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पाक का कंगाली मिटाने का आखिरी तरीका, इस तरह से बनना चाहता है अमेरिका का चहेता

पाक का कंगाली मिटाने का आखिरी तरीका, इस तरह से बनना चाहता है अमेरिका का चहेता

पाकिस्तान ने अफगान शांति वार्ता के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं (फाइल फोटो)

पाकिस्तान ने अफगान शांति वार्ता के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं (फाइल फोटो)

पाकिस्तान (Pakistan) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) शांति वार्ता को पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास (Diplomatic Efforts) शुरू कर दिए हैं. दरअसल 9/11 की बरसी पर अफगानिस्तान में काबुल (Kabul) स्थित अमेरिकी दूतावास पर तालिबान ने हमला कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने अमेरिका-तालिबान वार्ता को रद्द कर दिया था.

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  • News18Hindi
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    इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) ने अफगानिस्तान (Afghanistan) शांति वार्ता को पटरी पर लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास (Diplomatic Efforts) शुरू कर दिए हैं. दरअसल 9/11 की बरसी पर अफगानिस्तान में काबुल (Kabul) स्थित अमेरिकी दूतावास पर तालिबान ने हमला कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने अमेरिका-तालिबान (America-Taliban) वार्ता को रद्द कर दिया था.

    अब पाकिस्तान (Pakistan) ने इस स्थिति को मौके के तौर पर भुनाने की कोशिश शुरू कर दी है. यूं तो पाकिस्तानी इस समझौता वार्ता का समर्थक नहीं है लेकिन अब अमेरिकी करीबी बनने की कोशिश में वह इस वार्ता को वापस शुरू करवाने के प्रयास शुरू कर चुका है. लेकिन इस पाकिस्तानी प्रयास के पीछे इस वजहों को जिम्मेदार माना जा रहा है-

    FATF की ग्रे लिस्ट में जाने का सता रहा है डर
    पाकिस्तान के लिए अगले ही महीने 16 से 18 अक्टूबर को पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानि FATF की बैठक होनी है. पाकिस्तान की धड़कने यह तारीख पास आते जाने के साथ ही बढ़ती जा रही हैं. दरअसल इस बैठक में अपने यहां आतंकवाद पर लगाम लगाने के पाकिस्तानी प्रयासों की समीक्षा होनी है. जिसके बाद ही पाकिस्तान को भविष्य के लोन आदि मिलने की तस्वीर साफ हो सकेगी.

    पाकिस्तान जानता है कि इस मीटिंग के दौरान ग्रे लिस्ट में जाने से बचना उसके लिए बड़ी चुनौती होने वाली है. ऐसे में अगर पाकिस्तान एक बार इस लिस्ट में चला गया तो उससे बाहर आना उसके लिए बेहद मुश्किल होगा. पाकिस्तानी पीएम इमरान इसके लिए सारी कोशिशें कर रहे हैं. सितंबर के आखिरी में वह 27 तारीख को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को भी संबोधित करने वाले हैं. माना जा रहा है कि इस दौरान पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में जाने से बचाना उनके लिए प्रमुख मुद्दा होगा. साथ ही वे इस दौरान दुनियाभर के 20 नेताओं से मुलाकात करेंगे और ग्रे लिस्ट में जाने से पाक को बचाने के लिए उनसे समर्थन की गुजारिश करेंगे.

    शांति वार्ता बहाली के लिए भी पाकिस्तान ने तेज किए प्रयास
    अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच रद्द हो चुकी शांति वार्ता की बहाली में पाकिस्तानी डिप्लोमेंट्स का सक्रिय होना भी इसी रणनीति का हिस्सा है. काबुल में हुए हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कैंप डेविड में तालिबान के शीर्ष नेताओं के साथ होने वाली गुप्त बातचीत को रद्द कर दिया था. इस बैठक में अफगानिस्तानी राष्ट्रपति अशरफ गनी भी मौजूद होते, साथ ही दोनों के पास समझौतों का ड्राफ्ट भी पहुंच चुका था.

    वार्ता हुई रद्द तो अफगानिस्तान में हो सकता है गृह युद्ध
    पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अफगानिस्तान में यह जंग 18 सालों से चल रही है. इसका समाधान करने के लिए बातचीत जरूरी है लेकिन बातचीत रुकने से एक बार फिर से अफगानिस्तान में गृह युद्द का खतरा मंडरा सकता है. समझौते के तहत अफगानिस्तान में अमेरिका के 14 हजार सैनिक हैं, जिनमें से 20 हफ्तों के भीतर 5,400 सैनिकों को वापस बुलाया जाना था.

    हालांकि अमेरिकी रुचि भी इस बातचीत को आगे बढ़ाने में ही दिख रही है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Adviser) जॉन बोल्टन को बाहर का रास्ता दिखाने को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कहा जा रहा है. दरअसल वे शुरू से ही इस शांति वार्ता के खिलाफ थे.

    जो बिडेन ने भी डाला था दबाव
    अमेरिका में 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन ने भी अमेरिका को आतंक के खिलाफ पाक की मदद लेने की सलाह दी थी. उन्होंने कहा था कि इस तरह से अमेरिका खुद को अफगानिस्तान में आतंकवाद का शिकार बनने से रोक सकता है.

    पाक ने भी उम्मीद जाहिर की है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव घटने की आशा है. जानकार कह रहे हैं कि अगर पाकिस्तान प्रयासों में सफल रहा तो वह 'शांतिदूत' की छवि पेश करना चाहेगा. और इसके सामने उसकी खुद की आतंकवाद (Terrorism) से पीड़ित वाली छवि कमजोर पड़ जाएगी. ऐसे में वह ग्रे लिस्ट में जाने से बच सकता है.

    इमरान खान ने भी शुरू कर दिया है माहौल तैयार करना
    पाक पीएम इमरान खान ने भी इससे पहले माहौल बनाना शुरू कर दिया है. हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि भारत उसके सात बातचीत इसीलिए नहीं शुरू कर रहा क्योंकि वह उसे FATF की ब्लैकलिस्ट में शामिल कराना चाहता है.

    बता दें कि एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रखा था. पाकिस्तान को आतंक के खिलाफ कार्रवाई के लिए 27 सूत्रीय ऐक्शन प्लान सौंपा गया था. इसके लिए उसे 15 महीने का समय दिया गया था. इसी के जरिए उसके प्रदर्शन की समीक्षा होनी है.

    यह भी पढ़ें: कश्‍मीर मामले पर ब्रिटिश सांसद का भारत को समर्थन, बोले- पहले PoK खाली करे पाक

    Tags: Afghanistan, America, Army, Donald Trump, Imran khan, Kabul, Pakistan, United States (US)

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