पाकिस्तान को भारत या Blacklist का डर ? आतंकवाद रोधी कानून में किया बदलाव

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (फाइल फोटो)

आतंकवादी संगठनों को फंडिंग मुहैया कराने वाला पाकिस्तान लंबे समय से FATF की ग्रे लिस्ट में है और माना जा रहा है कि अगली बैठक में वह ब्लैक लिस्ट (Blacklist) किया जाएगा.

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    इस्लामाबाद. आतंकवादियों को शय देने वाले पाकिस्तान (Pakistan) ने आर्थिक कार्रवाई कार्यबल (FATF) के दबाव के चलते आतंक रोधी कानून में संशोधन किया है. इस दौरान पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा, 'सीनेट ने दो विधेयकों को पारित करके भारत के मंसूबों पर पानी फेर द‍िया है, जो चाहता है कि पाकिस्‍तान एफएटीएफ की ओर से ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया जाए.' उन्‍होंने कहा कि हम पाकिस्‍तान को ग्रे लिस्‍ट से हटाए जाने का प्रयास कर रहे हैं. इससे पहले संसदीय मामलों पर प्रधानमंत्री के सलाहकार बाबर अवान ने आतंकवाद रोधी (संशोधन) विधेयक 2020 और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (संशोधन) विधेयक 2020 को सदन के पटल पर रखा.

    आतंकवादी संगठनों को फंडिंग मुहैया कराने वाला पाकिस्तान लंबे समय से FATF की ग्रे लिस्ट में है और माना जा रहा है कि अगली बैठक में वह ब्लैक लिस्ट किया जाएगा. इस डर से पाकिस्तान कानून में बदलाव को मजबूर हुआ है. पाकिस्तान के आतंक रोधी कानून 1997 में यूनाइटेड नेशंस सिक्यॉरिटी काउंसिल रेजूलूशन 1267 और 1373 को लागू करने के उचित प्रावधान नहीं थे. UNSCRs 126 और 1373 के मुताबिक सदस्य देशों को प्रतिबंधित सूची में शामिल संस्थाओं और व्यक्तियों की संपत्ति की जब्त करना होता है और यात्रा पर प्रतिबंध भी लगाना होता है. इसके अलावा आतंकी संगठनों की फंडिग रोकने के उपाय करने होते हैं. पाकिस्तान में मामूली जुर्माने का ही प्रावधान था. संपत्ति जब्त करने का प्रवाधन नहीं था.

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    पाकिस्तान पर था वैश्विक दबाव
    गौरतलब है कि पाकिस्तान पर लंबे समय से आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का वैश्विक दबाव है. उस पर एफएटीएफ की काली सूची में डाले जाने की तलवार लटक रही है. कई बार उसे उसके सदाबहार दोस्त चीन ने बचा लिया है. एंटी मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर टेरेरिज्म फाइनेंसिंग पॉलिसीज पर नजर रखने वाली पेरिस बेस्ड निगरानी संस्था एफएटीएफ पाकिस्तान के प्रदर्शन पर जून में फिर विचार करने वाली थी, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इसे टाल दिया गया है. जून 2018 से ही एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर कड़ी नजर रखी है. यदि पाकिस्तान एक्शन प्लान पर संतोषजनक काम नहीं करता है तो एफएटीएफ सदस्य इसके खिलाफ वोट करके अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से दूर कर सकते हैं.

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