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क्या फाइटर ड्रोन के जरिए आतंक की साजिश रच रहा है पाकिस्तान

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 11:01 PM IST
क्या फाइटर ड्रोन के जरिए आतंक की साजिश रच रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान के पास लड़ाकू ड्रोन की जो खेप है, वो आतंक बरपाने के लिए काफी है

पाकिस्तान ने अपनी एयरफोर्स में ड्रोन की बड़ी पलटन शामिल की है. उसके पास ऐसे लड़ाकू ड्रोन हैं, जो हवा से जमीन पर मिसाइल पर मार कर सकते हैं. इन ड्रोन से पाकिस्तान के निशाने पर कोई और नहीं बल्कि भारत ही है

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  • Last Updated: October 23, 2019, 11:01 PM IST
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नई दिल्ली. कुछ दिनों पहले हमने देखा था कि सऊदी अरब (Saudi Arabia) के दो तेल संयत्रों पर लड़ाकू ड्रोन (Combat Drone) से बड़ा हमला हुआ. तेल सयंत्रों को बड़ा नुकसान हुआ. हालांकि सऊदी अरब के पास दुनिया का बेहतरीन एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम (Anti missile defence system) है लेकिन ये सिस्टम धरा का धरा रह गया. बाद में एक यमन आतंकी ग्रुप हौतिस (yemen terror groups houthis) ने इसकी जिम्मेदारी ली. क्या पाकिस्तान (Pakistan) ऐसा ही आतंकी हमला भारत के खिलाफ करने की साजिश कर रहा है. कुछ दिनों से पाकिस्तानी ड्रोन लगातार भारतीय सीमा और पंजाब में मंडराते देखे जा रहे हैं.

ये भी खबरें हैं कि पाकिस्तान आतंक की जिस साजिश में लगा है, उसमें लड़ाकू ड्रोन की बड़ी भूमिका हो सकती है. ऐसी आशंकाएं कई मीडिया रिपोर्ट्स में जाहिर की गई हैं.

वैसे आपको बता दें कि दुनिया के कई आतंकवादी ग्रुप ऐसे हैं, जिनके पास ऐसे ड्रोन हैं या फिर ईरान के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं. आशंका ये भी है कि भारत के खिलाफ ऐसे ड्रोन पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों को दे सकता है या फिर दे चुका है.

पाकिस्तान का दावा है कि पिछले कुछ सालों में उसने काफी उम्दा किस्म के मानवरहित लड़ाकू एरियल व्हीकल (unmanned combat aerial vehicle) विकसित कर उनका निर्माण शुरू किया है. इनका इस्तेमाल पाकिस्तानी वायुसेना इन दिनों कर भी रही है. पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता के प्रदर्शन में भी बुर्रक नाम के मानवरहित लड़ाकू ड्रोन का प्रदर्शन दुनिया के सामने कर चुका है.



पिछले दिनों बुर्रक को पाकिस्तान की वायुसेना में शामिल करने की भी बात कही थी. बुर्रक कैमरों के साथ सेंसर्स और लेजर गाइडेड वायु से सतह पर मार करने वाली मिसाइल से लैस ड्रोन है.

चीन से भी खरीदे खतरनाक विंग लूंग लड़ाकू ड्रोन
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इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) यानी पाकिस्तानी सेना के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट ने ये भी दावा है कि उसके पास पर्याप्त संख्या में ऐसे ड्रोन हैं. दावा तो ये भी है कि पाकिस्तान दुनिया का पांचवां देश है, जिसने ऐसे ड्रोन विकसित करने में सफलता हासिल की है. पाकिस्तान ने पिछले साल चीन से खतरनाक विंग लूंग लड़ाकू और टोही ड्रोन खरीदे हैं.

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फाइटर जेट की तुलना में खासे सस्ते
ड्रोन के साथ सबसे अच्छी बात ये होती है कि ये फाइटर जेट की तुलना में बहुत सस्ते होते हैं. मानवरहित होते हैं. अगर इनका इस्तेमाल सटीक तरीके से किया जाए तो काफी नुकसान कर सकते हैं. दुनियाभर में लड़ाकू ड्रोन के निर्माण और इस्तेमाल में जिन चार-पांच देशों का नाम लिया जाता है, उसमें इजरायल, चीन, रूस और ईरान शामिल हैं.

पाकिस्तान का लड़ाकू ड्रोन बुर्रक


ईरान ने अमेरिका से तनाव के बाद खुलेआम दावा किया था कि उसके पास दुनिया में सबसे ज्यादा ड्रोन हैं. माना जाता है कि सऊदी अरब पर जिन ड्रोन से हमला किया गया, उसके पीछे ईरान ही था. सऊदी अरब में हमले में जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, वो करीब 1200 किलोमीटर दूर से चुपचाप आए थे. काफी नीचे उड़ने के कारण वो कहीं रडार की पकड़ में नहीं आए.

क्या है कीमत 
चलिए इनकी कीमत के बारे में जान लेते हैं. लड़ाकू विमान राफेल की कीमत 100 मिलियन डॉलर के आसपास बताई जाती है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट एक अमेरिकी एक्सपर्ट के हवाले से कहती है कि उम्दा और लड़ाकू ड्रोन केवल 25 हजार डॉलर में आ जाता है, लिहाजा ये कम दाम में दुश्मन का बड़ा नुकसान कर सकता है. सऊदी अरब पर करीब 40 ड्रोन ने हमला किया था. कुल मिलाकर इनकी कीमत एक मिलियन डॉलर आंकी गई. वैसे पाकिस्तान ने पिछले साल चीन से करीब 50 लड़ाकू ड्रोन का जो सौदा किया, वो 5.4 मिलियन डॉलर का था.

ड्रोन की कीमत फाइटर जेट की तुलना में कम होती है लेकिन कई बार ये दुश्मन का भारी नुकसान कर डालते हैं


बेशक हम लड़ाकू विमानों, टैंक, मिसाइल और डिफेंस सिस्टम को कतई कम करके नहीं आंक सकते, क्योंकि उनका महत्व वाकई काफी ज्यादा है लेकिन ये भी सही है कि ड्रोन कम कीमत के होते हैं और दुश्मन का नुकसान करने में अपनी कीमत वसूल करा देते हैं.

रडार की पकड़ में नहीं आते, घंटों उड़ सकते हैं
लड़ाकू ड्रोन की यही खासियत है कि वो आकार और नीचे उड़ने की वजह से अक्सर रडार को चकमा दे जाते हैं. बगैर रुके 1000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान भर सकते हैं. पाकिस्तान के पास जो चीनी ड्रोन विंग लूंग है, वो 20 घंटे लगातार उड़ सकता है. उसकी स्पीड सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे, क्योंकि इसकी रफ्तार 370 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है. ये साथ में 480 किलोग्राम वजन ले जा सकता है.

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सीमाई इलाकों में पाकिस्तान ने तैनात किये हैं द्रोन
मीडिया की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में भारत से सटे सीमाई इलाकों यानी उरी, पूंछ, नौशेरा और कई इलाकों के आसपास इन्हें तैनात कर दिया है. ये जीपीएस से लैस हैं और  हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम हैं.

पाकिस्तान ने पिछले दिनों बड़े पैमाने पर भारत के साथ सटे सीमाई इलाकों में ड्रोन की तैनाती की है


कहा जाता है कि पाकिस्तान की मंशा इनके जरिए पंजाब और कश्मीर में गड़बड़ी फैलाने की है. पिछले दिनों हमने देखा भी कि पाकिस्तान से भेजे गए ड्रोन से बड़े पैमाने पर हथियार भेजे गए थे, जो आतंकियों के इस्तेमाल के लिए थे. लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया. अगर ड्रोन पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए आतंकी संगठनों के हाथ लगे तो वो वाकई आतंक की बड़ी वारदात अंजाम दे सकते हैं.

कब हुआ पाकिस्तान को ड्रोन की अहमियत का अंदाज
दरअसल पाकिस्तान को ड्रोन की अहमियत का अंदाजा 2004 में तब हुआ जब उसने अमेरिका के एमक्यू-1 प्रेडेटर (MQ-1 Predator) ड्रोन विमानों को पाकिस्तान-अफगानिस्तान के सीमाई इलाकों पर आतंकवादियों के ऊपर बम बरसाते देखा. तब पाकिस्तान ने अमेरिका से इन्हें हासिल करने की कोशिश की लेकिन अमेरिका ने इनकार कर दिया. उसे डर था कि इसकी तकनीक चुराई जा सकती है.

अमेरिका के इनकार के बाद पाकिस्तान ने चीन की मदद से इन्हें बनाया. वर्ष 2009 में पहली बार जब पाकिस्तान ने बुर्रक ड्रोन का परीक्षण किया तो उसमें कई कमियां थीं लेकिन 2012 में चीन की मदद के बाद वो अब बुर्रक ड्रोन बना रहा है, उन्हें अमेरिका के उन्नत लड़ाकू प्रेडेटर और चीन के रेनबो सीएच-3 (CASC Rainbow CH-3) के बराबर रखा जा सकता है.

पिछले दिनों भारत ने इजरायल के साथ 54 हारोप लड़ाकू ड्रोन खरीदने का सौदा किया है


पाकिस्तान बना चुका है ड्रोन की लड़ाकू ब्रिगेड
कहा जाता है कि पाकिस्तान के पास इस समय बड़ी संख्या में लड़ाकू और टोही ड्रोन हैं. वो इन्हें अपनी लड़ाकू ब्रिगेड की तरह ही देखता है.  पिछले दिनों भारत ने इजरायल से 54 हारोप अटैक ड्रोन Israeli (HAROP attack drones) खरीदे हैं. ये भारतीय वायुसेना में शामिल होंगे. वैसे भारतीय वायुसेना के शस्त्रागार में पहले से ही करीब 110 ड्रोन हैं, जिन्हें पी-4 के तौर पर जाना जाता है. वो आमतौर पर टोही ड्रोन के तौर पर इस्तेमाल होते हैं.

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First published: October 23, 2019, 9:36 PM IST
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