पोर्न वीडियो बेच रहे पाकिस्तानी को सजा, साढ़े 6 लाख से ज्‍यादा वीडियो बरामद

पोर्न वीडियो बेच रहे पाकिस्तानी को सजा, साढ़े 6 लाख से ज्‍यादा वीडियो बरामद
लाकडाउन के दौरान पूरी दुनिया में पोर्न की खपत बढ़ी है. माना जाता है कि दुनियाभर में जितने लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें तिहाई एडल्ट कंटेंट देखते हैं

केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल इश्तियाक ए. खान ने बताया कि अपराधी के कब्जे से 6 लाख, 57 हजार बच्‍चों के पोर्न वीडियो और अश्‍लील तस्‍वीरें बरामद की गई हैं. प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एक्‍ट 2016 की धारा 22 के तहत ऐसी सामग्री का किसी के पास होना दंडनीय अपराध है और इसकी सजा सात साल है.

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इस्‍लामाबाद. पाकिस्‍तान (Pakistan) के सूबे पंजाब (Punjab) में हाल में सआदत अमीन नाम के एक व्‍यक्ति को पकड़ा गया था, जो बच्‍चों के अश्‍लील वीडियो (Porn video) और तस्‍वीरें बेच रहा था. वहीं आरोपी के पास से बच्‍चों के 6 लाख, 57 हजार से ज्‍यादा पोर्न वीडियो और अश्‍लील तस्‍वीरें बरामद की गई. अब इस मामले में लाहौर हाई कोर्ट (Lahore High Court) ने भी आरोपी को दोषी मानते हुए निचली अदालत की सुनाई गई सात साल की सजा को बरकरार रखा है.

19 मई को लाहौर हाई कोर्ट ने दोषी की अपील पर सुनवाई की. 'उर्दू न्‍यूज डॉट कॉम' की खबर के मुताबिक इस बीच अभियुक्‍त की ओर से उनके वकील राणा नदीम अहमद ने अदालत में तर्क दिया कि मामले में कई खामियां थीं. उन्होंने कहा कि जिस व्‍यक्ति की गवाही पर यह मुकदमा बनाया गया है वह नार्वे का नागरिक है और निचली अदालत ने उसके बयान कलमबंद नहीं किए. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि उनके मुवक्किल पर साइबर क्राइम का आरोप नहीं लगाया गया था.

लाहौर हाई कोर्ट ने सात साल की सजा को बरकरार रखा
केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल इश्तियाक ए. खान ने अपने तर्कों में कहा कि नार्वे पुलिस मामले में वादी नहीं थी, उनसे केवल जानकारी ली गई थी. साथ ही उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि अपराधी के कब्जे से 6 लाख, 57 हजार बच्‍चों के पोर्न वीडियो और अश्‍लील तस्‍वीरें बरामद की गई हैं. प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एक्‍ट 2016 की धारा 22 के तहत ऐसी सामग्री का किसी के पास होना दंडनीय अपराध है और इसकी सजा सात साल है. वहीं मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश फारूक हैदर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया. इसमें दोषी सआदत अमीन की सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को बरकरार रखा है.



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