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इमरान खान की बढ़ी मुश्किल, FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, आतंकियों के खिलाफ एक्शन न लेने की सजा

इमरान खान की बढ़ी मुश्किल, FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा पाकिस्तान, आतंकियों के खिलाफ एक्शन न लेने की सजा

पाकिस्तान की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं (Photo- AP)

पाकिस्तान की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं (Photo- AP)

FATF List: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने इस्लामाबाद को हाफिज सईद और मसूद अजहर सहित संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की लिस्ट में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज करने को कहा था. पाकिस्तान को जून 2018 से ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका है.

    इस्लामाबाद. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Pakistan PM Imran Khan) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. आतंकियों के खिलाफ एक्शन नहीं लेने के कारण पाकिस्तान को फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के ग्रे लिस्ट (FATF Grey List) में ही रखा गया है. पाकिस्तान ने एक्शन प्लान के 34 में से 4 बिंदुओं पर कदम नहीं उठाए हैं. पाकिस्तान के अलावा उसका समर्थक मित्र तुर्की भी FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया है. कश्मीर पर प्रोपेगेंडा में तुर्की लगातार पाकिस्तान का साथ देता रहा है.

    एफएटीएफ का तीन दिवसीय सत्र 19 से 21 अक्टूबर तक आयोजित किया गया जिसमें पाकिस्तान को एक बार फिर से ग्रे लिस्ट में ही रखा गया है. पाकिस्तान अब अप्रैल 2022 में होने वाली एफएटीएफ की अगली बैठक तक ग्रे लिस्ट में बना रहेगा.

    इस साल में जून के सत्र में FATF ने पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में विफल पाए जाने के बाद ‘ग्रे लिस्ट’ में बरकरार रखा था. संस्था ने इस्लामाबाद को हाफिज सईद और मसूद अजहर सहित संयुक्त राष्ट्र की आतंकियों की लिस्ट में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज करने को कहा था. पाकिस्तान को जून 2018 से ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका है.

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    ग्रे लिस्ट में होने के नुकसान
    ग्रे लिस्ट में बरकरार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना उसके लिए कठिन हो जाएगा. उस पर कई तरह की कठोर शर्तें होंगी. पाकिस्तान अब तक चीन, तुर्की और मलेशिया की मदद से ब्लैक लिस्ट में आने से बचता रहा है.

    पाकिस्तान को लगातार उसके सहयोगी देश आतंकवाद पर कार्रवाई करने की नसीहत देते रहे हैं. इससे पहले जून में एफएटीएफ की ग्रे सूची में शामिल किए जाने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान से अपील की थी कि वह आतंकवाद के मनी लॉन्ड्रिंग की जांच और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संगठनों के सरगना और कमांडरों के खिलाफ मुकदमा चलाकर एफएटीएफ की 27 सूत्री कार्य योजना ‘‘तेजी से पूरा’’ करे.

    2018 से एफएटीएफ की सूची से बाहर नहीं आ सका है पाकिस्तान
    एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में डाला था और अक्टूबर 2019 तक पूरा करने के लिए एक कार्य योजना दी थी. तब से देश एफएटीएफ के आदेशों का पालन करने में विफल रहने के कारण इस सूची में बना हुआ है.

    एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी निकाय है, जिसकी स्थापना 1989 में धन शोधन, आतंकवादी वित्तपोषण और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिए उत्पन्न अन्य संबंधित खतरों से निपटने के लिए की गई थी.

    Tags: Hafiz Saeed, Imran khan, Masood Azhar, Pakistan, Terrorists

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