इजराइल- UAE के समझौते से फिलीस्तीन भड़का, राजदूत को बुलाया वापस

इजराइल- UAE के समझौते से फिलीस्तीन भड़का, राजदूत को बुलाया वापस
UAE- इजराइल की डील से फिलीस्तीन नाराज

UAE-Israel Deal: इजराइल के साथ संयुक्त अरब अमीरात की डील को फिलीस्तीन ने धोखा बताया है. फिलीस्तीन ने विरोध दर्ज कराते हुए यूएई से अपने राजदूत को भी वापस बुला लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 12:11 PM IST
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वेस्ट बैंक. इजराइल और यूएई (UAE-Israel Deal) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मध्यस्थता में हुए ऐतिहासिक समझौते का फिलीस्तीन (Palestinians) ने कड़ा विरोध किया है. फिलिस्तीन ने इस समझौते को रद्द करने की मांग की है और यूएई से अपने राजदूत को भी वापस बुला लिया है. इस समझौते के तहत इजराइल और यूएई आने वाले सालों में आपसी संबंधों को सामान्य करेंगे. उधर इजराइल ने भी वादा किया है कि वेस्ट बैंक को मिलाने की अपनी योजना को स्थगित कर रहा है. इस समझौते के बाद यूएई पहला ऐसा खाड़ी देश और तीसरा अरब देश बन गया है जिसने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किये हैं.

UAE से पहले मिस्त्र और जॉर्डन ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. व्हाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि ये समझौता इजराइल, यूएई और अमेरिका के बीच हुई लंबी चर्चा के बाद हुआ है. हालांकि, क्षेत्र में ईरान की चुनौती के मद्देनजर इजराइल और यूएई पहले भी एक-दूसरे को चोरी-छिपे सहयोग करते रहे हैं. फिलीस्तीनी समूहों का कहना है कि इससे फिलीस्तीनियों के उद्देश्य और उनके अधिकारों को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया है. हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने एक बयान में कहा, ये समझौता फिलिस्तीनियों की किसी तरह से मदद नहीं करता है बल्कि इससे यहूदीवाद की सेवा होगी. ये समझौता इजराइल को फिलिस्तीनियों के अधिकारों के हनन और उनके खिलाफ अपराध को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है. फिलीस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) की एक सदस्य हनान आशरावी ने कहा, यूएई इजराइल के साथ अब अपने चोरी-छिपे कायम किए संबंधों को खुलकर सामने ले आया है.


दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयानअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इजराइल-यूएई के बीच हुए समझौते का ऐलान किया. उन्होंने दोनों देशों के साझा बयान को ट्वीट करते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया. ट्रंप ने कहा कि हमारे दो करीबी दोस्तों इजराइल और यूएई के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है. इस समझौते से ठीक पहले, ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायेद नाहयान के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. ट्रंप के यूएई और इजराइल के रिश्ते सामान्य होने को लेकर किए गए ट्वीट पर नेतन्याहू ने रिप्लाई कर इसे ऐतिहासिक दिन बताया. हालांकि, कुछ देर बाद हुई न्यूज कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने कहा कि वह फिलहाल समझौते के तहत वेस्ट बैंक को इजरायल में मिलाने की योजना को स्थगित कर रहे हैं लेकिन वह वेस्ट बैंक की जमीन पर अपना अधिकार कभी नहीं छोड़ेंगे.



यूएई और इजराइल के साझा बयान में कहा गया है, "इस ऐतिहासिक समझौते के बाद मध्य-पूर्व में शांति स्थापित होगी. तीनों नेताओं की दूरदृष्टि और उनका साहस क्षेत्र में शांति के नए रास्ते खोलेगा." इजराइल और यूएई आने वाले वक्त में निवेश, पर्यटन, सुरक्षा, संचार व अन्य मुद्दों पर द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे. व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में ट्रंप ने उम्मीद जताई कि मध्य-पूर्व के बाकी देश भी यूएई का अनुसरण करेंगे. ट्रंप ने कहा, रिश्तों पर जमी हुई बर्फ पिघल गई है, मुझे उम्मीद है कि अरब और अन्य मुस्लिम देश भी अब यूएई के रास्ते पर कदम आगे बढ़ाएंगे. इस ऐतिहासिक समझौते से डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के मामले में एक बड़ी जीत हुई है. इसका फायदा ट्रंप को चुनाव में भी मिल सकता है. बता दें कि यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान भी इजराइल की तरह मुस्लिम ब्रदरहुड और गाजा पट्टी के हमास आतंकी संगठन को लेकर सशंकित रहते हैं.
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