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आतंकवाद का चिड़ियाघर बना पाकिस्तान जिसमें तालिबान, आईएसआईएस, अलकायदा और हक्कानी जैसे जानवर हैं

आतंकवाद का चिड़ियाघर बना पाकिस्तान जिसमें तालिबान, आईएसआईएस, अलकायदा और हक्कानी जैसे जानवर हैं

बड़ा प्रश्न यह है कि जब तालिबान ने जांच चौकियां बनाईं थी तो फिर कैसे हमलावर एयरपोर्ट तक पहुंचा. (फाइल फोटो)

बड़ा प्रश्न यह है कि जब तालिबान ने जांच चौकियां बनाईं थी तो फिर कैसे हमलावर एयरपोर्ट तक पहुंचा. (फाइल फोटो)

अफगानिस्तान (Afghanistan) में मानवता के खिलाफ हो रहे कामों और अपराधों को पूरा दोष आईएसआईएस (ISIS) के ऊपर मढ़ कर तालिबान (Taliban) की छवि को सुधारने की कोशिश की जा रही है. जबकि दुनिया जानती है कि विश्व भर के सभी जिहादी समहू एक ही वैचारिक धारणा रखते हैं और अफगानिस्तान में मौजूद सभी संगठनों की सोच और धारणाओं में गहरा संबंध है.

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अभिजीत मजूमदार

नई दिल्ली: तालिबान के कब्जे के बाद से अब अफगानिस्तान कई आतंकी संगठन का गढ़ बन गया है. मौजूदा समय में अफगानिस्तान में तालिबान, आईएसआईएस (खोरासान), अलकादया और हक्कानी नेटकवर्क पूरी तरह से एक्टिव हैं. गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे पर हुए विस्फोट में 13 अमेरिकी सैनिकों समेते 160 से ज्यादा नागिरिकों की मौत हुई थी. इस हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली थी, लेकिन अंतराष्ट्रीय मीडिया का एक वर्ग और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले में तालिबान की भूमिका को विश्व पटल पर कम करने की कोशिश की.

अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की जल्दबाजी ने राज्य को उसके अंत की और धकेल दिया है. अब ऐसे लोगों के हाथ में राष्ट्र की सत्ता है जो अपने को बदला हुआ दिखाने की कोशिश में लगे हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ उदारवादी मीडिया इस्लामी आतंकवाद को कवर फायर देने का काम कर रही है ताकि मुसलमानों को अपने समुदाय के बारे में कठिन सवालों और विरोध का सामना न करना पड़े.

तालिबान की छवि सुधारने की कोशिश
अफगानिस्तान में मानवता के खिलाफ हो रहे कामों और अपराधों को पूरा दोष आईएसआईएस के ऊपर मढ़ कर तालिबान की छवि को सुधारने की कोशिश की जा रही है. जबकि दुनिया जानती है कि विश्व भर के सभी जिहादी समूह एक ही वैचारिक धारणा रखते हैं और अफगानिस्तान में मौजूद सभी संगठनों की सोच और धारणाओं में गहरा संबंध है.

बता दें कि जिस आईएसआईएस पर इसका दोष मढ़ा जा रहा है और तालिबान को साफ सुथरा बताया जा रहा है उसी तालिबान से कई जिहादी आईएसआईएस के लिए काम करते हैं. दोनों ही संगठनों के बीच कभी लड़ाई होती है तो कभी दोनों एक दूसरे का सहयोग करते हैं. हाल ही में तालिबान ने हजारों आईएसआईएस आतंकियों को जेल से भी रिहा कर दिया.

तालिबान को पहले से थी हमले की जानकारी
यह एक बड़ा प्रश्न है कि तालिबान के होने के बावजूद आईएसआईएस के आत्मघाती हमलावर आखिर कैसे काबुल एयरपोर्ट के पास पहुंचे. तालिबान ने तो जगह जगह पर जांच चौकियां बना रखीं थी. यह पूरी तरह से साफ है कि तालिबान को पहले से ही हमले की जानकारी थी.

इस हमले के विरोध में अमेरिका ने ड्रोन से आईएसआईएस के एक प्रमुख आतंकी को मार गिराया. इसके बाद तालिबान ने तुरंत इस कार्रवाई को अफगान क्षेत्र पर हमला बताते हुए इसकी निंदा कर डाली. आखिर तालिबान को इससे क्या समस्या आ गई. ? तथ्य यह है कि तालिबान और आईएसआईएस दोनों में ही अफगानी और पाकिस्तानी लोग जिहाद के लिए शामिल होते हैं.

आईएसआईएस नेता ने किए खुलासे
अफगानिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में हो रही जमीनी घटनाएं एक भयावह पैटर्न दिखा रही हैं. 25 मार्च, 2020 को काबुल में आत्मघाती हमलावरों और बंदूकधारियों ने एक सिख गुरुद्वारे पर हमला किया था. आतंकी हमले में 25 लोग मारे गए थे. इसकी जिम्मेदारी ISIS-K ने ली थी. कंधार में एक आतंकवादी विरोधी अभियान के दौरान आईएसआईएस-के के एक नेता असमल फारूकी के लिए जाल बिछाया गया. फारूकी ने कहा कि आईएसआईएस ने हक्कानी नेटवर्क के साथ हमले का प्लान किया था, लेकिन उन्होंने और भी गंभीर खुलासा किया कि हक्कानी के अलावा, ISIS ने पाकिस्तानी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ भी हाथ मिलाया था.

भारत में हमले करने के लिए जैश और लश्कर जैसे आतंकी संगठनों को बनाया गया और समर्थन दिया गया. लश्कर ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों को अंजाम दिया, जबकि जैश 2019 के पुलवामा हमले को अंजाम दिया था जिसमें कई सैनिक शहीद हो गए थे.

तालिबान, आईएसआईएस, हक्कानी नेटवर्क, अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ये सभी अफगानिस्तान और पाकिस्तान में एक ही आतंकवादी तंत्र से जुड़े हुए हैं.

आईएसआईएस-के मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा पर अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में स्थित है. इस संगठन के आतंकी पाकिस्तान में जैश शिविरों में आतंकी प्रशिक्षण लेते हैं. यहीं से नशीले पदार्थों और मानव तस्करी का व्यापार भी होता है. अब समय आ गया है कि दुनिया को आतंकवाद के मुद्दे पर खुलकर सामने आना होगा और यह स्पष्ट करना होगा कि इस्लामिक आतंकवाद के कई चेहरों वाला एक ही प्राणी है और उसे इस क्षेत्र से पाकिस्तान और उसके हिंसक कठपुतलियों द्वारा समर्थन भी प्राप्त हो रहा है.

लश्कर अफगानिस्तान में ठिकानों की टोह लेता है. हक्कानी नेटवर्क अपने नार्को और अन्य क्राइम सिंडिकेट के माध्यम से समन्वय और रसद योजना देता है. आईएसआईएस-के अक्सर इस अंतहीन युद्ध में आत्मघाती हमलावरों और अन्य डिस्पोजेबल मुहैया कराता है, जबकि तालिबान अब एक वैध, राजनयिक चेहरा पेश करना चाहता है.

Tags: Afghanistan Crisis, ISIS-K, Pakistan, Taliban

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