पाकिस्तान में औरत मार्च निकालने वाली महिलाओं को क्यों मिल रही हैं धमकियां

पाकिस्तान में औरत मार्च निकालने वाली महिलाओं को क्यों मिल रही हैं धमकियां
पाकिस्तान में औरत मार्च निकालने वाली महिलाओं को धमकाया जा रहा है

पाकिस्तान (Pakistan) जैसे रुढ़िवादी देश में औरतों के हक की आवाज बुलंद करना आसान नहीं हैं. पिछले साल उन्हें औरत मार्च निकालने पर जान से मारने से लेकर रेप करने तक की धमकी दी गई थी.

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पाकिस्तान (Pakistan) में इनदिनों औरत मार्च (Aurat March) की खूब चर्चा है. औरतों के अधिकार और हक की आवाज को सामने लाने के लिए हर साल 8 मार्च को पाकिस्तान की महिलाएं ‘औरत मार्च’ निकालती हैं. पाकिस्तान की सरकार से लेकर वहां की स्वयंसेवी संस्थाएं महिलाओं के इस मार्च का समर्थन करती हैं. लेकिन पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश में औरतों के हक की आवाज उठाना आसान नहीं है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में औरत मार्च निकालने वाली महिलाओं को धमकियां मिल रही हैं.

बीबीसी ने पिछले साल औरत मार्च में हिस्सा लेने वाली कुछ महिलाओं से बात की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे रुढ़िवादी देश में औरतों के हक की आवाज बुलंद करना आसान नहीं हैं. पिछले साल उन्हें औरत मार्च निकालने पर जान से मारने से लेकर रेप करने तक की धमकी दी गई थी. इस साल वो महिलाएं फिर से औरत मार्च निकाल रही हैं. लेकिन इस बार भी मार्च निकालना आसान नहीं है.

पाकिस्तान में औरतों को लेकर लोगों का संकीर्ण नजरिया
पाकिस्तान के रुढ़िवादी लोग अभी भी महिलाओं की जगह चादर और चारदीवारी के भीतर ही मानते हैं. हालांकि बदलते वक्त के साथ पाकिस्तान की महिलाएं भी दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह अपने अधिकार को लेकर मुखर हुई हैं. 2018 से पाकिस्तान की महिलाओं ने समाज में अपनी बराबरी के दर्जे और अपने प्रति होने वाली नाइंसाफी के प्रतिकार के तौर पर औरत मार्च की शुरुआत की थी. पाकिस्तान में तीसरी बार औरत मार्च निकाला जा रहा है. पाकिस्तान की मीडिया में इसकी खूब चर्चा हो रही है. लेकिन वहां का रुढ़िवादी समाज इसे अच्छा नहीं मान रहा है.



सोशल मीडिया पर औरत मार्च के समर्थन में कमेंट्स की बाढ़


फेसबुक पर औरत मार्च को लेकर कमेंट करने वाली महिलाओं की बाढ़ आई हुई है. पाकिस्तान की औरतें फेसबुक पर इस मार्च का जमकर समर्थन कर रही हैं. एक कैंपेन के तहत महिलाएं फेसबुक पर लिख रही हैं कि वो इस मार्च में क्यों हिस्सा ले रही हैं. कुछ महिलाओं ने फेसबुक पर लिखा है-

मैं मार्च करूंगी, क्योंकि मैं ऐसा कर सकती हूं.
उन बहनों के लिए जिन्हें सालन में उनकी फेवरेट बोटी को हाथ लगाने नहीं दिया जाता, क्योंकि वो भाई के लिए होता है, मैं उन बहनों के लिए मार्च करूंगी.
उस बीवी के लिए जिसे सिर्फ गोल रोटी न बना पाने की वजह से मरने की हद तक पीटा जाता है. मैं उसके लिए मार्च करूंगी.
उन बहनों के लिए जिन्हें अपने भाइयों की गदंगी भी साफ करनी पड़ती है क्योंकि उन्हें कहा जाता है कि ये लड़कियों का काम है. मैं उनके लिए मार्च करूंगी.
उन बीवियों के लिए जिन्हें शौहर का थप्पड़ खाकर भी चुप रहने को कहा जाता है क्योंकि मर्द को गुस्सा आ ही जाता है कभी. मेरा मार्च उनके लिए...

इस तरह के कमेंट के साथ पाकिस्तान के औरत मार्च में बड़ी से बड़ी संख्या में महिलाओं को हिस्सा लेने के लिए उत्साहित किया जा रहा है.  एक तरफ पाकिस्तान की महिलाएं औरत मार्च को लेकर उत्साहित हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान का रुढ़िवादी समाज उन्हें पर्दे के भीतर धकेलने को तैयार बैठा है.

पाकिस्तान का उदारवादी समाज भी औरत मार्च के खिलाफ
पिछले साल जिन महिलाओं ने औरत मार्च में हिस्सा लिया था, उन्हें ऑनलाइन धमकाया गया था. कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें जान से मारने से लेकर रेप करने तक की धमकी दी गई. पाकिस्तान के धार्मिक और दक्षिणपंथी दल इस बार फिर पाकिस्तान के औरत मार्च का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये मार्च इस्लाम के खिलाफ है. यहां तक की पाकिस्तान का उदारवादी समाज भी इसे महिलाओं का आक्रामक रवैया बता रहा है.

पाकिस्तान की महिलाएं कहती हैं कि यहां औरतों को लेकर लोगों की सोच इतनी संकीर्ण है कि पढ़ा लिखा और उदारवादी समाज भी उनके हक की आवाज को बर्दाश्त नहीं कर पाता.

पाकिस्तान में कैसे शुरू हुआ औरत मार्च
पाकिस्तान में औरत मार्च का आयडिया महिलाओं के एक ग्रुप को साल 2018 में आया. इस साल कुछ महिलाओं ने महिला दिवस के मौके पर कराची के एक पार्क में इकट्ठा होने का फैसला लिया. उनका कहना था कि हम एकजुट होकर औरतों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे. अमेरिका में इस तरह का मार्च महिला दिवस के मौके पर किया जाता है. वहीं से प्रेरणा लेकर पाकिस्तान की महिलाओं ने मार्च निकालने का फैसला किया और इस तरह से औरत मार्च अस्तित्व में आया.

इसके बाद इस मार्च में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ती गई. बाद में इसमें ट्रांसजेंडर लोग भी शामिल हो गए, जो अपने लिए बेहतर और सम्मानजनक कानून के साथ लोगों के बीच उनकी पहचान को लेकर जागरुकता फैलाए जाने की मांग कर रहे थे.

इस साल महिलाओं की आर्थिक आजादी है थीम
इस साल औरत मार्च की थीम है- महिलाओं की आर्थिक आजादी. पिछले साल महिलाओं ने मार्च की थीम रखी थी- मेरा जिस्म, मेरी मर्जी. ये माई बॉडी माई, चॉइस का उर्दू वर्जन था. लेकिन पाकिस्तान में इसे गलत तरीके से लिया गया. पाकिस्तान में इस स्लोगन को लेकर काफी बवाल हुआ. पाकिस्तान के रुढ़िवादी समाज ने इसे महिलाओं की सेक्सुएल फ्रीडम की मांग माना और पाकिस्तान की मीडिया तक में इसकी आलोचना हुई.

उस विवाद को अभी तक पाकिस्तानी मीडिया में घसीटा जा रहा है. यहां तक की पाकिस्तान की मशहूर गायिका और अभिनेत्री कुर्तुल-एन-बलोच ने भी औरत मार्च के विरोध में राय जाहिर की है. उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा- असल फेमिनिस्‍ट अपने काम पर ध्‍यान देते हैं. वे अपने अधिकार हासिल करने पर चीखने, रोने में वक्‍त बर्बाद नहीं करते.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और एमेनस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं ने इस मार्च का समर्थन किया है और पाकिस्तान के महिलाओं की खुलकर वकालत की है.

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First published: March 7, 2020, 4:31 PM IST
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