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पाकिस्तान पर मंडरा रहा है खाने का संकट, बाढ़ में फसलें हुईं बर्बाद

इस बारिश ने हमारा सबकुछ तबाह कर दिया हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं

इस बारिश ने हमारा सबकुछ तबाह कर दिया हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं

अर्ज़ मोहम्मद (Arz Mohammed) ने दक्षिणी पाकिस्तान (south pakistan) में स्थित अपनी थोड़ी सी ज़मीन (Land) पर कपास (Cotton ...अधिक पढ़ें

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खैरपुर: हर साल की तरह अर्ज़ मोहम्मद (Arz Mohammed) ने दक्षिणी पाकिस्तान (south pakistan) में स्थित अपनी थोड़ी सी ज़मीन (Land) पर कपास (Cotton) की बुआई की थी. अगर फसल (Crop) तैयार होती और उसकी कटाई होती तो इससे होने वाली कमाई उनके पांच लोगों के परिवार के लिए पर्याप्त होती, लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया. पाकिस्तान में मूसलाधार बारिश के बाद जून में आई बाढ़ ने मोहम्मद का घर ढहा दिया और उनकी चार एकड़ जमीन पर फैली कपास की फसल को भी नष्ट कर दिया जिससे परिवार की कमाई का जरिया ही खत्म हो गया.

इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह बात है कि उनके और उनके पड़ोसियों के खेत बारिश रूकने के करीब तीन महीने बाद, अब भी पानी में डूबे हुए हैं. दक्षिणी पाकिस्तान में कई किसानों की ही तरह मोहम्मद भी शायद वक्त पर गेहूं की अगली फसल की बुआई नहीं कर पाएंगे. ये हालात देश में खाद्यान्न संकट गहराने का संकेत देते हैं. मोहम्मद ने कहा, “ इस बारिश ने हमारा सबकुछ तबाह कर दिया. हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं हैं.” वह सिंध प्रांत के खैरपुर में अपने टूटे हुए घर के पास अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक तंबू में रह रहे हैं. खैरपुर, मुल्क में सैलाब से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक हैं. किसान और अधिकारियों ने चेताया कि पाकिस्तान में उस वक्त खाद्यान्न की गंभीर कमी हो सकती है जब सरकार पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रही है और दुनिया भर में महंगाई हैं.

15 फीसदी चावल और 40 प्रतिशत कपास की फसल तबाह हो गई हैं

अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान की करीब 15 फीसदी चावल और 40 प्रतिशत कपास की फसल तबाह हो गई हैं. बाढ़ ने निजी खाद्यान्न स्टोर को भी नष्ट कर दिया हैं. किसान परिवार खाद्यान्न के लिए इस पर ही निर्भर रहते हैं. बाढ़ का कारण जलवायु परिवर्तन को बताया जा रहा हैं. सैलाब की वजह से 1600 लोगों की मौत हो चुकी है तथा 20 लाख घरों को नुकसान पहुंचा हैं. पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अमेरिकी समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटिड प्रेस’ (एपी) से कहा था, “ हमें अपने लोगों को जीविका देने के लिए कोष की जरूरत हैं हमें हमारे लोगों को, किसानों को हुए फसल के नुकसान के वास्ते मुआवज़ा देने के लिए कोष की जरूरत हैं”

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प्रांत में करीब 50 फीसदी खेत पानी में डूबे हुए हैं

सरकार का कहना है कि फिलहाल खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर तत्काल चिंता करने की जरूरत नहीं हैं. एपी को भेजे बयान में राज्य आपदा एजेंसी ने कहा कि गेहूं का पर्याप्त भंडारण हैं जो फसल की अगली कटाई तक चल सकेगा तथा सरकार गेहूं का आयात करेगी. बहरहाल, गेहूं की अगली फसल को लेकर अनिश्चितता हैं आमतौर पर अक्टूबर में बुआई शुरू होती हैं. देश में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन करने वाले पंजाब प्रांत में बाढ़ से कम नुकसान हुआ और वहां वक्त पर बुआई की जा सकती हैं मगर सिंध प्रांत के सिंचाई मंत्री जाम खान शोरो ने कहा कि प्रांत में करीब 50 फीसदी खेत पानी में डूबे हुए हैं.

अब हमें गेहूं और अन्य खाद्य सामग्री का आयात करना होगा

खैरपुर में 400 एकड़ जमीन के मालिक अल्ताफ हुसैन कहते हैं कि वह आम तौर पर दोस्तों और रिश्तेदारों को बतौर तोहफा गेहूं देते थे, लेकिन इस बार उन्हें अपने परिवार को पर्याप्त तौर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की चिंता सता रही हैं उनकी 400 एकड़ ज़मीन अब भी पानी में डूबी हुई हैं. पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने एपी से कहा, “ अब हमें गेहूं और अन्य खाद्य सामग्री का आयात करना होगा.” वरिष्ठ अर्थशास्त्री अशफाक अहमद ने कहा कि अगले महीने तक और गेहूं आयात करने की जरूरत है, अन्यथा दिसंबर में खाद्यान्न संकट होने की आशंका हैं. सिंध के अलावा बलूचिस्तान जिले के दूर दराज़ के दश्त जिले में अंगूर, सेब और अन्य फलों की फसलें बर्बाद हुई हैं जिससे किसान परेशान हैं.

Tags: Farmers, Food, Pakistan

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