलावा कोई और इस पैसे का उत्तराधिकारी है.'



सातवें निज़ाम के पोते युवराज मुकर्रम जाह-आठवें का  प्रतिनिधित्व करने वाली लॉ संस्था विदर्स वर्ल्डवाइड लॉ फर्म के  पॉल हेविट्ट ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, आज के फैसले से हम बहुत खुश हैं. हमारे क्लाइंट अब अपना पैसा पाने के हकदार हैं, जिस पर पिछले 70 साल से विवाद है. जब ये विवाद शुरू हुआ उस समय हमारे क्लाइंट बच्चे थे, आज वह करीब 80 साल के हैं. ये देखकर हमें संतोष है कि आखिर फैसला हमारे पक्ष में आया. जज ने पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया कि हैदराबाद का विलय गलत तरीके से किया गया था.
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हैदराबाद के सातवें निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ान सिद्दिक़ी के
दरबार में वित्त मंत्री रहे नवाब मोईन नवाज़ जंग ने 1948 में ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के बैंक खाते में जो 10 लाख  पाउंड भेजे थे वो आज 35 गुना बढ़ चुके हैं. ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे हबीब इब्राहिम रहीमतुल्ला के लंदन बैक खाते में ट्रांसफर किए गए 10 लाख पाउंड (क़रीब 89 करोड़ रुपए) अब 350 लाख पाउंड (लगभग 3.1 अरब रुपए) बन चुके हैं और उन्हीं के नाम पर उनके नैटवेस्ट बैंक खाते में जमा हैं.

3 अरब रुपए का ये है मामला
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ. लेकिन उस समय हैदराबाद स्वतंत्र भारत का हिस्सा नहीं बना. हैदराबाद 17 सितंबर 1948 तक निज़ाम शासन के तहत उनकी रियासत बना रहा. इसके बाद 'ऑपरेशन पोलो' नाम के सैन्य अभियान के जरिए इस रियासत का विलय भारत में कर दिया गया. 1948 में हैदराबाद के उस्मान अली खान हुआ करते थे. उनका नवगठित पाकिस्तान से बेहद लगाव था. पाकिस्तान ने बंटवारे के बाद से ही लगातार पैसे की कमी के बारे में अपने सभी चाहनेवालों और सहानुभूति रखने वालों को अवगत कराता रहता था.

ऐसे में हैदराबाद के निजाम की दौलत पर सबकी नजर थी. उस वक्त के नियम-कानूनों के अनुसार सीधे तौर पर भारत से पाकिस्तान पैसे नहीं भेजे जा सकते थे. इसलिए हैदराबाद के निजाम ने पाकिस्तान के ब्रिटेन में उच्चायुक्त रहे हबीब इब्राहिम रहीमटोला के लंदन बैंक खाते में पैसे भेज दिए. लेकिन वे इसे निकालने में सफल नहीं हो पाए. बाद में इस पैसे पर भारत समर्थक निजाम के वंशजों ने दावा ठोंक दिया. जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो पाकिस्तानी उच्चायुक्त बनाम सात अन्य का मामला बना. इस अन्य में निजाम के वंशज, भारत सरकार और भारत के राष्ट्रपति भी शामिल हैं.

पाकिस्तान जताता रहा है अपना का दावा
एक तरफ़ निज़ाम के परिवार का कहना है कि ऑपरेशन पोलो के दौरान ये पैसा हिफ़ाज़त से रखने के लिए पाकिस्तानी उच्चायुक्त के खाते में भेजा गया था. दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की दलील है कि 1948 में हैदराबाद के भारत में विलय के दौरान पाकिस्तान ने पूर्व निज़ाम की मदद की थी. ये पैसा उसी मदद के एवज़ में पूर्व निजाम ने पाकिस्तान के लोगों को तोहफ़े के तौर पर दिया था और इस कारण इस पर पाकिस्तान का हक है.

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First published: October 2, 2019, 6:41 PM IST
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