पाकिस्तान: विपक्ष के प्रदर्शनों को सेना की मदद से कुचलेगी इमरान खान सरकार!

पाकिस्तानी मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इमरान खान विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन को कुचलने के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं (फाइल फोटो)

इमरान खान (Imran Khan) सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में विपक्ष के चलाए जा रहे मार्च और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए सेना (Army) को तैनात करने का मन बना लिया है. विपक्षी दलों ने इमरान खान पर चुनावों में धांधली करने कर सत्ता में आने का आरोप लगाया है.

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    इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) पूरी दुनिया में कश्मीर (Kashmir) में मानवाधिकारों के हनन की झूठी दुहाई देता घूम रहा है. लेकिन, पाक पीएम इमरान खान अपने ही देश में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सेना का सहारा लेने का मन बना चुके है.

    पाकिस्तानी मीडिया में सामने आई रिपोर्ट्स की मानें तो इमरान खान (Imran khan) सरकार राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में विपक्ष के विरोध मार्च को रोकने के लिए सेना का प्रयोग कर सकती है. बता दें कि पाक के विपक्षी दलों ने इमरान खान पर धोखे से सत्ता में आने का आरोप लगाया है. साथ ही इन दलों ने विरोध प्रदर्शनों का ऐलान भी किया है.

    पाकिस्तान के कई विपक्षी दल दे चुके हैं विरोध मार्च को समर्थन
    विपक्षी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के चीफ मौलाना फजल ने ऐलान किया है कि वह 31 अक्टूबर को सरकार के खिलाफ इस्लामाबाद में मार्च निकालेंगे. उनके इस मार्च को पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, एएनपी और पख्तूनख्वा मिल्ली आवाम पार्टी का समर्थन मिला हुआ है. इस मार्च को 'आजादी मार्च' (Azadi March) नाम दिया गया है. पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार विपक्षी दलों के इस मार्च से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रही है. इसके तहत सेना को इस्लामाबाद में तैनात किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है.

    सरकारी ऑफिसों और विदेशी दूतावासों की होगी खास सुरक्षा
    अखबारों में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम इमरान खान (PM Imran Khan) के आवास पर इस मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मीटिंग हुई. जिसमें इससे निपटने के तमाम विकल्पों को सुझाया गया. मीटिंग में अधिकारियों का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का लोगों को अधिकार है लेकिन किसी को इस्लामाबाद सीज करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है. इस दौरान संवेदनशील सरकारी ऑफिस और विदेशी दूतावासों (Foreign Embassies) की सुरक्षा पर भी चर्चा की गई.

    पाकिस्तान में सेना की कार्रवाई को नहीं दी जा सकती अदालत में चुनौती
    मीटिंग के दौरान यह भी कहा गया कि फजल समेत सभी विपक्षी दलों से बातचीत की जाएगी और अगर यह बातचीत असफल रही तो जरूरी प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों की सुरक्षा के लिए राजधानी में सेना की तैनाती होगी. हालांकि सेना की तैनाती पर आखिरी फैसला पाकिस्तान का गृह मंत्रालय (Home Ministry) ही लेगा.

    बता दें कि 2014 में खुद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (Pakistan Tehreek-e-Insaf) और नवंबर, 2017 में तहरीक-ए-लब्बैक के आंदोलनों को रोकने के लिए सेना की तैनाती की गई थी. पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 245 (Article-245) के मुताबिक अगर सेना नागरिक प्रशासन से सहयोग के दौरान कोई कार्रवाई करे तो इसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है.

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