यूरोपीय संघ में वैक्सीन को लेकर बढ़ रही है झिझक, खून में थक्‍के जमने के आए थे केस

ईयू में लोगों में वैक्‍सीन के प्रति झिझक उत्‍पन्‍न हो रही है. (File pic)

ईयू में लोगों में वैक्‍सीन के प्रति झिझक उत्‍पन्‍न हो रही है. (File pic)

Corona Vaccination: यूरोफाउंड के वरिष्ठ रिसर्च मैनेजर डेफन आरेंड का कहना है कि इस तरह की रिसर्च बताती हैं कि किस तरह नीति निर्माता और जनता के बीच भरोसे की कमी है.

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नई दिल्‍ली. यूरोपीय संघ (EU) में वैक्सीन (Corona vaccine)  को लेकर झिझक बढ़ती जा रही है. एस्ट्राजेनेका पीएलसी (Astrazeneca) की वैक्सीन को रद्द किए जाने के बाद क्षेत्र के एक तिहाई से ज्यादा वयस्कों को इस बात का डर है कि वैक्सीन के जरिए कोविड-19 से उनका बचाव मुश्किल लग रहा है. मध्य मार्च में यूरोपियन संघ के कई देशों ने एस्ट्राजेनेका के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद यूरोफाउंड के एक ऑनलाइन सर्वे में 34 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वे वैक्सीन लेने में झिझक रहे हैं. 25 फीसदी ने कहा कि उनके वैक्सीन लेने की संभावना अब बहुत कम है.

यूरोफाउंड के वरिष्ठ रिसर्च मैनेजर डेफन आरेंड का कहना है कि इस तरह की रिसर्च बताती हैं कि किस तरह नीति निर्माता और जनता के बीच भरोसे की कमी है और वैक्सीन के असर और उसकी सुरक्षा को लेकर सही जानकारी साफतौर पर लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है. जरूरी है कि सरकारें, सही और स्पष्ट तरीके से लोगों तक यह बात पहुंचा पाए कि वैक्सीन क्यों और किसलिए जरूरी है.

ईयू की इस वैक्सीन की शुरुआत बेहद धीमे हुई और जब एस्ट्राजेनेका के लगाए जाने के बाद खून के थक्के जमने की शिकायत आई तब मामला और चिंताजनक हो गया. यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने इस हालत को साइट इफेक्ट में शामिल किया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वैक्सीन का फायदा उसके खतरे से कहीं ज्यादा है. ईयू की कम से कम 30 फीसदी आबादी इस वैक्सीन का पहला डोज ले चुकी है. वहीं अमेरिकी की 46 फीसदी आबादी यह डोज ले चुकी है.


रिसर्च के मुताबिक वैक्सीन को लेकर झिझक सबसे ज्यादा बुलगारिया में देखी गई जहां 61 फीसदी प्रतिभागियों ने शंका जताई है. वहीं हाल ही में ईयू को छोड़ने वाले देश यूके में वैक्सीन को लेकर दुनिया को लेकर सबसे कम झिझक देखी गई.

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