पाकिस्तान चुनाव 2018ः भारत पर पड़ेगा कैसा असर?

पाकिस्तान में बनने वाली हर सरकार अलग- अलग तरह से भारत को व उसकी विदेश नीति को प्रभावित करेगी.

News18.com
Updated: June 12, 2018, 2:28 PM IST
पाकिस्तान चुनाव 2018ः भारत पर पड़ेगा कैसा असर?
बिलावल भुट्टो और इमरान खान (फाइल फोटो)
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Updated: June 12, 2018, 2:28 PM IST
(सुहास मुंशी)

पाकिस्तान में अगले महीने 25 जुलाई को संसदीय चुनाव होने वाले हैं. पूरी दुनिया की निगाहें पाकिस्तान पर लगी हुई हैं कि कौन सी पार्टी जीतेगी? भारत के लिए ये चुनाव खास महत्त्व रखता है क्योंकि पाकिस्तान में बनने वाली हर सरकार अलग- अलग तरह से भारत को व उसकी विदेश नीति को प्रभावित करेगी.

पाकिस्तान की संसद में कुल 342 सीटें हैं, जिस भी पार्टी को 172 सीटें मिलेंगी वो सरकार बनाएगी और अगर किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो वो छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करके सरकार बना सकती है. पिछली बार नवाज़ शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन को पूर्ण बहुमत से 6 सीटें कम मिली थीं तो 19 निर्दलीय उम्मीदवारों की मदद से नवाज़ शरीफ ने सरकार बनाई था.

अगले साल भारत में भी संसदीय चुनाव होने हैं. ऐसे में भारत की भी नज़रें पूरी तरह से लगी हुई हैं कि पाकिस्तान में किसकी सरकार बनेगी क्योंकि भारत उसी हिसाब से अपनी रणनीति बना पाएगा.

कौन-कौन है मैदान में इस बार-
'गैलप पोल' के अनुसार इस बार भी नवाज़ शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के जीतने की काफी संभावनाएं हैं. इस पोल में पीएमएल-एन की अप्रूवल रेटिंग 38 प्रतिशत है जबकि इसके विरोधियों को 13 फीसदी अप्रूवर रेटिंग मिली है. हालांकि पनामा पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में उन पर चुनाव जीतकर हासिल होने वाले किसी भी सरकारी पद या पार्टी में कोई पद धारण करने पर रोक लगा दी गई थी. लेकिन फिर भी वो अभी पार्टी का चेहरा हैं और चुनावों के लिए प्रचार कर रहे हैं, पार्टी की कमान इस समय उनके भाई शाहबाज़ शरीफ ने संभाल रखी है.

दूसरी सबसे बड़ी पार्टी जो पीएमएम-एन को टक्कर दे सकती है वो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कैप्टन और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान की पार्टी है. 2013 के चुनावों में उनका वोट प्रतिशत नवाज़ शरीफ की पार्टी के बाद सबसे ज़्यादा था और दिनों-दिन उनकी पार्टी की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है.

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तीसरी सबसे बड़ी पार्टी 'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' यानि 'पीपीपी' है. इसकी बागडोर अब बिलावह भुट्टो ज़रदारी के हाथों में है. बिलावल भुट्टो पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो व आसिफ अली ज़रदारी के बेटे हैं. ये पाकिस्तान में संभवतः एकमात्र ऐसी मेनस्ट्रीम वाली पार्टी है जिसका झुकाव लेफ्ट विचारधारा की ओर है.

इन बड़ी पार्टियों के अलावा पाकिस्तान के पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज़ मुशर्ऱफ, लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज़ सईद की पार्टी 'अल्लाह-हू-अकबर तहरीक' (एएटी) भी मैदान में होगी.

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इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा से लड़ने वाली निर्दलीय उम्मीदवार नूर जहां भी चर्चा का विषय होंगी. दरअसल ये तब चर्चा में आ गई थीं जब एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने एक स्टोरी कवर करके बताया था कि वो हिन्दुस्तानी एक्टर शाहरुख खान की दूर की चचेरी बहिन हैं.

कश्मीर मुद्दा-
तुलनात्मक रूप से नवाज़ शरीफ की पार्टी को लिबरल माना जाता है. अगर पीएमएल-एन की सरकार बनती है तो निवर्तमान बीजेपी सरकार को अपनी विदेश नीति में बड़े बदलाव नहीं करने पड़ेंगे.

इसके उलट इमरान खान कश्मीर मुद्दे को लेकर हमेशा कट्टर रुख अपनाते रहे हैं. अपने कई चुनाव प्रचार के दौरान वो कहते रहे हैं कि अगर उनकी सरकार बनती है तो कश्मीर मुद्दे को वो पूरी तरह से हल कर देंगे और 'कश्मीर में भारत के एग्रेशन' के खिलाफ हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आवाज़ उठाएंगे. वो अफगानिस्तान में भारत की पहुंच को भी उसकी दखलंदाजी बताकर विरोध करते रहे हैं.

इसी तरह से बिलावल भुट्टो का भी रुख कश्मीर मुद्दे पर हमेशा कड़ा रहा है और कश्मीर मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने को लेकर वो नवाज़ शरीफ की निंदा करते रहे हैं. बिलावल भुट्टो मोदी-शरीफ के गठजो़ड़ की भी निंदा करते रहे हैं. इमरान खान से एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने लोगों से वादा किया कि वो कश्मीर का एक इंच नहीं छोड़ेंगे और इसे पूरी तरह से वापस ले लेंगे क्योंकि ये दूसरे प्रांतों की तरह ही पाकिस्तान का है.

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