PAK में 22 हिंदू परिवारों के घर ढहाए, इमरान सरकार ने कहा- कानूनी कार्रवाई है

PAK में 22 हिंदू परिवारों के घर ढहाए, इमरान सरकार ने कहा- कानूनी कार्रवाई है
पाकिस्तान में हिंदू परिवारों के घर तोड़े गए

अब पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में याज़मान इलाके में स्थानीय प्रशासन ने बीती 20 मई को हिंदू (Hindu in Pakistan) समुदाय के 22 घरों को ढहा दिया. पाकिस्तान में पेश आई इस घटना पर भारत ने भी कड़ा ऐतराज जाहिर किया है.

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  • Last Updated: June 10, 2020, 11:28 AM IST
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इस्लामाबाद. इमरान सरकार (Imran Khan) पाकिस्तान (Pakistan) में लगातार हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने में असफल साबित हो रही है. पाकिस्तान की केंद्रीय कैबिनेट में 5 मई, 2020 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की गई थी. ऐसा कहा जा रहा था कि इस आयोग की स्थापना धार्मिक अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के लिए की गई है. अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में याज़मान इलाके में स्थानीय प्रशासन ने बीती 20 मई को हिंदू (Hindu in Pakistan) समुदाय के 22 घरों को ढहा दिया. पाकिस्तान में पेश आई इस घटना पर भारत ने भी कड़ा ऐतराज जाहिर किया है.

बता दें कि भारत सरकार और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के कड़ा ऐतराज जताने के बाद इमरान सरकार और पंजाब प्रशासन ने इसे 'अतिक्रमण-विरोधी गतिविधि' बताया है. हालांकि बेघर हुए परिवारों का आरोप है कि उनके खिलाफ कार्रवाई धर्म के आधार पर की गई है क्योंकि इलाके में सिर्फ हिंदू परिवारों के ही घरों को तोड़ा गया है. पाकिस्तान के मानवाधिकर आयोग का आरोप है कि शुरूआती जांच में सामने आया है कि हिंदू समुदाय को धर्म के आधार पर ही निशाना बनाया गया है. मानवाधिकार आयोग के स्थानीय संयोजक फ़ैसल मेहमूद ने बीबीसी को बताया है कि हिंदू कॉलोनी को ढहाया गया है जहां पर 70 घर थे. मेहमूद उस फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग मिशन का नेतृत्व कर रहे थे जो यज़मान के नज़दीक चक 52/डीबी गांव में इस मामले की जांच कर रही थी.

सभी हिंदू परिवार हैं दिहाड़ी मजदूर
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 15 एकड़ के इस इलाक़े जिन हिंदू परिवारों के घर तोड़े गए हैं वे सभी खेतों में या दिहाड़ी मज़दूर के रूप में काम करते हैं. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने इस जमीन को खरीदने की अर्जी भी दी थी लेकिन उनकी नहीं सुनी गई. मिली जानकरी के मुताबिक साल 2018 में पाकिस्तान राजस्व बोर्ड ने उन्हें इस ज़मीन पर घर बनाने की अनुमति दे दी थी. लोगों का आरोप है कि स्थानीय नेता मुहम्मद बूटा इस ज़मीन को खरीदना चाहते हैं और उनके इशारे पर ही ये सब हुआ है. मानवाधिकार आयोग के फ़ैसल मेहमूद का कहना है कि उनके पास मज़बूत आधार है कि मुहम्मद बूटा ने अपने राजनीतिक संबंधों के बल पर हिंदू समुदाय को ज़मीन बेचने के लिए डराया-धमकाया, जो समुदाय को सरकार ने दी थी.
धर्मांतरण के शिकार हैं हिंदू


बता दें कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का ये पहला केस नहीं है. सिंध में हिन्दू,पंजाब में ईसाई और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह का कैलाश समुदाय, जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत पिछले कई सालों से करते आ रहा है. ह्यूमन राइट्स कमीशन समेत मनावाधिकार के दूसरे संगठन भी इन शिकायतों की पुष्टि करते हैं. ह्यूमन राइट्स कमीशन की धर्म या मान्यताओं की आज़ादी के बारे में 2018 की एक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार हर साल अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध रखने वाली लगभग एक हज़ार लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें अधिकतर लड़कियों की उम्र 18 साल से कम होती है.

 

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