इमरान को झटका, FATF की ग्रे लिस्ट में ही रहेगा पाक, फरवरी तक 6 मापदंडों को पूरा करना होगा

FATF से पाकिस्तान को झटका
FATF से पाकिस्तान को झटका

Pakistan to Remain on FATF: जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में डाला था. उस समय पाकिस्‍तान को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 प्‍वाइंट्स की कार्य योजना को 2019 के अंत तक लागू करने का आदेश दिया गया था. हालांकि कोरोना वायरस को देखते हुए समय सीमा को बढ़ा दिया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 8:45 PM IST
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नई दिल्ली: पाकिस्तान (Pakistan) को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) से बड़ा झटका लगा है. एफएटीएफ ने शुक्रवार शाम को जारी किए गए बयान में बताया कि इमरान खान सरकार आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे को पूरा करने में नाकाम रही है. पाकिस्‍तान ने संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. एफएटीएफ ने कहा कि तय समय-सीमा में पाकिस्तान सरकार ने 27 कार्ययोजनाओं में से केवल 21 को ही पूरा किया है. एफएटीएफ ने पाकिस्‍तान से कहा कि वह फरवरी 2021 तक सभी कार्ययोजनाओं को पूरा करे.

एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्कस प्लीयर ने कहा कि पाकिस्तान को आतंक के वित्तपोषण में शामिल लोगों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और मुकदमा चलाना चाहिए. पाकिस्तान को आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने के लिए और प्रयास करने की जरूरत है. जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में डाला था. उस समय पाकिस्‍तान को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 प्‍वाइंट्स की कार्य योजना को 2019 के अंत तक लागू करने का आदेश दिया गया था. हालांकि कोरोना वायरस को देखते हुए समय सीमा को बढ़ा दिया गया था.

इन आदेशों को पूरा नहीं कर पाया पाकिस्तान
जिन जनादेशों में पाकिस्तान विफल रहा है, उनमें जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) प्रमुख अजहर, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक सीड और संगठन के ऑपरेशनल कमांडर जहूर रहमान लखवी जैसे सभी संयुक्त राष्ट्र-नामित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है. एक अधिकारी ने कहा, एफएटीएफ ने इस तथ्य पर जोर दिया है कि उसके एंटी टेररिज्म एक्ट की अनुसूची IV के तहत 7,600 की मूल सूची से 4,000 से अधिक आतंकवादियों के नाम अचानक गायब हो गए थे.
दुनिया के 4 देश नहीं है पाकिस्तान की कार्रवाई से संतुष्ट


दुनिया के 4 बड़े देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी इस्लामाबाद की अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता से संतुष्ट नहीं थे. पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट में बरकरार रखने का ये भी कारण हो सकता है.

पाकिस्तान की ओर से आतंकी संगठनों को सुरक्षित वातावरण मुहैया कराना जाना जारी: विदेश मंत्रालय
भारत ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों और मसूद अजहर तथा जकीउर रहमान लखवी जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों को सुरक्षित वातावरण मुहैया कराना जाना जारी है. विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि पाकिस्तान ने, आतंक के वित्त पोषण को रोकने के लिए 'फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स' (एफएटीएफ) द्वारा निर्देशित 27 कार्रवाई बिंदुओं में से 21 पर ही काम किया है.

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एफएटीएफ की तीन दिवसीय आनलाइन बैठक बुधवार को शुरू हुई जिसमें वह पाकिस्तान द्वारा आतंकी समूहों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की समीक्षा कर रहा है. एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान को काली सूची में डाले जाने की संभावना पर सवाल किये जाने पर श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए एफएटीएफ की अपनी प्रक्रिया और नियम हैं. श्रीवास्तव ने कहा, 'पाकिस्तान ने एफएटीएफ द्वारा सुझाई गई कार्ययोजना के कुल 27 बिंदुओं में से अभी तक केवल 21 पर ही काम किया है. छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्य किया जाना अभी बाकी है.'

उन्होंने कहा, 'सभी जानते हैं कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी संगठनों को सुरक्षित माहौल मुहैया कराया जाना जारी है. पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आतंकवादी घोषित किये गए मसूद अजहर, दाऊद इब्राहिम, जकीउर रहमान लखवी इत्यादि के विरुद्ध भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है.' जून 2018 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में डाला था. उस समय पाकिस्‍तान को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 प्‍वाइंट्स की कार्य योजना को 2019 के अंत तक लागू करने का आदेश दिया गया था. हालांकि कोरोना वायरस को देखते हुए समय सीमा को बढ़ा दिया गया था.
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