मक्का मस्जिद बलास्ट में आरोपियों के बरी होने पर क्या बोले पाकिस्तानी अखबार

साल 2007 में जुमे की नमाज के दौरान हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 58 लोग घायल हुए थे. स्वामी असीमानंद इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक थे. पाकिस्तान के ज़्यादातर अखबारों ने इस खबर को अपने तरीके से पेश किया.

नदीम अहमद | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 6:18 PM IST
मक्का मस्जिद बलास्ट में आरोपियों के बरी होने पर क्या बोले पाकिस्तानी अखबार
साल 2007 में जुमे की नमाज के दौरान हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी.
नदीम अहमद
नदीम अहमद | News18Hindi
Updated: April 17, 2018, 6:18 PM IST
पाकिस्तान के उर्दू अखबारों ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट के आरोपियों के बरी होने की खबर को खास तौर से जगह दी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने सोमवार को असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया था. साल 2007 में जुमे की नमाज के दौरान हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 58 लोग घायल हुए थे. स्वामी असीमानंद इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक थे. पाकिस्तान के ज़्यादातर अखबारों ने इस खबर को अपने तरीके से पेश किया.

आरोपियों के बरी होने को बताया 'हिंदू कट्टरपंथ'
पाकिस्तान के उर्दू अख़बार 'जंग' ने इस खबर को प्रमुख से छापा है. 'जंग' ने तमाम बरी होने वाले आरोपियों को हिन्दू कट्टरपंथी' क़रार दिया. अखबार की हेडलाइन थी- भारत में मक्का मस्जिद ब्लास्ट के तमाम हिन्दू कट्टरपंथी आरोपी बरी.

अख़बार ने लिखा कि भारतीय अदालत ने मक्का मस्जिद ब्लास्ट के तमाम कट्टरपंथी आरोपियों को सबूत के आभाव में रिहा कर दिया. अखबार ने अभिनव भारत को कट्टरपंथी संगठन बताते हुए लिखा कि उसके कबूलनामे के बाद भी आरोपी रिहा कर दिए गए.

जसारत ने अदालती फैसले को बताया विवादित
पाकिस्तानी अखबार जसारत ने लिखा है कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट के क़ौम परस्त हिन्दू अरोपी बरी कर दिए गए. हालांकि हिन्दू कट्टरपंथ ग्रुप RSS का एक स्थानीय नेता स्वामी असीमानंद जो इस घटना का असल मुल्ज़िम था, उसने 2011 में मजिस्ट्रेट के सामने खुद अपना जुर्म क़ुबूल किया था. और इसे मुसलमानों के खिलाफ बदले के लिए की गई वारदात बताया था. अख़बार आगे लिखता है कि अदालत के इस 'विवादित फैसले' के बाद भारत में एक नई बहस शुरू होगी.

'एक्सप्रेसिव' ने भी साधा निशाना
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वहीं 'एक्सप्रेसिव डॉट पीके' ने स्वामी असीमानंद निशाना साधते हुए लिखा कि इसने जांच के दौरान अपना जुर्म कुबूल किया था और कहा था कि हिन्दू कट्टरपंथियों ने मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ दरगाह सहित देश के कई हिस्सों में धमाके किए हैं और फिर बाद में वह किस तरह अपने बयान से पलट गया.

पढ़ें- मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस: जानिए कब, क्या हुआ?
असीमानंद सहित सभी आरोपियों को बरी करने वाले जज ने दिया इस्तीफा
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