अफगानिस्तान में आतंक फैलाने की तैयारी में पाक, टेरर ग्रुप्स को भेजा काबुल

अफगानिस्तान में आतंक फैलाने की तैयारी में पाक, टेरर ग्रुप्स को भेजा काबुल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान

यह खुलासा तब हुआ जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के प्रतिबंधों की निगरानी टीम ने 6,000-6,500 विदेशी लड़ाकों पर छानबीन शुरू की.

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इस्लामाबाद. आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Tayyiba) और जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) अफगानिस्तान (Afghanishtan) में अपना विस्तार कर रहे हैं. काबुल (Kabul) में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान (Pakistan) की तैयार की गई रणनीति के रूप में यह कदम उठाए जा रहे हैं. आतंकी संगठनों और पाकिस्तान के कदम से ऐसा लगा रहा है कि ये अमेरिका-तालिबान की शांति प्रक्रिया से बेपरवाह है.

पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI, लश्कर और जैश के आतंकवादियों को इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत में घुसपैठ करा रही है, जो अफगान सुरक्षा बलों के प्रमुख अब्दुल्ला ओरकजई उर्फ​असलम फारूकी और उनके शीर्ष कमांडरों की गिरफ्तारी के बाद सवालों के घेरे में है.

फारूकी को मौलवी मोहम्मद की जगह आईएसकेपी के नए प्रमुख बनाया गया है. काबुल में आतंकवाद विरोधी अधिकारियों ने कहा कि मौलवी मोहम्मद के लश्कर-ए-तैयबा से भी गहरे संबंध हैं.



तालिबान के शैडो गवर्नर की बैठक में आईएसआई के अधिकारी भी मौजूद



पाकिस्तान के रावलपिंडी में तैयार ब्लूप्रिंट पर दिल्ली में एक काउंटर-टेरर ऑफिसर ने कहा कि आईएसआई अधिकारियों ने अपने ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए फाइनेंसियल और लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क बनाया है. हाल ही में लश्कर और तालिबान गुटों के साथ कुनार प्रांत अहमदुल्ला में तालिबान के शैडो गवर्नर द्वारा बुलाई गई बैठक में आईएसआई के अधिकारी भी मौजूद थे.

यह खुलासा तब हुआ जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के प्रतिबंधों की निगरानी टीम ने 6,000-6,500 विदेशी लड़ाकों पर छानबीन शुरू की. इन्हें अफगानिस्तान में शामिल किया गया था. यूएनएससी की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि लश्कर-ए-तैय्यबा के साथ मोहनंद दरगाह, दुर बाबा और नंगरहार प्रांत के शेरज़ाद जिले और जैश-ए-मोहम्मद के 800 लड़ाके थे. लश्कर के पास 200 और 220 लड़ाके जैश के साथ थे. वहीं 30 अन्य कुनार प्रांत में पाए गए.

काबुल में सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि लश्कर और जैश के आतंकवादियों को अफगानिस्तान की ओर भेजने पर ISI ने 29 फरवरी को तालिबान और संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि अफ़गानिस्तान सुलह ज़ाल्मे ख़लीलज़ाद के बीच समझौते के बाद जोर  दिया.

जैश के आतंकवादियों और तालिबान के साथ ISI की जॉइंट बैकअप प्लान
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार काबुल में एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि 'लश्कर की घुसपैठ, जैश के आतंकवादियों और तालिबान के साथ ISI की जॉइंट बैकअप प्लान है. वे दोनों अफगानिस्तान में शांति के लिए काम करने का दावा करते हुए और अपनी योजना पर काम करते रह सकते हैं.'

आतंकी गुटों ने जमीन पर धावा बोल दिया है. अधिकारियों ने कहा कि दो समूह डुरंड लाइन के सीमावर्ती जिलों कुंअर, नूरिस्तान और नंगरहार प्रांतों में अभियान चला रहे हैं.

भेजे गए लश्कर समूहों ने अफगान शहरों में हमले किए हैं और तालिबान के साथ उसकी हक्कानी नेटवर्क और अलकायदा के कोऑर्डिनेशन से में अफगान राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा बलों की सीमा सुरक्षा चौकियों पर घात लगाकर हमला किया है.

एक सूत्र ने बताया उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास जारी है. मई के अंतिम हफ्ते में 30 लश्कर कैडरों का एक समूह कुनार प्रांत के डांगम जिले में भेजा गया था.

उनका नेतृत्व पूर्व आईएसआई अधिकारी बिलाल उर्फ ​जरकवी ने किया था जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुजफ्फराबाद के साथ-साथ जलालाबाद अभियानों के लिए एक प्रमुख आतंकी ट्रेनिंग सेंटर का प्रभारी था.
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