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लाहौर हाईकोर्ट ने परवेज मुशर्रफ के खिलाफ विशेष अदालत के गठन को असंवैधानिक ठहराया

News18Hindi
Updated: January 13, 2020, 7:24 PM IST
लाहौर हाईकोर्ट ने परवेज मुशर्रफ के खिलाफ विशेष अदालत के गठन को असंवैधानिक ठहराया
पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य शासक परवेज मुशर्रफ को लाहौर हाईकोर्ट से बड़ी राहत ि‍मिली है.

पाकिस्‍तान (Pakistan) के लाहौर हाईकोर्ट (Lahore High Court) ने फैसले में कहा कि पूर्व सैन्‍य शासक परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) के खिलाफ देशद्रोह का मामला कानून के अनुसार तैयार नहीं किया गया. हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत (Special Court) का गठन ही असंवैधानिक (Unconstitutional) है. साथ ही उनकी मौत की सजा भी माफ कर दी. मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष अदालत के फैसले को खारिज करने की मांग की थी.

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  • Last Updated: January 13, 2020, 7:24 PM IST
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लाहौर. पाकिस्‍तान के लाहौर हाईकोर्ट (Lahore High Court) ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ (Pervez Musharraf) के खिलाफ देशद्रोह (Sedition) के मामले की सुनवाई करने वाली और उन्हें मौत की सजा सुनाने वाली विशेष अदालत के गठन को असंवैधानिक (Unconstitutional) करार दिया है. साथ ही मुशर्रफ की मौत की सजा भी माफ कर दी. छह साल तक उनके खिलाफ देशद्रोह के हाई प्रोफाइल मामले की सुनवाई चली थी. यह मामला 2013 में तत्कालीन पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N) सरकार ने दायर किया था. बता दें कि इस्लामाबाद की विशेष अदालत ने 17 दिसंबर, 2019 को 74 वर्षीय मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई थी.

परवेज मुशर्रफ ने विशेष अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
पाकिस्‍तान के समाचारपत्र डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हाईकोर्ट ने मुशर्रफ के खिलाफ विशेष अदालत (Special Court) के गठन को संविधान के खिलाफ करार दिया. जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी, मोहम्मद अमीर भट्टी और चौधरी मसूद जहांगीर की पीठ ने मुशर्रफ की याचिका पर सोमवार को यह फैसला सुनाया है. मुशर्रफ ने अपने खिलाफ देशद्रोह के मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत के गठन को चुनौती दी थी. मुशर्रफ ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विशेष अदालत के फैसले को अवैध, क्षेत्राधिकार से बाहर और असंवैधानिक करार देते हुए उसे खारिज करने की मांग की थी. साथ ही हाईकोर्ट का फैसला आने तक विशेष अदालत के निर्णय को निलंबित रखने की मांग भी की.

'कैबिनेट बैठकों के एजेंडे में नहीं था विशेष अदालत का गठन'

जियो टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला कानून के अनुसार तैयार नहीं किया गया. एडिशनल अटॉर्नी जनरल इश्तियाक अहमद खान ने अदालत से कहा था कि संविधान के अनुच्छेद-6 के तहत मुशर्रफ के खिलाफ सुनवाई के लिए विशेष अदालत का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार की कैबिनेट बैठकों के एजेंडे का हिस्सा नहीं था. विशेष अदालत मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी के बगैर ही गठित कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ लगाए गए आरोपों में दम नहीं है क्योंकि कार्यकारी की आपात शक्तियों के तहत मौलिक अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं.

पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ 2013 में दर्ज हुए था मुकदमा
पूर्व सैन्‍य शासक परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तान (Pakistan) में 1999 से लेकर 2008 तक शासन किया था. फिलहाल वह दुबई (Dubai) में रहते हैं. नवाज शरीफ के नेतृत्‍व वाली पीएमएल-एन सरकार ने नवंबर, 2007 में संविधान (Constitution) के इतर आपातकाल (Emergency) लगाने को लेकर पूर्व सेना प्रमुख के खिलाफ 2013 में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. इस आपातकाल के चलते ऊपरी अदालतों के कई न्यायाधीशों को उनके घरों में कैद कर लिया गया था. इसके साथ ही 100 से अधिक न्यायाधीश बर्खास्त कर दिए गए थे. मुशर्रफ को पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और लाल मस्जिद के धर्मगुरु की हत्या के मामले में भगोड़ा घोषित किया गया था. हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि परवेज मुशर्रफ देशद्रोही नहीं हो सकते.ये भी पढ़ें:

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First published: January 13, 2020, 7:14 PM IST
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