तुर्की और पाकिस्तान का दोस्ताना मतलब एक तीर से दो निशाना, जानें क्या है पूरा खेल

तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री और पाकिस्तान एयरफोर्स के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान टीएफ-एक्स और लंबी दूरी के मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'सिपर' प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ.

तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री और पाकिस्तान एयरफोर्स के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान टीएफ-एक्स और लंबी दूरी के मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'सिपर' प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ.

Pakistan Economy: पाकिस्तान और चीन के बीच न सिर्फ रक्षा सहयोग बढ़ा है. बल्कि अब तो पाकिस्तान, चीन से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए कई उपकरणों को अपने यहां बना रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 17, 2021, 10:27 PM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान (Pakistan) और चीन (China) के रिश्ते तो जगजाहिर हैं, लेकिन इस्लामाबाद (Islamabad) अब तुर्की (Turkey) के साथ जुगलबंदी बनाने में जुटा है. दरअसल इस्लामिक दुनिया का मुखिया बनने की होड़ में तुर्की कुछ मुस्लिम देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है. इसका जीता जागता उदाहरण तुर्की द्वारा पाकिस्तान को अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट में शामिल करना है. हाल ही में दोनों देशों के बीच हथियारों के साझा तरीके से निर्माण को लेकर चर्चा और करार हुआ है.

पिछले साल तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री और पाकिस्तान एयरफोर्स के बीच पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमान टीएफ-एक्स और लंबी दूरी के मिसाइल डिफेंस सिस्टम 'सिपर' प्रोजेक्ट के लिए करार हुआ. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री एयरक्राफ्ट के डिजाइन और डेवलपमेंट, जिनमें एयरोडॉयनामिक्स, प्रोपल्शन, एयरक्राफ्ट स्ट्रक्चर और निर्माण पर काम करेगी, जिसमें पाकिस्तानी एयरफोर्स के अधिकारी भी शामिल होंगे. इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तानी वायुसेना के दस अधिकारी जून 2021 से 2023 तक दो साल के लिए हथियारों और उपकरणों के डिजाइन और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे.

मुस्लिम देशों पर तुर्की की नजर
सूत्रों की माने तो तुर्की ने पाकिस्तान के अलावा मलेशिया को भी इस प्रोग्राम में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. तुर्की की नजर पाकिस्तान, मलेशिया के अलावा इंडोनेशिया, बांग्लादेश और कजाखिस्तान पर डिफेंस पार्टनर और बाजार के तौर पर है. तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्री के सीईओ ने फाइटर विमान टीएफ-एक्स को 'बिग फाइटर जेट ऑफ दी मुस्लिम' करार दिया है.
एक तीर से दो निशाना


जानकारों का कहना है कि तुर्की का पाकिस्तान को अपने साथ जोड़ने का एक और मकसद ये हो सकता है कि चीन की तकनीक उसे हासिल हो सके, पाकिस्तान और चीन के बीच न सिर्फ रक्षा सहयोग बढ़ा है. बल्कि अब तो पाकिस्तान, चीन से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए कई उपकरणों को अपने यहां बना रहा है. पाकिस्तान भी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, इस प्रोजेक्ट का नाम अज़म है.

चीन, पाकिस्तान और तुर्की
पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त चीन के पास फिलहाल दो स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट हैं. इनमें जे-20 अभी इस्तेमाल में है, तो जे-31 पर काम जारी है. दूसरी ओर पाकिस्तान की आर्थिक हालत देखें तो उसे अपने इन्हीं मित्र देशों से उम्मीद है, जो उसे आर्थिक के साथ सामरिक मदद दे सकते हैं.

तुर्की भी पाकिस्तान से दोस्ती इसी वजह से बढ़ा रहा है, क्योंकि एक तरफ तो उसे चीन की तकनीक मिल सकती है, वही इस्लामिक दुनिया में अपनी पैठ बढ़ाकर मुस्लिम देशों का लीडर भी बन सकता है.
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