पाकिस्तान ने भारतीय सिखों के लिए खोला 500 साल पुराना गुरुद्वारा

भारत के अलावा यूरोप, कनाडा और अमेरिकी सिखों को भी बाबे-दे-बेर गुरुद्वारे में जाने की इजाजत दे दी गई है.

News18Hindi
Updated: July 2, 2019, 11:56 AM IST
पाकिस्तान ने भारतीय सिखों के लिए खोला 500 साल पुराना गुरुद्वारा
भारतीय सिख बाबे-दे-बेर गुरुद्वारे में दर्शन कर सकेंगे.
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Updated: July 2, 2019, 11:56 AM IST
पाकिस्तान ने 500 साल पुराने एक गुरुद्वारे को भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया है. पंजाब प्रांत के सियालकोट में स्थित में इस प्राचीन गुरुद्वारे में अब सिख श्रद्धालु अरदास कर सकेंगे. इससे पहले भारतीय सिख बाबे-दे-बेर गुरुद्वारे में दर्शन नहीं कर सकते थे.

भारत के अलावा यूरोप, कनाडा और अमेरिकी सिखों को भी बाबे-दे-बेर गुरुद्वारे में जाने की इजाजत दे दी गई है. पंजाब प्रांत के गवर्नर मोहम्मद सरवर ने राज्य सरकार के औकफ विभाग को भारत से आने वाले सिख श्रद्धालुओं को दर्शन करने की इजाजत के निर्देश दिए गए थे.

हर साल सिख श्रद्धालु करते हैं दर्शन

बता दे कि लाहौर से 140 किलोमीटर दूर सियालकोट शहर में स्थित इस गुरुद्वारे में गुरु नानक की जयंती और उनकी पुण्यतिथि पर देश-विदेश से भारी संख्या में सिख श्रद्धालु पहुंचते हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में ऐसे कई गुरुद्वारे हैं, जहां भारत समेत दुनिया भर से सिख श्रद्धालु हर साल दर्शन करने जाते हैं.

नत्था सिंह ने कराया था निर्माण

इस गुरुद्वारे को सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव साहिब की याद में उनके अनुयायी सरदार नत्था सिंह ने बनवाया था. बताया जाता है कि 16वीं सदी में कश्मीर यात्रा से सियालकोट लौटे गुरु नानक देव ने इसी जगह बेर के एक पेड़ के नीच विश्राम किया था. यहां उन्होंने सियालकोट के मशहूर संत हमजा गौस से मुलाकात की थी. आज भी यहां उस वक्त का विशाल बेर का पेड़ मौजूद है.

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First published: July 2, 2019, 11:54 AM IST
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