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India-Pakistan Relation: आखिर क्यों पाकिस्तान 100 साल तक भारत के साथ चाहता है शांति?

India-Pakistan Relation: आखिर क्यों पाकिस्तान 100 साल तक भारत के साथ चाहता है शांति?

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (AP)

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (AP)

Pakistan National Security Policy: पाकिस्तान की पहली नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी में कहा गया है कि पाकिस्तान अपने करीबी पड़ोसियों से रिश्ते सुधारे बगैर विकास नहीं कर सकता. यही प्लान की सबसे अहम बात है. ये सही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ा विवाद कश्मीर को लेकर है, लेकिन इसको हल किए बगैर भी पाकिस्तान अब भारत से कारोबार शुरू करने की कोशिश करेगा.

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    इस्लामाबाद. हमेशा भारत पर पीछे से वार करने वाला पाकिस्तान (India-Pakistan Relation) अब हमसे शांति चाहता है. शांति एक या दो साल नहीं, बल्कि 100 सालों के लिए. दरअसल, पाकिस्तान ने अपनी पहली नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी (Pakistan National Security Policy) तैयार की है. इसके तहत पाकिस्तान भारत सहित अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने के लिए तैयार है. इसमें कहा गया है कि कश्मीर मुद्दे (Kashmir Issue) के समाधान के बिना भी नई दिल्ली के साथ व्यापार के लिए पाकिस्तान के दरवाजे खुले हैं. बशर्ते द्विपक्षीय वार्ता में प्रगति हो.

    यह पूरी पॉलिसी तो सार्वजनिक नहीं की जाएगी, लेकिन इसका कुछ हिस्सा शुक्रवार को प्रधानमंत्री इमरान खान जारी करेंगे. इस पॉलिसी में कहा गया है कि भारत के साथ अमन बहाली की कोशिश की जाएगी. हालांकि, भारत में वर्तमान मोदी सरकार के रहते अमन बहाली हो पाएगी, इसको लेकर सवालिया निशान भी लगाए गए हैं.

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    एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने मंगलवार को बताया कि नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में नजदीकी पड़ोसियों के साथ शांति और आर्थिक कूटनीति पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्रीय विषय होगा. 2022-26 के बीच की अवधि को कवर करने वाला पांच साल का नीति दस्तावेज, पाकिस्तान सरकार द्वारा देश की अपनी तरह का पहला रणनीति पत्र के रूप में तैयार किया गया दस्तावेज है, जो अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टि और दिशानिर्देशों को बताता है.

    अधिकारी के हवाले से अखबार ने कहा कि 100 पृष्ठों के इस दस्तावेज को गुप्त रखा जाएगा, जिसमें लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बिना भारत के साथ व्यापार और व्यापारिक संबंधों के लिए दरवाजा खुला छोड़ा जाएगा, बशर्ते कि दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच बातचीत में प्रगति हो. अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम अगले 100 वर्षों तक भारत के साथ दुश्मनी नहीं चाहते हैं. नई नीति तत्काल पड़ोसियों के साथ शांति चाहती है.

    हालांकि, दुनिया की इकोनॉमी से जुड़ने के लिए पाकिस्तान अपनी सुरक्षा और सियासत को नजरअंदाज नहीं कर सकता. कश्मीर हमारे लिए अहम मुद्दा था और बना रहेगा, लेकिन इसकी वजह से दोनों मुल्कों के बीच कारोबार बंद नहीं होना चाहिए. हालांकि, भारत में मोदी सरकार के रहते यह मुश्किल है.

    अधिकारी ने कहा कि अगर बातचीत और प्रगति होती है, तो भारत के साथ व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को सामान्य बनाने की संभावना होगी जैसा कि पहले हुआ था. 2016 में पठानकोट एयर फोर्स बेस पर पाकिस्तान से आए आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में दरार आ गई थी. उरी में भारतीय सेना के कैंप पर हमले ने रिश्ते को और खराब कर दिया.

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    अगस्त 2019 में भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था. पाकिस्तान ने भारत के इस कदम की प्रतिक्रिया में राजनयिक संबंधों को कमजोर कर दिया था और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित कर दिया था. उसके बाद से पाकिस्तान और भारत के बीच बातचीत लगभग ठप है.

    Tags: Imran khan, Pakistan

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