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FATF की ग्रे लिस्ट में बना रह सकता है पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया ने किया समर्थन

News18Hindi
Updated: February 18, 2020, 10:43 PM IST
FATF की ग्रे लिस्ट में बना रह सकता है पाकिस्तान, तुर्की और मलेशिया ने किया समर्थन
पाकिस्तान को एफएटीएफ ने ब्लैक लिस्ट नहीं किया है वह फिलहाल ग्रे लिस्ट में ही बना रहेगा. (File Photo)

सूत्रों के प्राप्त जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान (Pakistan) को तुर्की ((Turkey) और मलेशिया (Malaysia) का समर्थन मिल गया था जिसके चलते उसे ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया गया.

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  • Last Updated: February 18, 2020, 10:43 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) की ग्रे लिस्ट में बना रहेगा. सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान को तुर्की (Turkey) और मलेशिया (Malaysia) का समर्थन मिल गया था जिसके चलते उसे ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया गया. सूत्रों के अनुसार इस संबंध में अंतिम निर्णय 21 फरवरी को लिया जाएगा

वैश्विक आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाले निकाय एफएटीएफ के एक उप-समूह ने मंगलवार को सिफारिश की कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर काबू पाने में नाकामी के कारण पाकिस्तान को संदिग्ध सूची (ग्रे लिस्ट) में ही रखा जाए. यह निर्णय एफएटीएफ के अंतरराष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (आईसीआरजी) की बैठक में लिया गया. एक सूत्र ने कहा, 'एफएटीएफ के उप-समूह आईसीआरजी की बैठक ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में ही बनाए रखने की सिफारिश की है. इस संबंध में अंतिम फैसला शुक्रवार को किया जाएगा जब एफएटीएफ पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर गौर करेगा.'

एफएटीएफ (FATF) के इस कदम से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (PM Imran Khan) ने सोमवार को कहा कि उनके देश में ‘अब’ आतंकवादी संगठनों के लिए कोई ‘सुरक्षित पनाहगाह’ नहीं है. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से माना कि शायद पिछली सरकारों में ऐसा नहीं था. देश में अफगान शरणार्थियों की मेजबानी के 40 साल पूरे होने पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में शांति चाहता है और युद्ध प्रभावित इस देश में स्थायित्व उसके हित में है.

कई देश पाकिस्तान पर लगाते हैं ये आरोप



अमेरिका (America), भारत (India) और अफगानिस्तान (Afghanistan) लंबे समय से पाकिस्तान पर तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप लगाते रहे हैं. खान ने सम्मेलन में कहा, "मैं आपको बता सकता हूं कि यहां कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं हैं. अतीत में संभवत: जो भी स्थिति रही हो, लेकिन, फिलहाल मैं आपको बता सकता हूं..... एक ऐसी चीज है जो हम चाहते हैं, वह है अफगानिस्तान में शांति."

 

 

'कई आतंकी समूहों को अभी भी समर्थकों से मिल रहा है पैसा'
वहीं एफएटीएफ ने सोमवार को कहा था कि संस्था द्वारा आतंक के वित्त पोषण पर सख्ती के बावजूद गैरकानूनी गतिविधियों और दुनिया भर में समर्थकों से जुटाए गए धन से कई आतंकवादी समूहों को अभी भी फायदा मिल रहा है.

एफएटीएफ की बैठक पाकिस्तान में आतंकवाद-निरोधी एक अदालत द्वारा 2008 के मुंबई हमले के सरगना और लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद को आतंकी वित्तपोषण के दो मामलों में 11 साल की सजा सुनाए जाने के एक सप्ताह बाद हो रही है. जाहिर तौर पर पाकिस्तानी अदालत का फैसला एफएटीएफ और पश्चिमी देशों को खुश करने के लिए है ताकि देश 'ग्रे लिस्ट' से बाहर निकल सके. भारत ने एफएटीएफ से पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

इस बारे में भारत का कहना है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा (Laskhar-e-Taiba), जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) और हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) जैसे आतंकवादी समूहों को नियमित रूप से समर्थन प्रदान करता है, जिनका मुख्य निशाना भारत है. भारत ने एफएटीएफ से इस्लामाबाद (Islamabad) के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है.

 

पाकिस्तान पर साधा निशाना
पाकिस्तान का नाम लिए बिना एफएटीएफ ने एक बयान में कहा कि आतंकवादी धन पाने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, इसमें नए अनुयायियों की पहचान के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल और उनसे धन की मांग शामिल है.

पाकिस्तान ने हाल ही में एफएटीएफ को सूचित किया था कि जैश का संस्थापक मसूद अजहर और उसका परिवार "लापता" है. उसने दावा किया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों में से सिर्फ 16 पाकिस्तान में थे और उनमें सात मर चुके हैं. पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने और व्हाइट लिस्ट में शामिल होने के लिए 39 में से 12 वोट चाहिए. ब्लैक लिस्ट से बचने के लिए उसे तीन देशों के समर्थन की जरूरत है. पिछले महीने बीजिंग में एफएटीएफ की हुयी बैठक में पाकिस्तान को निकाय के मौजूदा अध्यक्ष चीन के अलावा मलेशिया और तुर्की का समर्थन मिला.

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First published: February 18, 2020, 6:25 PM IST
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