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FATF की पाकिस्‍तान को फटकार- 'आतंकियों की फंडिंग रोकने को नहीं उठाए सख्त कदम'

FATF की पाकिस्‍तान को फटकार- 'आतंकियों की फंडिंग रोकने को नहीं उठाए सख्त कदम'

(फाइल फोटो- इमरान खान)

(फाइल फोटो- इमरान खान)

एफएटीएफ ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को दी जा रही आतंकी फंडिंग का भी जिक्र किया.

    दुनिया भर में आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ काम करने वाली संस्था फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स(FATF) ने शुक्रवार को पुलवामा अटैक की निंदा की और कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को दी जा रही आर्थिक मदद रोकने में असफल रहा. एफएटीएफ ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को दी जा रही आतंकी फंडिंग का भी जिक्र किया.

    पेरिस में एफएटीएफ के हेडक्वार्टर में हुई मीटिंग के दौरान यह बात सामने आई. इस मीटिंग में पुलवामा हमले पर चर्चा की गई जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे.

    आतंकवादी हमले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, 38-सदस्यीय संस्था ने कहा, 'आतंकियों को आर्थिक मदद दिए बिना यह नहीं हो सकता था.'

    एफएटीएफ ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक कमियों को दूर करने के लिए काम करना होगा. पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग पर नजर रखनी होगी. पाकिस्तान को आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए काम करना होगा.

    एफएटीएफ के इस बयान से साफ जाहिर है कि पाकिस्तान अभी भी ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं सकेगा. ग्रे लिस्ट में होने की वजह से पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर लोन लेने में दिक्कतें आएंगी.

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    एपएटीएफ ने कहा, 'पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग रिस्क एसेसमेंट को संशोधित किया है. लेकिन पाकिस्तान की ओर से उठाया गया यह कदम यह नहीं दिखाता कि आतंकी फंडिंग पर वह गंभीर है. क्योंकि अल कायदा, ईएसआईएस, जमात-उद-दावा, फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेश, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क और तालिबान से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ पाकिस्तान ने कोई कदम नहीं उठाया है.'

    फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पिछले साल पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया था. इससे पहले पाकिस्तान साल 2012 से 2015 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा है.


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    क्या होगा असर
    एफएटीएफ की ओर से किसी देश को ब्लैकलिस्ट करने का मतलब है कि वह देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सहयोग नहीं कर रहा है. ऐसे में अगर एफएटीएफ पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देता है तो इससे आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक, यूरोपीय संघ जैसे बहुपक्षीय कर्जदाता उसकी ग्रेडिंग कम कर सकते हैं. लिहाजा दुनियाभर के देशों की ओर से आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाएगा.

    क्या है एफएटीएफ
    G-7 देशों की पहल पर एफएटीएफ की स्थापना 1989 में हुई थी. ये एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. इस संगठन के सदस्यों की संख्या 37 है. भारत भी इस संगठन का सदस्य है. इसका मुख्य उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने में नाकाम देशों की रेटिंग तैयार करना है. एफएटीएफ ऐसे देशों की दो लिस्ट तैयार करता है. पहली लिस्ट ग्रे और दूसरी ब्लैक होती है. ग्रे लिस्ट में शामिल होने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक मदद मिलने में मुश्किल होती है. वहीं, ब्लैक लिस्ट में आने वाले देशों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है.

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    Tags: CRPF, Pakistan, Pulwama, Pulwama attack, Terrorism

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