इमरान की और बढ़ी मुसीबत, FATF की ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा पाकिस्तान

इमरान खान (फाइल फोटो)

इमरान खान (फाइल फोटो)

बैठक के बाद जारी बयान में FATF ने कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) ने आतंकवाद के खिलाफ एजेंडे को पूरा करने में विफल रहा है. बता दें कि पाकिस्तान की आर्थिक हालात अभी बेहद खराब है और उसे चीन से लेकर दुनिया के कई संस्थाओं से लोन लेना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 6:31 AM IST
  • Share this:
पेरिस/इस्लामाबाद. फाइनेंशिल ऐक्शन टॉस्क फोर्स (FATF) की पेरिस में हुई आज हुई ऑनलाइन बैठक बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट (Grey List) में रखे जाने का फैसला किया गया है. बैठक के बाद जारी बयान में FATF ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ एजेंडे को पूरा करने में विफल रहा है. बता दें कि पाकिस्तान की आर्थिक हालात अभी बेहद खराब है और उसे चीन से लेकर दुनिया के कई संस्थाओं से लोन लेना पड़ रहा है.

FATF ने जारी बयान में कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ 37 सूत्रीय एजेंडे को तीन साल में पूरा करने में पूरी तरह असफल रहा है. बयान में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा प्रतिबंधित घोषित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है.

जून 2021 तक का दिया वक्त
FATF ने कहा कि पाकिस्तान आज तक 27 एक्शन प्लान में से एक पर भी ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है. सभी एक्शन प्लान की समयसीमा खत्म हो चुकी है, ऐसे में FATF पाकिस्तान से आग्रह कर रहा है कि वह जून 2021 के पहले सभी एक्शन प्लान पर कार्रवाई करे. FATF ने कहा कि पाकिस्तान को 1267 और 1373 वैश्विक आतंकियों के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई करनी चाहिए.
पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने का मतलब है कि उसे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिल पाएगी. इसीलिए माना जा रहा है आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान ही हालत और भी ज्यादा बुरी होने वाली है. इससे पहले पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने रिपोर्ट की थी ग्रे लिस्ट में बनाए रखने की विशेष संस्तुति फ्रांस की तरफ से भी की गई थी.



गौरतलब है कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में जून 2018 से बना हुआ है. आतंक के खिलाफ कार्रवाई न करने के कारण उसके ब्लैकलिस्टेड होने का डर लगातार बना हुआ है.

क्या है ब्लैक लिस्ट?
एफएटीएफ दो लिस्ट में चिंताजनक हालात वाले देशों को शामिल करती है. इनमें से एक ब्लैकलिस्ट है. आतंकवाद को वित्तीय तौर पर बढ़ावा देने वाले देशों को इस लिस्ट में तब रखा जाता है, जब उनका असहयोगात्मक रवैया जारी रहता है. मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को लगातार काबू न कर पाने के चलते इन देशों को टैक्स चोरी का स्वर्ग भी करार दिया जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज