पाकिस्तान के बासमती चावल को GI टैग, समझिए भारत के लिए इसका क्या मतलब

पाकिस्तान के बासमती चावल को जीआई टैग (फाइल फोटो)

पाकिस्तान के बासमती चावल को जीआई टैग (फाइल फोटो)

Pakistan Basmati Rice GI Tag News: पाकिस्तान के बासमाती चावल को जीआई टैग मिल गया है. भारत भी बासमाती चावल को अपने उत्पाद के रूप में पंजीकृत करवाना चाह रहा है. भारत ने पिछले संघ यूरोपीय संघ में किया है दावा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:04 PM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान को अपने बासमती चावल के लिए भौगोलिक संकेतक (GI) पहचान मिल गया है. यह चावल के विशेष किस्म के लिए एक स्थानीय पंजीकरण तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति मजबूत करने का मार्ग प्रशस्त करेगा. पाकिस्तान, यूरोपीय संघ में बासमती चावल को अपने उत्पाद के रूप में पंजीकृत करने के भारत के कदम का विरोध कर रहा है.

इन्हें मिलता है GI टैग, भारत ने भी कर रखी है दावेदारी

जीआई टैग उन उत्पादों पर उपयोग किया जाने वाला एक संकेतक है, जिसकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति केन्द्र है और इस क्षेत्र के विशेष गुण और खासियत से युक्त है. पाकिस्तान 27-सदस्यीय यूरोपीय संघ में बासमती चावल को अपने उत्पाद के रूप में पंजीकृत करने के भारत के कदम के खिलाफ मामला लड़ रहा है.

कानून के तहत जरूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में किसी भी उत्पाद के पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले इसे उस देश के GI कानूनों के तहत उसे संरक्षित किया जाए. पाकिस्तान के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि देश को अपनी बासमती के लिए जीआई टैग मिला है.
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यूरोपीय संघ में मजबूत होगा पाकिस्तान

वाणिज्य सलाहकार अब्दुल रजाक दाऊद ने ट्विटर पर घोषणा की, 'मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पाकिस्तान ने भौगोलिक संकेत अधिनियम 2020 के तहत बासमती चावल को अपने भौगोलिक संकेतक (जीआई) के रूप में पंजीकृत किया है. इस अधिनियम के तहत, एक जीआई रजिस्ट्री का गठन किया गया है, जो जीआई को पंजीकृत करेगा तथा जीआई के प्रोपराइटर और अधिकृत इस्तेमालकर्ता के बुनियादी रिकॉर्ड को रखेगा.' यह माना जाता है कि जीआई टैग की वजह से यूरोपीय संघ में पाकिस्तान की स्थिति मजबूत होगी.



भारत का दावा भी जानिए

पिछले साल सितंबर में भारत ने बासमती चावल के एकमात्र स्वामित्व का दावा करते हुए यूरोपीय संघ को आवेदन दिया था. आवेदन प्रस्तुत करने के बाद बासमती चावल को पाकिस्तान के उत्पाद के रूप में संरक्षित करने का मुद्दा सामने आया था. अपने आवेदन में, भारत ने दावा किया कि विशेष रूप से इस लंबे सुगंधित 'बासमती' चावल को इस उप-महाद्वीप के एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में उगाया जाता है. बासमती चावल के इतिहास की संक्षिप्त जानकारी पर प्रकाश डालने के बाद, भारत ने यह भी दावा किया कि यह उत्पादन वाला क्षेत्र उत्तर भारत का एक हिस्सा है, जो हिमालय की तलहटी से नीचे गंगा के मैदानी भाग का हिस्सा है।

पाकिस्तान ने भारत के दावे को दी थी चुनौती

यूरोपीय संघ के समक्ष किए गए इस भारतीय दावे को दिसंबर में चुनौती दी गई थी और पाकिस्तान का मुख्य तर्क यह था कि बासमती चावल भारत और पाकिस्तान का संयुक्त उत्पाद है. पाकिस्तान दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सालाना पांच से सात लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है, जिसमें से दो लाख टन से ढाई लाख टन का निर्यात यूरोपीय संघ के देशों को किया जाता है.
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